manu mahotsav banner 2
Categories
डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से राजनीति समाज

संभल विवाद की वास्तविकता

1947 में जब देश आजाद हुआ तो एक मिथक कांग्रेस की ओर से गढ़ा गया कि देश को आजाद कराने में हिंदू – मुस्लिम दोनों समुदायों का बराबर का योगदान है । यद्यपि मुस्लिम अपने लिए अलग देश लेने में सफल हो गए थे, परन्तु जो मुसलमान उस समय देश में रह गए थे, उनका […]

Categories
समाज

ओ३म् “वैदिक विवाह का स्वरूप और आधुनिक विवाह परम्परा में धन का अपव्यय”

================ संसार का सबसे प्राचीन धर्म व संस्कृति वैदिक धर्म है। संसार के सभी मनुष्यों का धर्म एक ही होता है और वह वैदिक धर्म ही है। वैदिक धर्म वेदानुकूल सिद्धान्तों पर आधारित मान्यताओं के पालन को कहते हैं। वेद से भिन्न इतर मान्यताओं का पालन धर्म नहीं होता। आजकल संसार में जितने भी मत-मतान्तर […]

Categories
समाज

रिश्तों की कीमत पर विवाहेत्तर संबंध का मजमा*

-राजेश बैरागी- हालांकि इस प्रकार की घटनाएं न तो अद्भुत रह गई हैं और न अभूतपूर्व। गौतमबुद्धनगर जनपद के गांव जारचा निवासी शाहरुख ने अपनी उम्र में बड़ी चाची की गला रेत कर हत्या कर दी। चाची विधवा थी और भतीजे के साथ कई वर्षों से अवैध संबंध में थी। पुलिस ने शाहरुख को गिरफ्तार […]

Categories
समाज

जनजातीय सम्मान को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा है मध्य प्रदेश

– लोकेन्द्र सिंह मध्यप्रदेश वह राज्य है, जिसकी पहल पर देश को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मिला है। यह बात तो हर कोई मानता है कि मध्यप्रदेश की सरकार ने जनजातीय नायकों का गौरव बढ़ाने के लिए उनसे जुड़े स्मारकों का आगे बढ़कर विकास किया है। राजा शंकरशाह और रघुनाथ शाह, रानी कमलापति, रानी दुर्गावती, टंट्या […]

Categories
समाज

भारतीय समाज को लेकर स्वामी दयानंद का चिंतन

■ स्वामी दयानन्द का भारतीय समाज का ज्ञान… “…विवेकानन्द ने भारतीय अध्यात्म के अद्वैत तत्त्व पर बल दिया है और गाँधी ने वैष्णव भावना को महत्त्व प्रदान किया है। ये दोनों तत्त्व भारतीय दर्शन, साधना और अध्यात्म के उच्चतम स्वरूप का परिचय दे सकते हैं, परन्तु सपूर्ण भारतीय मानस को इन तत्त्वों ने एकांगी और […]

Categories
समाज

*पर्वों पर भी गालीबाज पतियों की गाली खाती है महिलाएं*!

लेखक आर्य सागर तिलपता ग्रेटर नोएडा 🖋️ भारतीय समाज पर्व प्रधान है । प्रत्येक पर्व के केंद्र में महिलाएं और पुरुष होता है विशुद्ध ऐसा कोई भी पर्व नहीं है जो महिला प्रधान हो या पुरुष प्रधान हो। हरितालिका तीज करवा चौथ भाई दूज रक्षाबंधन जैसे पर्व में भी पुरुष चरित्र का प्रवेश हो जाता […]

Categories
समाज

अब गांव में नहीं दिखता है पुस्तकालय

रिंकू कुमारी मुजफ्फरपुर, बिहार भारत सदियों से शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. दुनिया भर से विद्यार्थी यहां पढ़ने आते रहे हैं. इसमें पुस्तकालय यानि लाइब्रेरी की ख़ास पहचान रही है. ज्ञान-विज्ञान, शोध-अध्ययन व दर्शन की परंपरा को आगे बढ़ाने में पुस्तकालय ने अहम भूमिका निभाई है. यहां केवल किताबों का भंडार नहीं होता है […]

Categories
समाज

विश्व खाद्य दिवस बनाम भुखमरी का संसार

विश्व खाद्य दिवस-16 अक्टूबर, 2024 -ः ललित गर्ग:- विश्व खाद्य दिवस 16 अक्टूबर को दुनिया भर में हर साल मनाया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है। 1945 में संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन की स्थापना उपलक्ष्य में यह दिवस भूख और खाद्य सुरक्षा से संबंधित कई अन्य संगठनों द्वारा व्यापक रूप से मनाया जाता […]

Categories
समाज

विकसित समाज के निर्माण में महिलाओं की शिक्षा जरूरी है

विकसित समाज के निर्माण में महिलाओं की शिक्षा जरूरी है रामश्री लूणकरणसर, राजस्थान किसी भी समाज के विकास में शिक्षा को महत्वपूर्ण कारक माना गया है. बात जब हम महिलाओं की शिक्षा की करते हैं तो यह न केवल सामाजिक विकास बल्कि सामाजिक न्याय का भी एक महत्वपूर्ण पहलू हो जाता है. महिलाओं की शिक्षा […]

Categories
समाज

सामाजिक विकास में बाधक है लैंगिक हिंसा

सिमरन सहनी मुजफ्फरपुर, बिहार बिहार के मुजफ्फरपुर से करीब 60 किमी दूर साहेबगंज ब्लॉक के हुस्सेपुर जोड़ा कान्ही गांव की 22 वर्षीय रजनी के पिता ने उसका कॉलेज जाना सिर्फ इसलिए बंद करवा दिया गया क्योंकि वह एक दिन जींस पहनकर गई थी. वह कहती है कि उसे कॉलेज पढ़ने की इजाज़त तो मिल गई […]

Exit mobile version