अल्लाह के इस्लाम और मुल्ला के इस्लाम के बीच जब यह गुप्त समझौता हुआ तो उसके पश्चात इन गुंडों में से जो बादशाह ,सुल्तान या सेनापति बने उन्होंने संसार में कत्लेआम का ऐसा इतिहास लिखा जो केवल और केवल मजहबी जुनून, मजहबी उन्माद और कट्टर सांप्रदायिकता का वह इतिहास है जिसमें सर्वत्र मानवता की लाश […]
Category: भयानक राजनीतिक षडयंत्र
कुरान की काफिरों के प्रति शिक्षा गांधीजी ने चाहे कितना ही कह लिया कि: – ” ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान ।” पर उनके इस गीत का मुस्लिम साम्प्रदायिकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा । वह अपने एजेंडा पर काम करती रही । गांधी जी के इस प्रकार के आलाप से वह […]
मजहब को कुछ लोगों ने ‘अफीम’ की संज्ञा दी है। इसका कारण है कि मजहब का नशा मानव को मानव बनने ही नहीं देता है। मजहब व्यक्ति को हिन्दू बनाता है, मुसलमान बनाता है, ईसाई बनाता है, सिक्ख बनाता है। और भी बहुत कुछ बनाता है, पर मानव नहीं बनाता। मजहबी दृष्टिकोण से यदि व्यक्ति […]
डॉ विवेक आर्य पाकिस्तान में धार्मिक कट्टरता के उदय और उसके प्रसार के लिए पूर्व सैन्य तानाशाह जनरल ज़िया-उल-हक़ की सरकार और उसके बाद मुस्लिम कट्टरपंथियों की ताक़त को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है. लेकिन पाकिस्तानी इतिहास के एक अहम किरदार, जोगिंदरनाथ मंडल ने 70 साल पहले ही तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को लिखे अपने त्यागपत्र […]
आप किसी भी मसले पर विरोध कर रहे मुस्लिम महिला प्रदर्शनकारी और हिंदू महिला प्रदर्शनकारियों को देखिए और दोनों में फर्क को आप समझिए। यह वामपंथ कितने शातिर और कितने धूर्त होते हैं कि यह हिंदुओं को तो यह समझाने में कामयाब हो जाते हैं धर्म अफीम है धर्म खराब है धर्म नफरत फैलाता […]
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार मुगलों का महिमामंडन मुख्यधारा की मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर उदारवादियों और वामपंथियों द्वारा अक्सर किया जाता है। यहाँ तक भी दावे किए जाते हैं कि औरंगजेब जैसे आक्रांताओं ने भी भारत में रहते हुए मंदिरों की रक्षा […]
मजहब को कुछ लोगों ने ‘अफीम’ की संज्ञा दी है। यद्यपि ऐसा कहने वाले लोगों ने मजहब को धर्म का समानार्थक या पर्यायवाची मानकर अपनी ऐसी धारणा व्यक्त की है, परन्तु सत्य यह है कि मजहब और धर्म में जमीन आसमान का अन्तर है। मजहब सचमुच एक अफीम है और एक ऐसा नशा भी […]
पश्चिम एसिया और भारत-भारतीय इतिहास में अंग्रेजों द्वारा इतनी भयानक जालसाजी हुयी है कि कोई भी वर्णन पश्चिम या मध्य एसिया के इतिहास से नहीं मिलता है और पूर्व भाग के बारे में बिलकुल ही भूल गये। राजतरंगिणी के अनुसार गोनन्द वंश का ६२वां राजा हिरण्यकुल था जिसने लौकिकाब्द २२५२-२३१२ अर्थात् ८२४-७६४ ई.पू. तक शासन […]
– प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज भारत पर अंग्रेजों की असली जीत 14 एवं 15 अगस्त 1947 ईस्वी को हुई है। क्योंकि उस दिन पहली बार वे भारत में अपने एक ऐसे उत्तराधिकारी समूह को अपनी सत्ता सौंप कर जाने में सफल हुये जो उनसे कई गुना बढ़कर अंग्रेजों का भक्त था और जिसे प्रत्येक भारतीय […]
लेखक:- प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज यूरो-ईसाई लेखन को कैसे पढ़े? पूर्व में हमने 19वीं शती ईस्वी के यूरोप की पृष्ठभूमि बताई है। इस पृष्ठभूमि की जानकारी के साथ हमें इन यूरोपीय ईसाई कथित इतिहास लेखकों के लेखन को पढ़ना चाहिये। इनके लिखने का प्रयोजन क्या है, यह सदा समझ लेना चाहिये। इसके लिये एक तो […]