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अन्य कविता

जीवन का ध्येय

जीवन जटिल आयु सीमित है, इसका भी कर ध्यान तू।यथा शक्ति नित करता चल, इस सृष्टि का त्राण तू। विकास और शांति को बना ले, इस जीवन का ध्येय।ईश्वर का प्रतिनिधि होने का, तभी मिलेगा श्रेय। ईष्र्या प्रतिशोध की अग्नि, कर शांत क्षमा के नीर से।भोग में नही, त्याग में सुख है, बच हिंसा के […]

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आंसू बह आए गालों पर

आंसू और आहें बनेंगी, एक दिन तूफान।कुर्सी, कार कोठी, बंगले, नही रहेंगे आलीशान। चूर-चूर हो जाएगा, तेरा झूठा अभिमान।हैवानियत का हो नशा दूर, तू बन जाए इंसान। निशिदिन होता न्याय प्रभु का, समझते बुद्घिमान।धराशायी कर दिये आहों ने, कितने ही धनवान। किसका साथ दिया है धन ने, किसका साथ निभाएगा?ये साधन हैं साध्य नही, यही […]

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कोठी की मुस्कान में

किंतु नकली थी दवाई, व्यर्थ रहे प्रयास सब।विस्मय में हैं डाक्टर, रोगी ने तोड़ा सांस जब। हाय मेरा लाल कहकर, मां बिलखती जोर से।अंत:करण भी कराह उठा, उस दुखिया के शोर से। किंतु नही पसीजा हृदय, तू बहरा और अंधा है।उन्नत मानव का दम भरता, करता काला धंधा है। जीवन का तूने लक्ष्य बनाया, कार […]

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यह कैसी उन्नति?

बनाता है योजना क्यों, आज भी विनाश की? बात करता शांति की, तैयारी है जंग की।चिंता कभी हुई नही, भूखे नंगे अंग की। गोली पर तू खर्च करता, भाई झपट रहे रोटी पर।शरमाता नही, हंसता कहता, मैं हूं उन्नत की चोटी पर। टोही उपग्रह और मिजाइल, किसके लिए लगाता है?बच नही पाएगा वो भी, जो […]

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प्रकृति की पीड़ा

तेरे हृदय की ज्वाला, रही धधक गोली और गोलों में।अपनी मृत्यु आप बंद की, परमाणु के शोलों में। बढ़ रही बारूदी लपटें, निकट अब विनाश है।मौत का समान ये, कहता जिसे विकास है। यदि यही है विकास तो, पतन बताओ क्या होगा?यदि यही है सृजन तो, विध्वंस बताओ क्या होगा? सैनिक व्यय बढ़ रहा विश्व […]

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विकास है या पतन?

तू मौत का ढंग तो जानता है, पर जीवन की पहचान नही।हिंसा का बन व्याघ्र गया, जो कहता अपने को मानव यदि यही है उन्नत मानव, तो कैसा होगा दानव?करता अट्टाहास जीत पर, खून बहाकर भाई का। कितनी भक्ति की भगवान की, क्या किया काम भलाई का?शांत शुद्घ अंत:करण से, क्या कभी यह सोचकर देखा?निकट […]

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आधुनिक उन्नत मानव से?

क्या कभी यह सोचकर देखा? निकट है काल की रेखा।आओ मिलें अब उन लोगों से, जो आधुनिक उन्नत हैं। खून तलक पी जाएं बसर का, कहते हम गर्वोन्नत हैं।ईमान बेच दें टुकड़ों पर, और करते हैं हेरा फेरी। मानवता की हत्या करते, लगती नही इनको देरी।आज विश्व का देश द्रव्य को, व्यय कर रहा है […]

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आधुनिक उन्नत मानव से?

क्या कभी यह सोचकर देखा? निकट है काल की रेखा।आओ मिलें अब उन लोगों से, जो आधुनिक उन्नत हैं। खून तलक पी जाएं बसर का, कहते हम गर्वोन्नत हैं।ईमान बेच दें टुकड़ों पर, और करते हैं हेरा फेरी। मानवता की हत्या करते, लगती नही इनको देरी।आज विश्व का देश द्रव्य को, व्यय कर रहा है […]

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अंतिम हश्र

तेरी कोमल काया के नही, चिन्ह दृष्टि कहीं आएंगे।पंचभूतों में पंचभूत, ये सारे ही मिल जाएंगे। पृथ्वी की उर्वरा शक्ति को, तेरे अवशेष बढ़ाएंगे।हरी-हरी फिर घास जमेगी, जिसे पशु चर जाएंगे। ध्यान कर उस हश्र का, जो अंतिम पल पर होवेगा।यदि सुरभि है तेरे अंदर, तभी जहां तुझे रोवेगा। बागबां है ये जहां, और कली […]

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मृत्यु की चुनौती

देख दशा यह बुढिय़ा की, अब अपनी तबियत घबराती।चलने की तैयारी कर ले, कहती मौत निकट आती। राजा, ऋषि, योगी ना छोड़े, तेरी तो क्या हस्ती है।सृजन को दूं बदल विनाश में, मेरी तो ये मस्ती है। हर बसर के कर्म का, रखती हूं मैं लेखा।निकट है काल की रेखा। देखा अगणित कलियों को, जो […]

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