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इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू

इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू – अध्याय -4

इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू ( डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया की डिस्कवरी ) भारत के अतीत का विशाल दृश्य डॉ राकेश कुमार आर्य हिंदुस्तान की कहानी में “हिंदुस्तान के अतीत का विशाल दृश्य” नामक अध्याय के शीर्षक को पढ़ने से लगता है कि नेहरू जी अपनी इस पुस्तक में रामायणकालीन, महाभारतकालीन और इस बीच या उसके […]

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इतिहास के पन्नों से

जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब की हिंदू नीति – भाग- 2

मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना पुस्तक से .. डॉ राकेश कुमार आर्य शाहजहाँ ने रख लिया था अपना नाम द्वितीय तैमूर शाहजहाँ ने अपना नाम द्वितीय तैमूर भी रख लिया था। इसके पीछे उसका कारण केवल यही था कि वह तैमूर की क्रूरता व निर्दयता को अपना आदर्श मानता था और […]

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इतिहास के पन्नों से

क्या आप सरदार पटेल पर.. मुस्लिमों के जानलेवा हमले के बारे में जानते हैं..?

क्या आप सरदार पटेल पर.. मुस्लिमों के जानलेवा हमले के बारे में जानते हैं..? बिल्कुल नहीं.. क्योंकि यह स्कूलों के शिक्षाक्रम से निकाल दिया गया है.. क्योंकि इससे भाईचारे वाले मजहब की सच्चाई सामने आती है..! आज भी कहीं दंगे होते हैं.. तो दंगा करने वाले समाज का नाम प्रकाशित करने पर पाबंदी है.. क्या […]

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जब नेहरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति की उपेक्षा कर संविधान की मूल प्रति पर पहले स्थान पर कर दिए थे अपने हस्ताक्षर

डॉ राकेश कुमार आर्य यह एक आश्चर्यजनक संयोग ही था कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जहां तड़क-भड़क का जीवन जीने में विश्वास रखते थे, वहीं देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद पूर्णतया सादगी से रहना पसंद करते थे। नेहरू जी पर विदेशी संस्कृति का प्रभाव था, जबकि डॉ राजेंद्र प्रसाद भारतीयता […]

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इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू

इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू – अध्याय 3

वारिस होना खतरनाक है (डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया की डिस्कवरी) डॉ राकेश कुमार आर्य भारत की सांस्कृतिक विरासत की संसार के अनेक विद्वानों ने मुक्त कंठ से सराहना की है, परंतु (नेहरू जी कई बार और कई स्थानों पर भारतीय सांस्कृतिक विरासत की प्रशंसा करने के उपरांत भी) भारत की वैदिक सांस्कृतिक विरासत या धरोहर पर […]

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इतिहास के पन्नों से

जब नेताजी ने कहा था कि चरण स्पर्श करना या शीश झुकाना गुलामी का प्रतीक है, इसलिए केवल जय हिंद बोलो…

डॉ राकेश कुमार आर्य आज मैं बिहार के सासाराम जिले में प्रवास पर हूं। यहां पर तिलौथू हाउस में श्रीमान रणजीत सिन्हा जी के यहां रुका हुआ हूं। यहां पर कई प्रकार की विशेष जानकारी प्राप्त हुई। श्रीमान सिंह जी के एक संबंधी आजाद हिंद फौज की लेफ्टिनेंट लेफ्टिनेंट भारती ‘आशा’ सहाय चौधरी के सुपुत्र […]

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इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू

इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू (अध्याय – 2)

डॉ राकेश कुमार आर्य ( ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया की डिस्कवरी’ ) मार्क्सवादी नेहरू और भारतीय इतिहास नेहरू जी की मान्यता थी कि ” मार्क्स और लेनिन की रचनाओं के अध्ययन का मुझ पर गहरा असर पड़ा और इसने इतिहास और मौजूदा जमाने के मामलों को एक नई रोशनी में देखने में बड़ी मदद पहुंचाई । […]

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इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू

इतिहास का विकृतिकरण और नेहरू

( ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया की डिस्कवरी’ ) अध्याय 1 नेहरू जी और धर्म की परिभाषा वर्तमान में धर्म , मजहब और रिलीजन – इन तीनों को एक मानने की अवैज्ञानिक, अतार्किक और सृष्टि नियमों के सर्वथा प्रतिकूल अवधारणा कार्य कर रही है। भारत की राजनीति में जिस धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को अपनाया गया है, उसमें […]

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स्वर्णिम इतिहास

राजन तुम हो साँच खरे, खुब लढे तुम जंग

राजन तुम हो साँच खरे, खुब लढे तुम जंग । देखत तव चंड प्रताप जही, तखत त्यजत औरंग ।। ‘कवि कलश’ ऐतिहासिक विषय या क्रांतिकारीयो पर कोई फिल्म आती है तो में उसे जरूर देखता हूं मल्टीप्लेक्स में जाकर। अभी 2 दिन पहले ‘छावा’ फिल्म देखी जो हिंदवी साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी के पुत्र […]

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इतिहास के पन्नों से हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

हिंदू राष्ट्रनीति व हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज (क)

सन 1674 तक शिवाजी अधिकांश प्रांतों या क्षेत्रों पर अपना अधिकार स्थापित कर चुके थे जो उन्हें पुरंदर की संधि के अंतर्गत मुगलों को देने पड़े थे । अतः अब वह अपने आपको राजा घोषित कराने की तैयारी करने लगे थे । उधर मुगलों ने जब शिवाजी महाराज के उद्देश्यों को समझा तो उन्होंने शिवाजी […]

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