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संपादकीय

अधिकार से पहले कर्तव्य, अध्याय — 14 , महिलाओं के कर्तव्य

महिलाओं के कर्तव्य वर्तमान समय में महिलाओं के सशक्तिकरण की बातें की जाती हैं । जिसके लिए महिलाओं के अनेकों संगठन देश में काम कर रहे हैं । जो महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हैं । क्या ही अच्छा हो कि ये सभी संगठन महिलाओं के अधिकारों की अपेक्षा उन्हें उनके कर्तव्यों का […]

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संपादकीय

हर भारतवासी को गर्व है अपनी सेना के शौर्य और पराक्रम पर

सूखे चने चबाकर देश के लिए मर मिटने की भावना संसार में यदि किसी सेना के भीतर मिलती है तो वह केवल और केवल भारत की सेना के भीतर मिलती है। आज से नहीं सदियों से और सदियों से नहीं बल्कि युग युगों से अपने देश के लिए मर मिटने की भावना भी यदि संसार […]

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संपादकीय

समाज सुधार , धर्मनिरपेक्षता और इस्लामिक कानून पर डॉक्टर अंबेडकर के विचार

कोई भी समाज बहुत अधिक समय तक किन्ही पुराने कानूनों के आधार पर नहीं चल सकता । देश , काल , परिस्थिति के अनुसार समाज की परम्पराएं परिवर्तित हो जाती हैं । उनमें नवीनता बनाए रखने के लिए ऐसी विधि समाज के पास होनी चाहिए जो समाज को प्रगतिशील बनाए रखे। परम्पराओं को पकड़कर रखने […]

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संपादकीय

मुसलमानों में प्रचलित जाति प्रथा और बाबासाहेब अंबेडकर

मुसलमानों में भी जाति प्रथा है । यद्यपि हमारे भीतर कुछ ऐसा भाव बैठाया गया है जैसे जाति प्रथा केवल हिन्दू समाज में है और इस जाति प्रथा को भी ब्राह्मणों ने अपने आपको श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए बनाया है। मुसलमानों की जाति – प्रथा पर भी बाबासाहेब के वैसे ही स्पष्ट विचार थे […]

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संपादकीय

बाबासाहेब का था इस्लाम के बारे में व्यावहारिक चिंतन : इस्लाम के नाम पर होने वाले दंगों को कहा था मुस्लिमों की राजनीतिक गुंडागर्दी

आजकल ‘सोशल मीडिया’ पर ऐसी पोस्ट अक्सर आपको पढ़ने को मिल जाएंगी जिनको देखकर लगता है जैसे डॉ अम्बेडकर जी मुस्लिम धर्म की मान्यताओं से बहुत अधिक सहमत थे और मुस्लिम व दलित समाज के लोग ही वास्तविक भारतीय हैं , शेष सभी लोग विदेशी हैं। ऐसी पोस्ट डालने वाले माँ भारती से द्वेष रखते […]

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‘जय भीम और जय मीम’ कहने वालो ! डॉक्टर अंबेडकर को लज्जित मत करो

डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर एक कट्टर राष्ट्रवादी व्यक्तित्व का नाम है । जिन्होंने नेहरू और गांधी की दोगली नीतियों का विरोध करते हुए और लगभग उन्हें नकारते हुए कई अवसरों पर अपने स्पष्ट राष्ट्रवादी विचार रखे । वे चाहते थे कि भारतवर्ष का विभाजन यदि मजहब के नाम पर हो ही रहा है तो भविष्य की […]

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‘उगता भारत’ का संपादकीय : ऐतिहासिक तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में भारत – नेपाल सीमा विवाद

चीन प्रारंभ से ही भारत को एशिया में दबाकर रखना चाहता रहा है । विश्व का नेतृत्व अपने हाथों में लेने के लिए वह हरसंभव यह प्रयास करता है कि भारत किसी भी रूप में उभरने न पाए । इसके लिए उसने पाकिस्तान को भारत के विरुद्ध हर समय उकसाने में कभी कोई कमी नहीं […]

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संपादकीय

हिंदुओं ! मेवात दिखा रहा है तुम्हें आईना

  इस देश के तथाकथित सनातनी हिंदू ने अभी अपनी परंपरागत नींद को त्यागा नहीं है । इसने सोते-सोते अफगानिस्तान , पाकिस्तान , बांग्लादेश , ईरान , इराक , अरब और कभी के जंबूद्वीप कहे जाने वाले आज के यूरेशिया के उन अनेक देशों , भौगोलिक स्थानों , भूखंडों को पानी के भाव बहा दिया […]

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संपादकीय

नेताजी सुभाष चंद्र बोस को “तोजो का कुत्ता” कहने वाले कम्युनिस्टों का असली चेहरा और भारत की एकता व अखंडता

वर्त्तमान विश्व का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि आजकल जितनी भी राजनीतिक विचारधाराएं हैं , वह सब की सब ‘येन केन प्रकारेण’ अपने – अपने देश की सत्ता पर कब्जा करने की युक्तियां खोजती रहती हैं । तर्क यह दिया जाता है कि राजनीतिक स्वतंत्रता के नाम पर ऐसा कुछ भी करने का किसी […]

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संपादकीय

भारत की सफल होती कूटनीति ,पर – – – –

जब विश्व में गुटनिरपेक्ष आंदोलन अपने चरम पर था , तब कर्नल गद्दाफी ने उस आंदोलन के बारे में कहा था कि इस संगठन से यदि भारत को निकाल दिया जाए तो यह नपुंसकों की चौपाल मात्र है । सचमुच उस संगठन के बारे में कर्नल गद्दाफी का यह कहना सर्वथा उचित ही था । […]

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