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धर्म-अध्यात्म

ईश्वर में अविश्वास क्यों ?

व्याख्याता – शास्त्रार्थ महारथी पं॰ रामचंद्र देहलवी जी प्रस्तुति –  ‘अवत्सार’ आजकल कुछ मित्रादि अथवा दूसरे व्यक्ति जब मुझसे मिलते हैं तो मुझसे प्रायः वह प्रश्न किया करते हैं, “क्या कारण है कि ईश्वर के अस्तित्व के विषय में इतने भाषण होते हैं फिर भी लोगों का ईश्वर में विश्वास समाप्त होता जा रहा है […]

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धर्म-अध्यात्म

आर्य सुधारक थे महात्मा बुद्ध

बौद्ध मत के प्रवर्तक महात्मा बुद्ध के बारे में यह माना जाता है कि वह आर्य मत वा वैदिक धर्म के आलोचक थे एवं बौद्ध मत के प्रवर्तक थे। उन्हें वेद विरोधी और नास्तिक भी चित्रित किया जाता है। हमारा अध्ययन यह कहता है कि वह वेदों को मानते थे तथा ईश्वर व जीवात्मा के […]

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आर्य समाज

आर्यसमाज एक अद्वितीय धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय संगठन है

संसार में किसी विषय पर सत्य मान्यता एक व परस्पर पूरक हुआ करती हैं जबकि एक ही विषय में असत्य मान्यतायें अनेक होती व हो सकती हैं। संसार में ईश्वर व धर्म = अध्यात्म विषयक मान्यतायें भी एक समान व परस्पर एक दूसरे की पूरक होती हैं। इसी कारण से संसार में ईश्वर एक ही […]

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पाखंड खंडिनी

काल सर्प दोष प्रपंच

मेरे पास एक सुप्रसिद्ध धर्म गुरु मिलने आये और कुछ देर की वार्ता के बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा और बोले आपको काल सर्प योग लगा हुआ है, बहुत मुश्किल का समय आपके सामने आ चूका है। कुछ देर रूककर बोले कि घबराना नहीं इसका उपाय किसी दिन बता दूंगा, सब ठीक हो जाएगा। मैंने […]

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धर्म-अध्यात्म

वेदादि ग्रन्थों के स्वाध्याय से मनुष्य अन्धविश्वासों व अशुभ कर्मों से बचता है

वेद अपौरुषेय रचना है। सृष्टि के आरम्भ में परमात्मा ने ही अपने अन्तर्यामीस्वरूप से चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य एवं अंगिरा को उनकी आत्माओं में वेदों का ज्ञान कराया वा दिया था। प्राचीन काल से अद्यावधि-पर्यन्त सभी ऋषि वेदों की परीक्षा कर इस तथ्य को स्वीकार करते आये हैं कि वेद वस्तुतः ईश्वर से ही […]

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धर्म-अध्यात्म

मनुष्य को प्रतिदिन ईश्वर के उपकारों का स्मरण करना चाहिये

हमें यह ज्ञात होना चाहिये कि ईश्वर क्या व कैसा है? उसके गुण, कर्म व स्वभाव क्या व कैसे हैं? इसका ज्ञान करने का सरलतम तरीका सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ का अध्ययन है। हमारी दृष्टि में संसार में सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ के समान दूसरा महत्वपूर्ण ग्रन्थ नहीं है। इसके अध्ययन से मनुष्य की सभी शंकायें व समस्यायें दूर […]

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आर्य समाज धर्म-अध्यात्म

आर्य समाज वेदनिहित सत्य सिद्धान्तों पर आधारित एक धार्मिक एवं सामाजिक संगठन है

आर्यसमाज एक धार्मिक एवं सामाजिक संगठन है जो विद्या से युक्त तथा अविद्या से सर्वथा मुक्त सत्य सिद्धान्तों को धर्म स्वीकार करती है और इनका देश देशान्तर में बिना किसी भेदभाव के प्रचार करती है। आर्यसमाज की स्थापना से पूर्व देश व विश्व अविद्या से ग्रस्त था। धर्म तथा मत-मतान्तरों में अविद्या प्राबल्य था। लोगों […]

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धर्म-अध्यात्म

संसार की श्रेष्ठतम रचना हमारी सृष्टि ईश्वर से ही प्रकाशित हुई है

प्रत्येक रचना एक रचयिता की बनाई हुई कृति होती है। हमारी यह विशाल सृष्टि किस रचयिता की कृति है, इस पर विचार करना आवश्यक एवं उचित है। सृष्टि की रचना व उत्पत्ति आदि विषयों का अध्ययन करने पर यह अपौरुषेय रचना सिद्ध होती है। अपौरुषेय रचनायें वह होती हैं जिनको मनुष्य नहीं बना सकते। संसार […]

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धर्म-अध्यात्म

यज्ञ (हवन) करने की सही विधि

हमारे बहुत से आर्य समाज के मित्र या अन्य सनातनी भी बहुत सा यज्ञ करते और करवाते हैं परन्तु यज्ञ का पूरा लाभ जैसा कि शास्त्रों में वर्णित है वैसा लाभ नहीं उठा पाते। इसका कारण है कि बहुत प्रकार की भिन्न भिन्न यज्ञ पद्धतियों का प्रचलित होना। प्रत्येक आर्य समाज में या गायत्री संस्थानों […]

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धर्म-अध्यात्म

जीवन में संयम, आवश्कतायें सीमित रखने एवं शक्ति-संचय आवश्यक है

संसार में सभी जीवन पद्धतियों में वैदिक धर्म एवं तदनुकूल जीवन पद्धति श्रेष्ठ एवं महत्वूपर्ण है। इसे जानकर और इसके अनुसार जीवन व्यतीत करने पर मनुष्य अनेक प्रकार की समस्याओं से बच जाता है। मनुष्य को अपनी शारीरिक शक्तियों के विकास वा उन्नति पर ध्यान देना चाहिये। इसके लिये उसे समय पर जागना, शौच, भ्रमण, […]

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