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आर्य समाज वेद

महर्षि दयानन्द की प्रमुख देन चार वेद और उनके प्रचार का उपदेश

महर्षि दयानन्द ने वेद प्रचार का मार्ग क्यों चुना? इसका उत्तर है कि उनके समय में देश व संसार के लोग असत्य व अज्ञान के मार्ग पर चल रहे थे। उन्हें यथार्थ सत्य का ज्ञान नहीं था जिससे वह जीवन के सुखों सहित मोक्ष के सुख से भी सर्वथा अपरिचित व वंचित थे। महर्षि दयानन्द […]

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आर्य समाज

आर्यसमाज का मेघ जाति उत्थान आंदोलन

आर्य समाज और मेघ 19 वीं शताब्दी में धार्मिक तथा समाज सुधारक आंदोलनों में आर्य समाज निःसन्देह सबसे महत्वपूर्ण था. स्यालकोट के डस्का शहर में सन् 1884 में और जफ़रवाला में 1887 में आर्यसमाज स्थापित हो चुकी थी. ये दोनों समाजें मेघोद्धार का केंद्र थीं.हिंदू समाज के दमन से तंग आए निम्नजातियों के हिन्दू इस्लाम […]

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आर्य समाज धर्म-अध्यात्म

अग्निहोत्र करने से परिवार ज्ञानवान् होकर सत्यमार्गानुगामी एवं निरोगी होता है

वैदिक धर्म एवं संस्कृति की विशेषता है कि इसके सब सिद्धान्त एवं मान्यतायें ज्ञानयुक्त होने सहित तर्क एवं युक्ति की कसौटी पर खरे हैं। वैदिक धर्म का पालन करते हुए सभी गृहस्थियों के लिए प्रतिदिन प्रातः एवं सायं अग्निहोत्र यज्ञ का विधान किया गया है। अग्निहोत्र का विधान प्रत्येक गृहस्थी मनुष्य का प्रमुख कर्तव्य होता […]

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धर्म-अध्यात्म वेद

वेदों के आचरण से ही मनुष्य को अभ्युदय एवं निःश्रेयस प्राप्त होते हैं

हमें मनुष्य जीवन जन्म-जन्मान्तरों में दुःखों से सर्वथा निवृत्त होने के लिए एक अनुपम साधन मिला है। यह हमें परमात्मा द्वारा प्रदान किया गया है। माता-पिता, सृष्टि तथा समाज हमारे जन्म, इसके पालन व उन्नति में सहायक बनते हैं। हमें अपने जीवन के कारण व उद्देश्यों पर विचार करना चाहिये। इस कार्य में वेद व […]

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धर्म-अध्यात्म

योग दर्शन पर व्याख्यान/ प्रवचन

योग दर्शन से आप सभी लोग परीचित हैं इसको जितना पढ़े उतना भी हमें लगता है कि हम बहुत कम जानते हैं और जीवन को सुंदर बनाने के लिए योग से बढ़कर और कोई दूसरा मार्ग हमारे पास नहीं है, विकल्प नहीं है । मनुष्य अपने जीवन को सुंदर बनाना चाहे तो योग मार्ग पर […]

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आर्य समाज हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

महान आर्य संन्यासी स्वामी श्रद्धानन्द

वैदिक धर्म एवं संस्कृति के उन्नयन में स्वामी श्रद्धानन्द जी का महान योगदान है। उन्होंने अपना सारा जीवन इस कार्य के लिए समर्पित किया था। वैदिक धर्म के सभी सिद्धान्तों को उन्होंने अपने जीवन में धारण किया था। देश भक्ति से सराबोर वह विश्व की प्रथम धर्म-संस्कृति के मूल आधार ईश्वरीय ज्ञान ‘‘वेद” के अद्वितीय […]

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धर्म-अध्यात्म

परमात्मा सब जीवात्माओं को मनुष्यादि जन्म देने वाले माता व पिता होने से उपासनीय हैं

परमात्मा और आत्मा का सम्बन्ध व्याप्य-व्यापक, उपास्य-उपासक, स्वामी-सेवक, मित्र बन्धु व सखा आदि का है। परमात्मा और आत्मा दोनों इस जगत की अनादि चेतन सत्तायें हैं। ईश्वर के अनेक कार्यों में जीवों के पाप-पुण्यों का साक्षी होना तथा उन्हें उनके कर्मानुसार सुख व दुःख रूपी फल वा भोग प्रदान करना है। हमारा जो जन्म व […]

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आर्य समाज हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

चौधरी मातूराम का जनेऊ संघर्ष

लेखक – जगतसिंह हुड्डा स्त्रोत – देहात रत्न चौधरी मातूराम आर्य जीवन वृत प्रथम पीढ़ी के आर्यसमाजी चौ० मातूराम ने चौथी पास करने के बाद ‘पढ़ाई छोड़ दी’ और 16 वर्ष की आयु में ही इस क्षेत्र में पहले यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण कर आर्य समाजी बने और समाज में फैली कुरीतियों का पर्दाफाश करने का […]

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धर्म-अध्यात्म शिक्षा/रोजगार

वेदाध्ययन व वेद प्रचार से अविद्या दूर होकर विद्या वृद्धि होती है

मनुष्य एक ज्ञानवान प्राणी होता है। मनुष्य के पास जो ज्ञान होता है वह सभी ज्ञान स्वाभाविक ज्ञान नहीं होता। उसका अधिकांश ज्ञान नैमित्तिक होता है जिसे वह अपने शैशव काल से माता, पिता व आचार्यों सहित पुस्तकों व अपने चिन्तन, मनन, ध्यान आदि सहित अभ्यास व अनुभव के आधार पर अर्जित करता है। मनुष्य […]

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धर्म-अध्यात्म

ईश्वर विषयक कतिपय शंकाओं के ऋषि दयानन्द के समाधान

आज हम वेदों के अविद्वतीय विद्वान वेद-ऋषि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी द्वारा ईश्वर विषय में की जाने वाली कुछ शंकाओं के समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने प्रश्न उपस्थित किया है कि आप ईश्वर-ईश्वर कहते हो परन्तु ईश्वर की सिद्धि किस प्रकार करते हो? इसका उत्तर देते हुए वह कहते हैं कि वह सब प्रत्यक्षादि […]

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