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धर्म-अध्यात्म

वैदिक कर्मफल सिद्धांत सत्य नियमों पर आधारित यथार्थ दर्शन है

========== वैदिक धर्म सृष्टि का सबसे पुराना धर्म है। यह धर्म न केवल इस सृष्टि के आरम्भ से प्रचलित हुआ है अपितु इससे पूर्व जितनी बार भी प्रलय व सृष्टि हुई हैं, उन सब सृष्टि कालों में भी एकमात्र वैदिक धर्म ही पूरे विश्व में प्रवर्तित रहा है। इसका कारण यह है कि ईश्वर, जीव […]

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धर्म-अध्यात्म

ईश्वर सदा सर्वदा सबको प्राप्त है किंतु सदोष अंतः करण में उसकी प्रतीति नहीं होती

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। वैदिक सिद्धान्त है कि संसार में ईश्वर, जीव और प्रकृति तीन अनादि व नित्य सत्तायें हैं। यह तीनों सत्तायें सदा से हैं और सदा रहेंगी। इनका अभाव कभी नहीं होगा। वेद ईश्वरीय ज्ञान होने से स्वतः प्रमाण ग्रन्थ है। वेदों में ईश्वर को सच्चिदानन्दस्वरूप, सर्वातिसूक्ष्म, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, न्यायकारी, सबके कर्मों का […]

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धर्म-अध्यात्म

सनातन वैदिक धर्म एवं संस्कृति की रक्षा आर्य समाज के लिए एक चुनौती है

========== सृष्टि के आदि काल से ईश्वरीय ज्ञान वेदों पर आधारित वैदिक धर्म एवं तदनुकूल वैदिक संस्कृति न केवल आर्याव्रत भारत में अपितु विश्व के अनेक देशों में विद्यमान रही है। सृष्टि की उत्पत्ति 1.96 अरब वर्ष पूर्व हुई थी। तब से महाभारत काल तक पूरे विश्व में विशुद्ध वैदिक धर्म एवं संस्कृति ही शत-प्रतिशत […]

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धर्म-अध्यात्म

कर्म तब तक पीछा करता है जब तक भोगने करा ले : आचार्य कुलश्रेष्ठ

ओ३म् -आर्यसमाज लक्ष्मणचैक-देहरादून का वार्षिकोत्सव- ========= आर्यसमाज लक्ष्मणचैक देहरादून के शनिवार दिनांक 23-11-2019 को वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन अपरान्ह 3.00 बजे से यज्ञ आरम्भ हुआ। यज्ञ तीन वृहद यज्ञकुण्डों में किया गया। यज्ञ के ब्रह्मा के आसन पर आगरा के वैदिक विद्वान श्री उमेशचन्द्र कुलश्रेष्ठ विद्यमान थे। उनका साथ श्री सत्यपाल सरल एवं आर्यसमाज के […]

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धर्म-अध्यात्म

यदि सभी मनुष्य विवेकयुक्त होते तो वेद और सत्यार्थ प्रकाश सर्वमान्य धर्म ग्रंथ होते

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। संसार में तीन अनादि सत्तायें वा पदार्थ हैं जो ईश्वर, जीव व प्रकृति के नाम से वैदिक साहित्य में वर्णित किये गये हैं। वेदों की भाषा मनुष्यकृत न होकर परमात्मा की अपनी भाषा है। वेद की संस्कृत भाषा के शब्द भी परमात्मा के द्वारा प्रयुक्त होने से उसके द्वारा उत्पन्न वा […]

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धर्म-अध्यात्म

ईश्वर की उपासना दुखों के निवारण एवं सद्गुणों की प्राप्ति के लिए करते हैं

======xx======xx====== अधिकांश मनुष्य प्रायः ईश्वर की भक्ति व उपासना करते हैं। संसार में अनेक प्रकार की उपासना पद्धतियां प्रचलित हैं। कुछ तो ऐसी हैं जो मनुष्य को मंजिल वा लक्ष्य से दूर भी करती हैं। उपासना करने का कारण भी अवश्य कुछ है? वह क्या है, इसका उत्तर वेद एवं वैदिक साहित्य पढ़ने के बाद […]

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धर्म-अध्यात्म

हमारा यह जन्म हमारे पूर्व जन्म का पुनर्जन्म है और यह सत्य सिद्धांत है

ओ३म् -मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। वैदिक धर्म एवं संस्कृति इस सृष्टि की आद्य एवं प्राचीन धर्म एवं संस्कृति है। यह धर्म व संस्कृति ईश्वर प्रदत्त ज्ञान वेद के आधार पर प्रचलित एवं प्रसारित हुई है। महाभारत काल तक इसका प्रचार व प्रसार पूरे विश्व में था। वेद के सभी सिद्धान्त ईश्वर प्रदत्त होने से सत्य […]

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धर्म-अध्यात्म

तपोवन का पांच दिवसीय शरद उत्सव आरंभ : सभी जड़ देवता मरण धर्मा हैं , ईश्वर ही अमर और नित्य है : उमेश चंद्र कुलश्रेष्ठ

========== वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून का पांच दिवसीय शरदुत्सव आज सोल्लास आरम्भ हुआ। प्रातः 5.00 बजे से 6.00 बजे तक योग साधना का प्रशिक्षण साधको को दिया गया। प्रातः 6.30 बजे से 8.30 बजे तक सन्ध्या एवं यज्ञ सम्पन्न किया गया। यज्ञ के ब्रह्मा अमृतसर से पधारे पं0 सत्यपाल पथिक जी थे। यज्ञ में […]

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धर्म-अध्यात्म

ओ3म ईश्वर की उपासना क्यों व कैसे करें ?

========= ईश्वर और उसकी उपासना को जानने के लिये हमें ईश्वर की सत्ता व उसके सत्यस्वरूप को जानना आवश्यक है। बहुत से लोग ईश्वर की उपासना व भक्ति तो करते हैं परन्तु ईश्वर के सत्यस्वरूप को जानने के प्रयत्नों की उपेक्षा करते हैं। जब ईश्वर को जानेंगे नहीं तो उपासना में होने वाले लाभों से […]

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धर्म-अध्यात्म

सत्यार्थ प्रकाश और लाला दीपचंद आर्य

आज हम लाला दीपचन्द आर्य जी द्वारा ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित सत्यार्थप्रकाश में सत्यार्थप्रकाश के परिचय में लिखे गये महत्वपूर्ण शब्दों को प्रस्तुत कर रहे हैं। उनके शब्द निम्न हैं: 1- इसी ग्रन्थ (सत्यार्थप्रकाश) में ब्रह्मा से लेकर जैमिनि मुनि पर्यन्त ऋषि-मुनियों के वेद-प्रतिपादित सारभूत विचारों का संग्रह है। अल्प विद्यायुक्त, स्वार्थी, दुराग्रही लोगों ने जो […]

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