स्थितप्रज्ञ और दूसरे के मनोविज्ञान को समझने वाली भारत की राजकुमारियों के ऐसे शब्दों को सुनकर खलीफा क्रोध में पागल हो गया। उसे यह बहुत ही बुरा लगा कि वह जिस ‘भोजन’ को स्वयं ग्रहण करने की तैयारी कर रहा था उसे पहले ही उसका एक व्यक्ति जूठा कर चुका था। उसे लगा कि यदि […]
Month: October 2021
#डॉविवेकआर्य देश के इतिहास में सन् 1921 में केरल के मालाबार में एक गांव में मोपलाओं ने हिन्दू जनता पर अमानवीय क्रूर हिंसा की थी। इस घटना पर देशभक्त जीवित शहीद वीर सावरकर जी ने ‘मोपला’ नाम का प्रसिद्ध उपन्यास लिखा था। हिन्दू विरोधी इस कुकृत्य को जानने के लिए हिन्दू जनता द्वारा इस उपन्यास […]
( लेखक : डॉ शंकर शरण ) हमारे देश की पाठ्य-पुस्तकों में जवाहरलाल नेहरू का गुण-गान होते रहना कम्युनिस्ट देशों वाली परंपरा की नकल है। अन्य देशों में किसी की ऐसी पूजा नहीं होती जैसी यहाँ गाँधी-नेहरू की होती है। अतः जैसे रूसियों, चीनियों ने वह बंद किया, हमें भी कर लेना चाहिए। वस्तुतः खुद […]
चित्त – भाव से ही मिलें, कर्मों के परिणाम। सात्विकता के भाव से, कर्म करो निष्काम॥1498॥ व्याख्या:- कर्म और भाव के अन्योन्याश्रित सम्बन्ध पर प्रकाश डालते हुए श्वेताश्वतर – उपनिषद के ऋषि कहते हैं – ” ‘कर्म’ (Action) शरीर है ‘भाव ‘ (Intention ) उसकी आत्मा है।” उदाहरण के लिए मान लीजिए यज्ञ पर पाँच […]
हमारे लिए कैसी होनी चाहिए शरद ऋतु चर्या
डॉ. दीपनारायण पाण्डेय आयुर्वेद की ऋतुचर्या का वर्णन विश्व में सबसे प्राचीन है और इस बात के प्रमाण हैं कि इस विद्या को प्राचीन चीन एवं ग्रीक चिकित्सा पद्धतियों सहित विश्व की अन्य चिकित्सा पद्धतियों ने भारत से सीखा और अपनी पद्धति में समाहित किया। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में ऋग्वेद, अथर्ववेद, चरकसंहिता और सुश्रुतसंहिता आदि […]
आसुर उपनिषद की उत्पत्ति
आसुर उपनिषद की उत्पत्ति गतांक से आगे… छान्दोग्य उपनिषद में विस्तारपूर्वक लिखा है कि इन्द्र (आर्य) और विरोचन (अनार्य) दोनों मिलकर किसी के पास ज्ञान सीखने गये। गुरु ने उनकी पात्रता और कुपात्रता की परीक्षा की। इन्द्र संस्कृत आत्मा और विरोचन मलिनआत्मा निकला और ज्ञान के ग्रहण करने में असमर्थ सिद्व हुआ। गुरु ने परीक्षार्थ […]
गुरदे फेल होने पर आयुर्वेदिक उपचार
डॉ. अनुराग विजयवर्गीय (लेखक प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य हैं।) मानव शरीर में स्वस्थ अवस्था में गुरदे लगभग एक सौ पच्चीस मिलीलीटर रक्त एक मिनट में शुद्ध करते हैं। गुरदों के द्वारा हमारे शरीर से विषाक्त एवं अनुपयोगी तत्व बाहर हो जाते हैं। जब गुरदों की यही कुदरती क्रिया बाधित होती है, तो रक्त से विष जातीय तत्व […]
इस्लाम पर नई गांधीगिरी
शंकर शरण (वरिष्ठ पत्रकार) क्या आपने ध्यान दिया है कि कश्मीरी, बंगाली या पंजाबी हिन्दुओं के बीच महात्मा गांधी कभी लोकप्रिय नहीं रहे? कारण थाः वास्तविक जीवन का सबक। अपने लंबे अनुभव से उन्होंने गांधीजी की अनेक नीतियों और विचारों को बचपना या क्रूर मजाक से अधिक कुछ नहीं माना। बंगाली हिन्दुओं का हाल समझने […]
‘आनंद सारा’ (उपन्यास ) देवाराम भामू जी द्वारा उपन्यासात्मक शैली में लिखी गई पुस्तक है। वास्तव में इस पुस्तक में दो लघु उपन्यास हैं। जिनमें से एक का नाम ‘आनंद सारा’ है तो दूसरे का ‘एक भूल और जीवन’ है। विद्वान लेखक ने बड़ी सहज और सरल परंतु विद्वतापूर्ण सारगर्भित भाषा शैली में अपनी बात […]
लेखिका:- प्रो. कुसुमलता केडिया भारत के संदर्भ में विभिन्न मुसलमानी लुटेरों और लड़ाकों की जो कहानियां अंग्रेजों के समय से फैलाई गईं और बाद में कांग्रेस शासन में अधिकृत इतिहास की तरह पढ़ाई गईं,उनके विषय में स्रोतों की प्रामाणिकता का प्रश्न सर्वाधिक महत्वपूर्ण है और उस पर विचार किये बिना कुछ भी लिखते चले जाने […]