अपने राजनीतिक स्वार्थों को साधने के लिए आम चुनाव 2014 से लगभग 8-10 माह पूर्व केन्द्र की संप्रग सरकार ने पृथक तेलंगाना राज्य का गठन कर भारत के मानचित्र में 29वें राज्य की स्याही भरने का निर्णय ले लिया है। निर्णय लेते ही आंध्र प्रदेश में विरोध आरंभ हो गया है, जबकि तेलंगाना समर्थकों ने […]
Month: August 2013
सिर्फ तेलंगाना नहीं, पूरे भारत की चिंता
डा. वेदप्रकाश वैदिकगाजियाबाद। कांग्रेस का किला सारे देश में दरक रहा है। उसे बचाने के नए-नए उपाय खोजे जा रहे हैं। खाद्य सुरक्षा, नकदी सहायता, आवास की सुविधा आदि कई पैंतरे मारे जा रहे हैं। उनमें से तेलंगाना भी है। तेलंगाना के वोट झोली में गिरेंगे, इसी लालसा से कांग्रेस ने यह कदम उठाया है।तेलंगाना […]
अभी तक आपको जब भी कभी प्रिंटआउट निकलवाना होता था तो आपको दुकानों के चक्कर काटने पड़ते थे। हां, जिन लोगों के घर प्रिंटर होता है उन्हें यह तकलीफ नहीं होती लेकिन उनके कंप्यूटर के आसपास का क्षेत्र तारों और भारी-भरकम प्रिंटर से ही भरा रहता है। लेकिन अब बाजार में एक ऐसा प्रिंटर उतारा […]
ट्रैफिक की परेशानियां नहीं, ट्रैफिक का कोई नियम नहीं, सब बस अपनी मरजी, अपनी सुविधा से, जैसे चाहो करो, सारा आसमान फिर आपका ही है। आप सोचेंगे, जरा हटके में ये बेतुकी बातें कहां से आ गई। पर जनाब, जरा रुकिए..सोचिए तो कि आखिर शब्द इशारा क्या कर रहे हैं! ये इशारा है आपके सपनों […]
आज का चिंतन-08/08/2013
निडर होकर करें बेबाक अभिव्यक्तिफिर देखें इसका चमत्कार– डॉ. दीपक आचार्य9413306077 मन-मस्तिष्क और चेतन-अवचेतन को शुद्घ-बुद्घ बनाए रखने और संकल्प को बलवान बनाने के लिए यह जरूरी है कि अपने दिमाग में जो भी बात आए, उसे यथोचित स्थान पर पहुंचाने में तनिक भी विलंब नहीं करें और तत्काल सम्प्रेषित करें।बाहरी दुनिया के लिए तैयार […]
सोनिया की चिट्ठी की पिटी मिट्टी
राजनीति के शोर में दुर्गाशक्ति नागपाल का मामला उलझ कर रह गया है। वैसे तो ये दुनिया ही स्वार्थों पर टिकी है, पर जब बात राजनीति की की जाए, तो वह तो कतई स्वार्थों पर चलती है। अब यदि राजनीति भी गठबंधन की हो तो ‘मजबूरियां’ और भी बढ़ जाती हैं और हम देखते हैं […]
आनंदपाल के पश्चात उसके पौत्र भीमपाल ने अपने महान पूर्वज राजा जयपाल की वीर और राष्टभक्ति से परिपूर्ण परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस शिशु राजा को पुन: कुछ अन्य राजाओं ने सैन्य सहायता देने का निश्चय किया। अत: एक बार पुन: देशभक्ति का एक रोमांचकारी वातावरण देश में बना। राजा ने झेलम […]
आज का चिंतन -06/08/2013
प्रतिक्रियाएँ न करें नजानने की कोशिश करेंडॉ दीपक आचार्य9413306077dr.deepakaacharya@gmail.com प्रतिक्रिया एक ऐसा शब्द है जो जीवन भर हर कर्म और विचार में समाया रहता है कर्मयोग की विभिन्न धाराओं औरउपधाराओं में प्रतिक्रिया न हो तो कई सारे अच्छे-बुरे कामों को अपने आप विराम लग जाए। अधिकांश लोगों का हर कर्मप्रतिक्रिया जानने और करने के लिए हुआ करता है। चंद लोग ही ऐसे हुआ करते हैं जिन्हें अपने काम से मतलब है, अपने कर्मयोग को उच्चतम शिखर प्रदान करने से हीसरोकार है। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि उनकी गतिविधियों या कर्म की क्या और कैसी प्रतिक्रियाएं होंगीअथवा हो रही हैं। ये लोग अपने कर्म के प्रति निष्ठावान और समर्पित होते हैं और ऐसे लोगों का प्रत्येक कर्म या तो स्वयं की प्रसन्नता औरसुकून के लिए होता है अथवा ईश्वरार्पण। ऐसे में इन लोगों पर अपने कर्म, व्यवहार और हलचलों के बारे में होने वालीप्रतिक्रियाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसे लोग जो भी कर्म करते हैं वे कालजयी और शाश्वत श्रेय प्रदान करने वाले होते हैं क्योंकि इनके पीछे अच्छी या बुरीप्रतिक्रिया अभीप्सित नहीं होती है। जबकि दुनिया में अधिकांश लोग जो भी कर्म करते हैं वह प्रतिक्रिया से प्राप्त होने वालेसुकून और सुख को ध्यान में रखकर करने के आदी होते हैं। इन लोगों कमी हर हरकत के पीछे कोई न कोई प्रतिक्रिया उपजाने, सुनने या करने-कराने के भाव छिपे हुए होते हैं। प्रतिक्रियाओं पर और कोई ध्यान न भी दे तब भी ये अपने हर शुभाशुभ कर्म की प्रतिक्रिया जानना चाहते हैं औरप्रतिक्रियाओं के स्वरूप तथा घनत्व के आधार पर ही इनके भावी कर्मों की बुनियाद टिकी हुई होती है। इन लोगों के लिए यह कहा जाए कि इनका जन्म ही प्रतिक्रियाओं की प्राप्ति के लिए क्रियाओं को करने तथा प्रतिक्रियाओंको जानने भर के लिए ही हुआ है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। हमारे आस-पास से लेकर दुनिया के ध्रुवों तक, हरछोर पर प्रतिक्रियावादियों का बोलबाला रहा है जो अपने करीब से लेकर आक्षितिज पसरी हुई हलचलों के बारे मेंप्रतिक्रियाएं व्यक्त करना अपना जन्म सिद्ध अधिकार समझते हैं और ऐसे अधिकार सम्पन्न लोगों की अपने यहाँ भीकोई कमी नहीं है। अपने क्षेत्र में ऐसे खूब सारे लोग हैं जिनका एकमेव जीवन लक्ष्य प्रतिक्रियाओं में जीना और प्रतिक्रियाओं की चाशनी मेंनहाते हुए पूरी जिन्दगी गुजार देना रह गया है। जीवन में कर्मयोग में सफलता पाने की कामना रखने वाले लोगों कोचाहिए कि वे न कभी प्रतिक्रियाएँ करें, न इन पर कोई ध्यान दें क्योंकि प्रतिक्रियाएं व्यक्ति को खोखला करती हैं और जोलोग प्रतिक्रियाओं के भरोसे चलते हैं वे जिन्दगी के महान लक्ष्यों से भटक कर रह जाते हैं प्रतिक्रियाओं के मकड़जाल मेंही उलझ कर रह जाते हैं। जो लोग प्रतिक्रियाएं करते हैं या प्रतिक्रियाओं को जानना, करना या कराना चाहते हैं उन लोगों को यही अभीप्सित होताहै कि जो लोग प्रतिक्रियाओं के भंवर में फंस जाते हैं उनकी जिन्दगी की रफ्तार को थाम ली जाए और उन्हें ऐसा नाकाराकर दिया जाए कि वे जिन्दगी भर क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं के बीच पेण्डुलम की तरह बने रहें और आगे नहीं बढ़सकें। जो भी व्यक्ति एक बार प्रतिक्रियाओं में रस लेने लग जाता है वह अपने उद्देश्यों में भटक कर रह जाता है औरप्रतिक्रियावादियों के हाथों की कठपुतली बना हुआ जीवन के अमूल्य क्षणों की हत्या कर देता है। जीवन में तरक्कीपाना चाहें तो न प्रतिक्रिया करें, न अपनी किसी क्रिया के बारे में औरों की प्रतिक्रिया जानने का कभी प्रयास करें। —000— डॉ. दीपक आचार्य
मुजफ्फर हुसैनपिछले अध्याय में यह बात स्पष्टï की जा चुकी है कि हजरत इब्राहीम मध्य एशिया से निकले हुए तीनों धर्म यहूदियत, ईसाइयत और इसलाम के पितामह हैं। वे तीनों के आदर्श हैं। मुसलिम जिन्हें इब्राहीम कहते हैं, यहूदी और ईसाई उनका उच्चारण अब्राहम करते हैं। हजरते ईसा अब्राहम के पुत्र आहजिक (इसहाक) वंशज हैं, […]
कैसे होता सूर्य ग्रहण?
बहुत दिनों से सोच रहा हूं,मन में कब से लगी लगन है।आज बताओ हमें गुरुजी,कैसे होता सूर्य ग्रहण है। बोले गुरुवर?,प्यारे चेले,तुम्हें पड़ेगा पता लगाना।तुम्हें ढूढ़ना है सूरज के,सभी ग्रहों का ठौर ठिकाना। ऊपर देखो नील गगन मे,हैं सारे ग्रह दौड़ लगाते।बिना रुके सूरज के चक्कर?अविरल निश दिन सदा लगाते। इसी नियम से बंधी धरा […]