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पर्व – त्यौहार

लोहड़ी के त्योहार का इतिहास और परम्परा

भारतीय जन-जीवन कृषि पर आधारित हैं। जनवरी मास के इन दिनों तक मकई, तिलहन, दालें, मूंगफली, बाजरा आदि फसलें किसान के घर में आ जाती हैं। उस फसल के कुछ अंश को दान करके और जलती हुयी आग में डाल कर ईश्वर का धन्यवाद किया जाता हैं।यह प्राचीन काल की उसी परम्परा का निर्वाह किया […]

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व्यक्तित्व

स्वामी भीष्म जी महाराज का जीवन परिचय

सदा सुख शांति फैले मेरे भगवान दुनिया में। बनावे फिर से हम अपने वतन की शान दुनिया में। व्रतधारी, सदाचारी बने नर नार भारत में। वेद विद्या पढ़े सीखे ज्ञान विज्ञान दुनिया में। बहे दुध की नदियां मेरे इस देश भारत में। पशु, पक्षी गऊ माता ना हो कुर्बान दुनिया में। एशिया सर्व यूरोप में […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

स्वामी विवेकानन्द : भारत की आध्यात्मिक शक्ति के अमर उद्घोष

12 जनवरी विवेकानंद जयंती पर विशेष विवेकानंद ने सनातन हिन्द को विश्व में स्थापित किया विश्व वन्दनीय स्वामी विवेकानन्द जैसी महान विभूति ने शायद हिन्दुत्व जागरण जैसे महान कार्य के लिये अपना सारा जीवन ही अर्पित कर दिया था। और यही कारण है कि स्वामी जी का स्थान आज विश्व में सर्वोत्तम है। परम अवतार […]

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समाज

धार्मिक समाज सुधारकों की परंपरा को बचाने की लड़ाई

शिवगिरी मठ सभी दलों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखता है। वार्षिक शिवगिरी यात्रा के दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं को यात्रियों को संबोधित करने का अवसर दिया जाता है। हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने यात्रियों को संबोधित किया है। इस वर्ष […]

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पाखंड खंडिनी भ्रांति निवारण

तैंतीस कोटि देव

भारतवर्ष में देवों का वर्णन बहुत रोचक है। देवों की संख्या तैंतीस करोड़ बतायी जाती है और इसमें नदी, पेड़, पर्वत, पशु और पक्षी भी सम्मिलित कर लिये गये है। ऐसी स्तिथि में यह बहुत आवश्यक है कि शास्त्रों के वचन समझे जाएँ और वेदों की वास्तविक शिक्षाएँ ही जीवन में धारण की जाएँ। देव […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

श्री ‘भारतेंदु’ हरिश्चंद्र – महर्षि दयानंद के समकालीन हिंदी के महान् साहित्यकार

६ जनवरी १८८५ को भारतेन्दु हरिश्चंद्र का देहांत हुआ था। हिंदी के महान् साहित्य निर्माता श्री बाबू ‘भारतेंदु’ हरिश्चंद्र (जन्म ९ सितम्बर १८५०, अवसान ६ जनवरी १८८५ – दोनों वाराणसी में) १८६९ में स्वामी दयानंद के काशी के पण्डितों के साथ हुए मूर्तिपूजा विषयक ऐतिहासिक शास्त्रार्थ में दृष्टा के रूप में उपस्थित थे । हरिश्चंद्र […]

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आओ कुछ जाने

वेद, वैदिक और भारतीय ज्योतिष साहित्य में पृथ्वी

प्रस्तुत लेख में ब्रह्माण्ड में अनेक पृथिवियों, पृथ्वी के गोल होने, पृथ्वी की गति, ऊपरी आवरण और गर्भ, आकर्षण-शक्ति, मूल तथा पृथ्वी पर समुद्र और हिन्दुओं के विभिन्न ग्रन्थों (शास्त्रों) में वर्णित वनस्पति के विषय में लेखन का प्रयास किया गया है। अथर्ववेद (८/९/१) में ‘कतमस्या पृथिव्या:’ में हमें इस विराट नभोमण्डल में उक्त छन्दांश […]

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समाज

हिंदू समाज का पुनर्जागरण आवश्यक क्यों ?

हिन्दू समाज की अपनी एक दैवीय विशेषता है जिस कारण सृष्टि के प्रारंभ से ही उसने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है | जब संसार के अन्य भागों में बोलने योग्य भाषा तक का आविष्कार नहीं हुआ था तब भारत में ऋग्वेद जैसा ज्ञान भण्डार अवतीर्ण हो चुका था | धर्म, आध्यात्म,विज्ञान,स्वास्थ्य, युद्ध, संगीत, भूगोल, […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

आर्य क्षत्रिय परंपरा के अमर बलिदानी वीर गोकुला जाट

आर्य धर्म की महान क्षत्रिय परम्परा को कौन नही जानता, एक ऐसी परम्परा जिसमें समय समय पर अनेकों शूरवीर सामने आये और कभी राष्ट्रभक्ति तो कभी धर्म के लिए अपने प्राण तक दांव पर लगा दिए। इस महान क्षत्रिय परम्परा के शौर्य और वीरता के कारण ही भारत के सामने विश्व थर थर काँपता रहा […]

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आर्य समाज

आर्यसमाज का मेघ जाति उत्थान आंदोलन

आर्य समाज और मेघ 19 वीं शताब्दी में धार्मिक तथा समाज सुधारक आंदोलनों में आर्य समाज निःसन्देह सबसे महत्वपूर्ण था. स्यालकोट के डस्का शहर में सन् 1884 में और जफ़रवाला में 1887 में आर्यसमाज स्थापित हो चुकी थी. ये दोनों समाजें मेघोद्धार का केंद्र थीं.हिंदू समाज के दमन से तंग आए निम्नजातियों के हिन्दू इस्लाम […]

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