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संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा

अपनी बौद्घिक क्षमताओं से छत्रसाल निरंतर आगे बढ़ता रहा

हिन्दुत्व का अर्थ…. हिंदुत्व का अर्थ स्पष्ट करते हुए वेबस्टर के अंग्रेजी भाषा के तृतीय अंतर्राष्ट्रीय शब्दकोष में कहा गया है-”यह सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विश्वास और दृष्टिकोण का जटिल मिश्रण है। यह भारतीय उपमहाद्वीप में विकसित हुआ। यह जातीयता पर आधारित मानवता पर विश्वास करता है। यह एक विचार है, जो कि हर प्रकार […]

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पूजनीय प्रभो हमारे……

पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-57

वायु-जल सर्वत्र हों शुभ गन्ध को धारण किये पृथ्वी के समस्त प्राणधारियों को जीवन इस सूर्य से मिलता है। पृथ्वी सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करती है और यही ऊर्जा इसकी सतह को गर्माती है। वैज्ञानिकों का मत है कि इस ऊर्जा का लगभग एक तिहाई भाग पृथ्वी को घेरने वाली गैसों के आवरण अर्थात वायुमंडल […]

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राजनीति संपादकीय

राष्ट्रवाद और राष्ट्रवादी

राष्ट्र अपने आप में एक अदृश्य और अमूत्र्त भावना का नाम है। इस अमूत्र्त भावना को साकार करता है-हमारा राष्ट्रवाद, और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण। जब एक ‘बिस्मिल’ यह कह उठता है :- यदि देशहित मरना पड़े मुझको सहस्रों बार भी। तो भी न मैं इस कष्ट को निज ध्यान में लाऊं कभी।। हे ईश भारतवर्ष में […]

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संपादकीय

नेहरू, चीन और शांतिपूर्ण सह -अस्तित्व की अवधारणा-2

शीतयुद्घ का काल यूरोप उस समय विश्व राजनीति का केन्द्र बिन्दु था। इसके सारे राष्ट्रों की पारस्परिक ईष्र्या, द्वेष, डाह और घृणा की भावना ने विश्व को दो महायुद्घों में धकेल दिया था। द्वितीय विश्वयुद्घ के पश्चात भी इनकी ये बातें समाप्त नही हुईं, इसलिए संसार ‘शीतयुद्घ’ के दौर में प्रविष्ट हो गया। उसने आग […]

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संपादकीय

नेहरू, चीन और शांतिपूर्ण सह -अस्तित्व की अवधारणा

पंडित नेहरू अपने इस महान देश के प्रथम प्रधानमंत्री थे। इनके शासनकाल में राष्ट्र ने नये युग में प्रवेश किया था। परतंत्रता की लंबी अवधि राष्ट्र के शोषण, आर्थिक संसाधनों के दोहन और पतन का कारण बन गयी थी। सन 1947 ई. में जब  राष्ट्र स्वतंत्र हुआ तो वह टूटा हुआ जर्जरित और थका हुआ […]

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संपादकीय

क्षेत्रीय दल और राष्ट्रीयता

हमारे यहां पर क्षेत्रीय दल कुकुरमुत्तों की भांति हैं। ये दल वर्ग संघर्ष,  प्रांतवाद और भाषावाद के जनक हैं। कुछ दल वर्ग संघर्ष को तो कुछ दल प्रांतवाद और भाषावाद को प्रोत्साहित करने वाले बन गये हैं। इनकी तर्ज पर जो भी दल कार्य कर रहे हैं उनकी ओर एक विशेष वर्ग के लोग आकर्षित […]

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संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा

जब बन गया था भारत का भाल शत्रुसाल अर्थात छत्रसाल

जिस समय भारत की स्वतंत्रता को नोंच-नोंचकर खाने वाले विदेशी गिद्घों के झुण्ड के झुण्ड भारत भूमि पर टूट-टूटकर पड़ रहे थे और उन्हें यहां से उड़ाकर बाहर करने के लिए भारत की तलवार अपना पूर्ण शौर्य और पराक्रम दिखा रही थी, उस समय उन गिद्घों के लिए किसी शत्रुसाल की आवश्यकता थी। इस शत्रुसाल […]

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पूजनीय प्रभो हमारे……

पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-56

लाभकारी हो हवन हर जीवधारी के लिए इस चिकित्सक की यह उद्घोषणा समझो कि हमारा स्वास्थ्य बीमा कर देना है। वह पूर्णत: आश्वस्त कर रहा है हमें कि होम की शरण में आओ और नीरोगता पाओ।  आज संसार के अधिकांश व्यक्ति मानसिक अस्तव्यस्तता और मानसिक रोगों से अधिक पीडि़त हैं। असंतुलित जीवनशैली और अमर्यादित दिनचर्या […]

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संपादकीय

निजी अनुभवों की सांझ-9

उनका दृष्टिकोण हुआ करता था कि पैसा यदि लिया भी जाए तो सही काम का लिया जाए, फिर ऐसी स्थिति आयी कि जो भी दे जाए उसी का काम कर दो। इसका अभिप्राय था कि दो पक्षों में एक गलत पक्ष का व्यक्ति यदि दे जाए तो उसी का काम कर दो। किंतु आज स्थिति […]

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राजनीति संपादकीय

राष्ट्र के ब्रह्मा, विष्णु, महेश

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में  कई चीजें  बेतरतीब रूप में देखी गयीं। उन सब में प्रमुख थी किसी भी सरकारी विज्ञापन पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ-साथ कांग्रेस की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी के चित्र का लगा होना। यह लोकतंत्र और लोकतंत्र की भावना के विरूद्ध किया गया कांग्रेसी आचरण था। […]

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