21 अक्टूबर 1943 का दिन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण दिन है। क्योंकि इसी दिन भारत के क्रांतिकारी आंदोलन के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने स्वतंत्र भारत की पहली सरकार की स्थापना की थी। इस प्रकार आज का दिन भारतीय इतिहास में भारत के पहले प्रधानमंत्री के द्वारा शपथ […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
मुख्य संपादक, उगता भारत
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
हमारा देश भारत ऋषि और कृषि का देश है। यदि इन दोनों को भारतीय संस्कृति से निकाल दिया जाए तो समझो कि भारत निष्प्राण हो जाएगा । यह हम सबके लिए परम सौभाग्य का विषय है कि हमारे देश भारत वर्ष में एक से बढ़कर एक ऐसे ऋषि – महर्षि हुए जिन्होंने मानवता की अनुपम […]
कल दिनांक 18 अक्टूबर को ऋषि दयानंद जी की पवित्र साधना स्थली कर्णवास में कुछ पल बिताने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ। जिला बुलंदशहर में गंगा के तट पर बसा यह अल्पज्ञात स्थान महर्षि की यादों को समेटे पर सरकारी दृष्टिकोण से पूर्णतया ओझल हुआ पड़ा है। महर्षि दयानंद ने अपने जीवन काल में यदि […]
2 अक्तूबर/जन्म-दिवस प्रज्ञा पुरुष श्री रामस्वरूप आज शिक्षा, कला, संस्कृति, पत्रकारिता आदि में वामपंथी हावी हैं। इस खतरे को भांप कर आजादी के समय से ही हिन्दू विचार के पक्ष में बौद्धिक जनमत जगाने में अग्रणी प्रज्ञा पुरुष श्री रामस्वरूप जी का जन्म 12 अक्तूबर 1920 को हुआ था। उन्होंने गृहस्थी के बंधन में न […]
लाल किले वाली घटना से लेकर अब तक कितने ही असंवैधानिक और अवैधानिक कार्यों को अंजाम देता जा रहा किसान आंदोलन अब पूरी तरह बेलगाम हो चुका है। मुगलिया काल की यातना पूर्ण घटनाओं की याद दिलाते हुए सिंघु बॉर्डर पर एक 35 वर्ष के युवक के साथ जो कुछ भी तथाकथित किसानों ने किया […]
आज देश में कई लोग ऐसे हैं जो सिखों के गुरुओं के नाम को कलंकित कर रहे हैं और पाकिस्तान या देश के दुश्मनों की शह पर एक नए देश खालिस्तान की मांग कर रहे हैं। अभी हाल ही में सिंघु बॉर्डर पर जो कुछ खालसा और खालिस्तान के नाम पर हुआ है, उसकी जितनी […]
‘प्रतिनिधि पंजाबी कहानियां’ की अनुवादक श्रीमती सावित्री चौधरी हैं। जिन्होंने अबसे पूर्व में अपनी कई ख्यातिलब्ध पुस्तकें लिखकर दर्जनों पुरस्कार प्राप्त किए हैं। अपनी इस पुस्तक में उन्होंने बड़ा डॉक्टर, रब अपने असली रूप में, जैथा ग्वाला, जूठे आम, सैहबी फिर भी अकेला था, मांग, सोलहवां साल, मीनू , उफ़ क्या है ?, काला बाप […]
पुस्तक समीक्षा : सार सतसई
‘सार सतसई’ पुस्तक डॉ शंकर लाल गुप्ता द्वारा लिखी गई है, जो कि एक बहुत ही संवेदनशील कवि के रूप में विख्यात हैं। इस पुस्तक में डॉ शंकर लाल गुप्त जी के द्वारा दोहों के रूप में अपने मन की बात को अभिव्यक्ति दी गई है। उन्होंने बहुत ही बेहतरीन ढंग से विभिन्न विषयों को […]
“भारतीय परंपराओं की वैज्ञानिकता” – नामक पुस्तक श्रीमती सुनीता बापना व श्रीमती कुसुम अग्रवाल के द्वारा लिखी गई है। यह पुस्तक भारतीय परंपराओं की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डालती है ,जो कि इसके नाम से ही स्पष्ट हो जाता है। भारतीय परंपराओं के बारे में यह सच है कि वह चाहे आज कितनी ही और किसी […]
अफगानिस्तान में पिछले दिनों जो कुछ भी हुआ है उस पर अब अधिक कुछ लिखने की आवश्यकता नहीं है। वहां पर फिर तालिबानी आतंकवादियों के हाथों में सत्ता चली गई है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अंतर्गत मिलने वाले मानवीय मौलिक अधिकारों को वहां पर फिर ग्रहण लग गया है। जिससे अंतरराष्ट्रीय जनमत अफगानिस्तान की नई […]