स्किल इंडिया शहीद रामप्रसाद बिस्मिल की सोच

लेखक – आर्य सागर
अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल ने एक सदी पहले ही स्किल इंडिया व तकनीकी शिक्षा का विचार दे दिया था… जब भारतवर्ष स्वतंत्र भी नहीं था बिस्मिल बार-बार कहा करते थे…
“जो युवक मिडल इंटर बीए पास करने में हजारों रुपए नष्ट करके 10 15 20 से ₹30 की नौकरी के लिए (1927 सन )ठोकरें खाते फिरते हैं उन्हें नौकरी का आसरा छोड़कर कोई उद्योग जैसे फर्नीचर, फैब्रिकेशन दर्जी गिरी, फैशन डिजाइनिंग, लॉन्ड्री ,कपड़ा बनाना मकान बनाना, सिविल इंजीनियरिंग सीख लेना चाहिए यदि जरा साफ-सुथरे रहना हो तो डॉक्टरी सीखे” |
इतना ही नहीं उन्होंने देश के धनिक वर्ग के लिए भी कहा था….
“जो धनी माननीय देश सेवार्थ बड़े-बड़े विद्यालय तथा पाठशाला की स्थापना करते हैं उनको उचित है कि विद्यापीठ के साथ-साथ उद्योगपीठ शिल्प विद्यालय तथा कला कौशल भवनों की स्थापना भी करें |
इन विद्यालयों के विद्यार्थियों को नेतागिरी के लोभ से बचाया जाए विद्यार्थी का जीवन सादा हो तथा विचार उच्च हो |युवकों के हृदय में स्वदेश सेवा के भाव उनको कष्ट सहन करने की आदत डाल कर संगठित रूप से ऐसे कार्य करना चाहिए जिसका परिणाम स्थाई हो |
अब आप समझ सकते हैं बिस्मिल ना केवल क्रांतिकारी बल्कि बहुत ऊंचे विचारक भी थे आज के राजनेताओं से कितनी दूरदर्शी थी उनकी सोच |

लेखक सूचना का अधिकार व सामाजिक कार्यकर्ता है।