शहीद रामप्रसाद बिस्मिल के पूर्वज

लेखक – आर्य सागर
मरते बिस्मिल रोशन लहरी अशफाक अत्याचार से |
होंगे पैदा सैकड़ों इनके रुधिर की धार से||
( राम प्रसाद बिस्मिल गोरखपुर डिस्ट्रिक्ट जेल)
राम प्रसाद बिस्मिल के दादा
ठाकुर नारायण लाल तोमर बारबाई गांव मुरैना जिले मध्य प्रदेश के मूल निवासी थे | यह गांव चंबल नदी के बीहड़ में पड़ता है एक देशभक्त गांव था अंग्रेजों की नाक में आए दिन दम करता था पारिवारिक विवाद में ठाकुर नारायण लाल अपने दोनों पुत्र मुरलीधर जो राम प्रसाद बिस्मिल के पिता थे तथा उनके चाचा कल्याण सिंह सहित पैतृक गांव छोड़ दिया था |
आकर शाहजहांपुर मैं आकर बस गए | जीवन यापन के लिए अतार की दुकान पर ₹3 महीने की नौकरी की तथा बिस्मिल की दादी विचित्ररा देवी ने अपने पति का हाथ बंटाने के लिए अनाज पीसने का काम शुरू कर दिया |
आचार विचार सत्य निष्ठा व धार्मिकता से शाहजहांपुर के स्थानीय लोग बिस्मिल के दादा को पंडित जी कहकर बुलाते थे | यहीं से बिस्मिल के पूर्वजों वंशजों के साथ पंडित शब्द जुड़ गया कालांतर में रामप्रसाद के साथ भी जुड़कर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल हो गया बड़े विस्तार से अपनी आत्मकथा में उन्होंने इसका उल्लेख किया है | जब परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक हो गई बिस्मिल के दादा ने रेजगारी का कारोबार शुरू किया बड़े लड़के मुरलीधर की शाहजहांपुर नगर पालिका में ₹15 मासिक की नौकरी लग गई व मुरलीधर का विवाह मूलमती के साथ हुआ इसी महान देवी मूलवती की कोख से 11 जून 18 97 को शहीद क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल का जन्म हुआ |
- आर्य सागर खारी

लेखक सूचना का अधिकार व सामाजिक कार्यकर्ता है।