जब मथुरा के सेठ लक्ष्मीचंद्र ने खरीद लिया था ताजमहल को

  • 2016-05-15 03:04:07.0
  • अमन आर्य

[caption id="attachment_28244" align="aligncenter" width="750"]ताजमहल ताजमहल[/caption]

भारत के इतिहास में यह घटना सबसे विचित्र है कि अंग्रेजों ने अपने निजी लाभ के लिए विश्व की सबसे सुंदर कलाकृति ताजमहल को बेचने की कोशिश की थी। उस समय ताज की बोली सबसे अधिक लगाने वाले एक हिंदू वैश्य थे। इन्होंने ताज की नीलामी में बोली लगाकर ताज को खरीद लिया था।

अंग्रेजों ने अपने फायदे और ताजमहल में लगे कीमती संगमरमर के पत्थरों के लिए ताजमहल की नीलामी लगाई थी। अंग्रेजों की मंशा ताजमहल तोडक़र इसके कीमती पत्थरों को ब्रिटेन ले जाने की थी, और बाकी बचे संगमरमर के पत्थरों को बेचकर वे अपना सरकारी खजाना भरना चाहते थे। यह बात वर्ष 1828 की है, जब तत्कालीन गवर्नर जनरल  लॉर्ड बिलियम बेंटिक ने कोलकाता के अखबार में टैंडर भी जारी किया था। उस समय ब्रिटिश सत्ता की राजधानी कोलकाता हुआ करती थी।
तब अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र में 26 जुलाई 1831 के अंक में ताजमहल को बेचने की एक विज्ञप्ति प्रकाशित की गयी थी। नीलामी की शर्त के अनुसार ताज को तोडक़र इसके खूबसूरत पत्थरों को अंग्रेजों को सौंपना था।

इसकी नीलामी में कई देशी-विदेशी व्यापारियों ने भाग लिया था। लेकिन नीलामी में सबसे अधिक बोली  लगाकर ताजमहल को मथुरा के सेठ लक्ष्मीचंद ने खरीद लिया था। सेठजी का परिवार आज भी मथुरा में रहता है।

सेठी लक्ष्मीचंद्र के प्रपौत्र विजय कुमार मथुरा में रहते हैं, उन्होंने कहा कि सेठ लक्ष्मीचंद्र ने ताजमहल को पहले डेढ़ लाख में और बाद में बोली कैंसिल हो जाने पर दोबारा सात लाख में खरीदा था। जो बाद में निरस्त हो गया।

इस घटना का उल्लेख अंग्रेज और भारतीय लेखकों ने पुस्तकों में किया है। लेखक एच.जी.कैंस ने आगरा एण्ड नाइबर हुड्स पुस्तक में और सतीश चतुर्वेदी ने आगरा नामा में जबकि प्रो. रामनाथ ने द ताजमहल में इस घटना का उल्लेख किया है।

प्रो. रामनाथा के अनुसार ताजमहल के पुराने सेवादारों को अंग्रेजी हुकूमत के विनाशकारी आदेश की भनक लग गयी थी। यह सूचना आग की तरह फेेली और लंदन तक चली गयी।

जिसका कई राष्टरों द्वारा और भारतीय नेताओं द्वारा कड़ा विरोध किया गया था। साथ ही इस नीलामी में लंदन में असंबली में भी सवाल उठे। हर तरफ विरोध के बाद  गर्वनर जनरल लॉड विलियम वेंटिक को ताजमहल की नीलामी रद्द करनी पड़ी, और इस तरह लार्ड विलियम बैंटिक अपनी योजना में सफल नही हो सका।

(साभार)