जयललिता: नेताओं की नेता

  • 2015-05-14 06:04:33.0
  • डॉ0 वेद प्रताप वैदिक

jai lalitaतमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता, अब पूर्व नहीं, अपूर्व मुख्यमंत्री बन गई हैं। दो बार जेल काटने के बाद, अब वे शीघ्र ही अपना मुख्यमंत्री पद संभालेंगी। जयललिता को कर्नाटक उच्च न्यायालय में जो विजय मिली है, उसने उन्हें नेताओं की नेता बना दिया है। देश के सभी नेताओं को जयललिता की वजह से कितनी ठंडक मिल रही है ? 19 साल की मुकदमेबाजी के बावजूद जयललिता बेदाग साबित हुईं। इससे क्या नतीजा निकलता है? जयललिता से भी बड़े और खुर्राट नेता हमारे उत्तर भारत में हैं। यदि जयललिता एक मुकदमे को 19 साल तक खींच सकती हैं तो वे उसे 30-40 साल तक क्यों नहीं खींच सकते हैं? उनके दिवंगत होने के बाद मुकदमा तो चलना नहीं है। जितनी भी संपत्ति उन्होंने खड़ी की है, वह उनके वारिसों से छिननी नहीं है। इसीलिए सारे नेताओं को चाहिए कि वे डॉक्टर जयललिता से ‘टालू मिक्शचर’  की पुड़िया बनाना सीखें। जजों का कुछ पता नहीं। कब क्या निर्णय दे दें ? इसीलिए सबसे सुरक्षित और सबसे पहला काम तो यह कि नेता अपने मुकदमों को लंबा खींचने की कला जयललिता से सीखें।



जयललिता पर मुकदमा यह चला था कि उनके पास उनकी आय से 66 करोड़ 64 लाख रु. ज्यादा निकले? कहां से आए, ये रुपए? उनके घर छापा पड़ा तो 12 हजार साडि़यां निकलीं, 28 किलो सोना निकला और 800 किलो चांदी निकलीं और 750 जूतियों की जोड़ियाँ निकलीं । हमारी जयललिता ने फिलीपीन्स के राष्ट्रपति की बीवी इमेल्डा मारकोस को भी मात कर दिया जबकि जयललिता तो हमारे नरेंद्र मोदी की तरह अविवाहित हैं। मोदी के यहां से क्या निकल सकता है? ज्यादा से ज्यादा 1000 रंग-बिरंगी बंडियां (जेकेट) निकल सकती हैं। मिर्जा ग़ालिब के घर से क्या निकला था ? उनके अपने शब्दों में – “ बाद मरने के मेरे,घर से ये सामान निकला। चंद तस्वीरें बुतां और चंद हसीनों के खुतूत (प्रेम पत्र) ।।” ग़ालिब तो शायर थे। नेता नहीं थे। लेकिन जयललिता का मामला ज़रा दूसरा है। उन्होंने एक बेटा गोद ले रखा था। उसकी शादी में उन्होंने करोड़ों रु. खर्च किए थे। कर्नाटक के उच्च न्यायालय ने शादी के खर्च और जयललिता की आय के आंकड़ों को रद्द कर दिया है। जयललिता पर आरोप था कि उसने फर्जी व्यापारिक संस्थाओं से आय दिखाई है। अदालत ने उस आय को उचित आय माना और फैसला दिया कि उनकी आय से जो ज्यादा पैसा उनके पास निकला है, वह सिर्फ दो करोड़ 82 लाख रु. है, जो कि उनकी मूल आय का 8.2 प्रतिशत है। कानून कहता है कि ऊपर की आय यदि 10 प्रतिशत हो तो कानून का उल्लंघन नहीं होता। इसीलिए जयललिता निर्दोष है। याने कोई भी व्यक्ति किसी भी तरीके से 10 प्रतिशत की हेराफेरी कर सकता है। जयललिता ने मुकदमा लड़कर देश के सभी नेताओं के लिए काफी सहूलियत कर दी है। सिर्फ नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई क्यों दी ? देश के हर नेता को उन्हें बधाई देना चाहिए और यदि वे अफसोस जाहिर करना चाहें तो इतना जरुर कर सकते हैं कि उन्हें अदालतों ने सलमान खान के बराबर भी कभी नहीं समझा। सलमान को दो अदालतों ने चटपट जमानत दे दी और इस ‘महान क्रांतिकारी नेता’ (पुरातची थलैवी) को दो बार जेल काटनी पड़ी।