पाकिस्‍तानी हिन्‍दुओं की पाकिस्‍तान में दुर्दशा

  • 2015-04-16 05:51:12.0
  • उगता भारत ब्यूरो

pakistani-hindu demonst.नारकीय जीवन जी रहे हैं पाकिस्तानी हिन्दू


पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल मोहम्मद अली जिन्ना ने 11 अगस्त 1947 को पाकिस्तान के आवाम को संबोधित करते हुए कहा था कि “सभी पाकिस्तानियों को उनके धर्मस्थलों पर जाने का अधिकार होगा.गैर-मुस्लिम अपनी धार्मिक भावना के लिए स्वतंत्र होंगे.”भारतवर्ष को लहुलुहान करते हुए,दो भागों में विभाजित करने वाले जिन्ना ‘काफिरों’ को दिए गए भरोसे पर कितना खरे उतरे,इसका अंदाजा आप इसी तथ्य से लगा सकते हैं कि विभाजन के समय 24% पाकिस्तानी हिन्दुओं की जनसंख्या,आज 68 वर्ष बाद महज 1.5% में सिमट कर रह गयी है.क्या पाकिस्तान में हिन्दुओं को योजनाबद्ध तरीके से खत्म करने का कार्यक्रम जारी है?देसी lutyens ने पाकिस्तान में हिन्दुओं एवं अन्य अल्पसंख्यकों के नर्कपूर्ण जीवन के कुछ पन्नों का अध्ययन किया.


1)  इस्लामाबाद स्थित मानवाधिकारों के लिए कार्य करने वाली संस्था SDPI ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया है कि हर हाल करीब 1000 गैर मुस्लिम लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया जाता है.इसमें बलात्कार को सबसे पहला जरिया बनाया जाता है.रिंकल कुमारी जैसी हजारों हिन्दू बेटियाँ इसका शिकार हो चुकी हैं.


2)  पाकिस्तानी हिन्दू काउंसिल के अनुसार केवल सिंध प्रान्त से हर महीने 20 हिन्दू लड़कियों को इस्लाम में परिवर्तन कराया जाता है.इन प्रान्तों में हिन्दुओं की जनसँख्या करीब 25 लाख है.यहाँ पर हिन्दू परिवारों से धर्मपरिवर्तन न कराने के लिए फिरौती ली जाती है.हिन्दू लड़कियों की किडनैपिंग,बलात्कार और धर्म परिवर्तन यहाँ आम बात है.


3)  पाकिस्तान में सभ्य समझे जाने वाले बहुसंख्यक धार्मिक समुदायों के अगुआ भी इन गतिविधियों में संलिप्त रहते हैं.और उपद्रवी तत्वों को हिन्दुओं के प्रति जेहाद के लिए उकसाते रहते हैं.सरकारें और पुलिस भी इन घटनाक्रमों पर आँखें मूद लेती हैं.


4)  पाकिस्तान के इस्लामी लोकतंत्र में ईश निंदा कानून को सबसे ज्यादा तवज्जो दी जाती है.पाकिस्तान के एक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मो.अख्तर साफ़ कहते हैं कि “ईशनिंदा को रोकना हर मुस्लिम का दायित्व है”.जहाँ न्यायपालिका ही ऐसे बयानों का प्रयोग करती हो वहाँ आप निष्पक्ष न्याय की उम्मीद कैसे कर सकते हैं.


5)  हिन्दुओं को पाकिस्तानी व्यवस्थापिका में क्लर्क से अधिक पद में भर्ती नहीं किया जाता है.हालाँकि कुछ अपवाद जरूर है,परन्तु कमोबेश हर सरकारी तंत्र में हालात ऐसे ही मालूम होते हैं.


6)  पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों द्वारा स्वतंत्र व्यापार करना बहुत कठिन है.उन्हें व्यापार करने के लिए मूक रूप में ही सही पर एक मुस्लिम पार्टनर बनाना जरूरी है.पाकिस्तानी धारणा के अनुसार हिन्दुओं को ‘कंजूस बनिया’ माना जाता है,जो की इस्लाम के सबसे बड़े दुश्मन हैं.


7)  हिन्दू और सिख पाकिस्तान में भारत के प्रतीक समझे जाते हैं.इसलिए जब भी भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी प्रकार का द्वन्द होता है चाहे वो क्रिकेट मैच या सीजफायर का उल्लंघन हो,हिन्दुओं के मंदिर,बेटियाँ,घर,दुकानें और संपत्ति को निशाना बनाया जाता है.


 8)  पाकिस्तान अपनी इस्लामिक कट्टरता को अपनी शिक्षा और समाज पर भी थोपे हुए है.एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान के स्कूलों में भारत को ‘काफिरों का देश’ बताते हुए उससे घृणा करने की सीख दी जाती है.इसका बुरा प्रभाव ये पड़ता है कि पाकिस्तान की भारत विरोधी भावना का कोपभाजन,स्थानीय निर्दोष हिन्दुओं को भुगतना पड़ता है.


9)  साल 1992 में बाबरी विध्वंस की प्रतिक्रिया में सैकड़ों हिन्दू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया.इस समय पाकिस्तान की राजधानी ‘इस्लामाबाद’ में एक भी हिन्दू मंदिर अस्तित्व में नहीं हैं.सबसे अधिक 50 मंदिर कराची में है,लेकिन उनमे से 30 से ज्यादा में कट्टरपंथियों ने अतिक्रमण कर रखा है.


10)  कभी पाकिस्तान का अंग रहा बांग्लादेश भी हिदुओं पर अत्याचार के मामलों में पीछे नहीं है.पिछले 20 सालों में हजारों हिन्दुओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की हत्याएं की गयी हैं.’वेस्टेज प्रापर्टीज रिटर्न’ जैसे काले कानूनों के कारण यदि किसी हिन्दू की जमीन हड़प ली गयी है,तो वह उस पर अपील करने का अधिकार नहीं रखता.


11)  दुर्दशा के शिकार पाकिस्तानी हिन्दू भारत को अपनी आख़िरी आस मानते हैं.कई पाकिस्तानी हिन्दू जत्थों की शक्ल में अपनी सारी संपत्ति छोड़-छाड़ कर भारत की ओर पलायन कर रहे हैं.उनका कहना है कि वे दोबारा पाक नहीं जाना चाहते.इससे उनकी मजबूरी और पीड़ा का अंदाजा लगाया जा सकता है.


भारत में दिल्ली,मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में करीब 3 करोड़ फर्जी घुसपैठिये रह रहे हैं.जिसकी आधिकारिक जानकारी सरकार के पास भी नहीं है.कई राज्य सरकारों ने उनके वोटर आईडी और राशन कार्ड भी बनवा दिए हैं.तो क्या मानवता के नाम पर भारत सरकार को इन पलायित हिन्दूओं को शरण नहीं देना चाहिए.?


वाया देशी लुटियन