नमक औषधि  हैं न की जहर

  • 2015-04-13 09:53:23.0
  • उगता भारत ब्यूरो
नमक औषधि  हैं न की जहर

नमक कई प्रकार के होते हैं। सेंधा नमक समुद्री झागी नमक

काला नमक लाहोरी नमक आयोडीन नमक

परंतु आयोडीन नमक कभी न खाएं

नमक हमेसा सेंधा नमक या काला नमक ही खाएं ।

हाई बी.पी.और लो बी.पी दोनों मैं नमक औषधि हैं जिनका ब्लड प्रेशर ऊँचा हैं उन्हें

समुद्र स्नान करना  चाहिए  या स्नान करते समय पानी मैं समुद्री नमक या सेंधा नमक

मिलादें।

और कम से कम 15 .20 दिन तक साबुन न लगाये।

जिनका ब्लड प्रेषर लो (निम्न)हैं उन्हे। सेंधा नमक मिलकर पानी मैं पीना चाहिए ।

आयोडीन नमक नपुंसकता लाता हैं

भारत को छोड़ कर दुनिया के सभी देशों मैं

आयोडीन नमक बंद हैं । आयोडीन नमक से कम्पल्सन (अनिवारिता) हट गया हैं

इस लिए आप सेंधा नमक या काला नमक  ही खाये

आयोडीन नमक खानेसे डेनमार्क मैं बच्चे पैदा नहीं होते वहा जादा बच्चे पैदा करने पर सरकार इनाम देती हैं ।

भारत मैं जनसँख्या कम करने की जरुरत नहीं हैं  संसाधनों का सही बटवारा करने  की जरुरत हैं।

सेंधा नमक सब से जादा विष को कम करता हैं  और काला नमक भी विष को कम करता हैं

भोजन पकाते समय सेंधा या काले नमक कही पयोग करें

सेंधा नमक डाला हुआ खाना खाने के बाद

दूध का सेवन किया जासकता  हैं

बह्मचारी और साधू लोगों के लिए सेंधा और कला नमक सब से अच्छा होताहै हल्दी भी सामान्य से थोड़ी जादा डालनी चाहिए जिससे जहर थोडा और कम हो जायेगा ।

सब से जादा सोडियम सोंधे नमक और काले नमक से मिलता हैं सोडियम की थोड़ी सी कमी लकवे (पेरलेसेस)का कारन बन सकती हैं

सोडियम की कमी से आवाज भी जासकती हैं।

समुद्री आयोडीन नमक मैं 3से4 सूक्ष्म पोशक

तत्व हैं । जो सरीर को कम आते हैं

सौंदा नमक मैं 94 सुक्ष्म पोसक तत्व हैं जो शारीर के काम आते हैं ।

समुद्र का पानी मनुष्य के अनुकूल नहीं हैं जिस कारन समुद्री नमक भी शरीर के अनुकूल नहीं हैं।

अतः शरीर की साडी असमान जटिलताऐ

बढ़ती हैं समुद्र के सभी नमक रक्तचाप बढ़ाने वाले हैं समुद्री नमक का चलन मात्र 63 साल पहले ही शुरू हुआ हैं।

दैनिक आहार मैं शरीर को आवस्यक आयोडीन की मात्र की पूरी हो जाती हैंअर्थात्

अतिरिक्त आयोडीन की आवस्यकता शरीर को नहीं पड़ती हैं

क्यों की आयोडीन की मात्रा शरीर अधिक होने की स्थिति मैं नपुंसकता बढ़ती हैं।

नमक को फ्री फ्लो बनाने के लिए नमक की नमी निकाला जाता हैं और नमक का गुण ही हैं की नमी को धारण करे

नमी को निकाल ने के लिए एल्मुनियम सिलिकेट केमिकल डालते है

जो की बहुत ही खतरनाक हैं दूसरा केमिकल पोटेशियम अयोडेट जो अप्राकृतिक हैं

ये दोनों मिलकर हमारे शरीर मैं बहुत सी

जटिलताओ को जन्म देते हैं

और ठन्डे देशों मैं आयोडीन की जरुरत होती है ।

काले नमक को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धिति में एक ठंडी तासीर का मसाला माना जाता है और इसका प्रयोग एक रेचक और पाचन सहायक के रूप में किया जाता है। यह भी माना जाता है कि यह पेट की गैस (उदर वायु) और पेट की जलन मे राहत प्रदान करता है। यह माना जाता है कि इसमे आम नमक की तुलना मे कम सोडियम होता है और यह रक्त में सोडियम की मात्रा में वृद्धि नहीं करता है। हरड़ के बीजों को आयुर्वेदिक चिकित्सा में कामोत्तेजक माना जाता और यह रक्तचाप को कम करने और जलन में मदद करता है। इस आशय का कारण हरड़ के बीजों का सल्फ्यूरस यौगिक हैं जो निर्माण प्रक्रिया के दौरान काला नमक का हिस्सा बन जाते हैं। काले नमक वायु में फैले बैकटीरिया को भी खतम करता है।

 

सेंधे नमक की लगभग एक सौ ग्राम डली को चिमटे से पकड़कर आग पर, गैस पर या तवे पर अच्छी तरह गर्म कर लें। जब लाल होने लगे तब गर्म डली को तुरंत आधा कप पानी में डुबोकर निकाल लें और नमकीन गर्म पानी को एक ही बार में पी जाएँ। ऐसा नमकीन पानी सोते समय लगातार दो-तीन दिन पीने से खाँसी, विशेषकर बलगमी खाँसी से आराम मिलता है।

कृष्णा शर्मा