यह मोदी का बड़प्पन

  • 2015-03-31 04:11:17.0
  • डॉ0 वेद प्रताप वैदिक
यह मोदी का बड़प्पन

अटल बिहारी वाजपेयी तो भारत-रत्न ही थे। नरेंद्र मोदी ने भी माना, यह अच्छा किया। कांग्रेस सरकार उन्हें यह सम्मान देती तो उसकी इज्ज़त भी बढ़ती लेकिन कांग्रेस सरकार ने यह मौका खो दिया। भारत रत्न या इस तरह के सम्मान पता नहीं किस-किसको कौन-कौन दे देता है? कई बार देखा जाता है कि सम्मान देने वालों और लेने वालों की पात्रता में भी संदेह उत्पन्न हो जाता है लेकिन जहां तक अटलबिहारी वाजपेयी का सवाल है, उनके विरोधी भी प्रसन्न होंगे। अटल बिहारी वाजपेयी की सबसे बड़ी खूबी ही यह थी कि वे अजातशत्रु थे। मिर्जा गालिब का वह शेर मुझे इस अवसर पर याद आ रहा है, जिसमें उन्होंने अपनी प्रेमिका के लिए कहा था कि ‘तेरे होठ कितने मीठे हैं कि तेरी गालियां खाकर भी तेरा दूसरा प्रेमी (रक़ीब) बेमज़ा न हुआ।’ अब से 50 साल पहले अटल बिहारी वाजपेयी जब भाषण देने इंदौर आते थे तो कई बड़े कांग्रेसी नेता सभा-स्थल के आस-पास किसी घर या दुकान में बैठकर उनके भाषण का रस लिया करते थे। इसीलिए वाजपेयी को मैं देश के महानतम वक्ताओं में गिनता हूं। उन्होंने साहित्य के नौ रसों में दसवां रस जोड़ दिया। निंदा-जैसी ज़हरीली चीज़ को भी उन्होंने रसीली बना दिया।


 नरेंद्र मोदी की सरकार ने उन्हें यह सम्मान दिया है, यह असाधारण घटना है। यह सम्मान मोदी को, मेरी नजर में, बहुत ऊंचा उठा रही है। 2002 में जब गुजरात में दंगे शुरु हुए तो मैंने टीवी पर और नवभारत टाइम्स में भी एक लेख लिखा, जिसमें मैंने कहा कि गुजरात से ‘राजधर्म का उल्लंघन’ हो रहा है। वाजपेयी ने भी उस कथन को बार-बार दोहराकर अमर बना दिया। उन्होंने एक दिन सुबह मुझे फोन किया कि आज शाम को गोवा में पार्टी की कार्यकारिणी है। आज नरेंद्र मोदी को हटा देंगे। मोदी को वे हटा नहीं सके लेकिन क्या मोदी को यह बात पता नहीं होगी?  जरुर पता है लेकिन इसके बावजूद मोदी ने वाजपेयी को भारत-रत्न दे दिया, यह अपने आप में बड़ी बात है। वाजपेय़ी के मामले ने यह संकेत दिया है कि आखिर मोदी में बड़प्पन है, दरियादिली है। वे यदि प्रतिशोध लेना चाहते तो कुछ भी बहाना बना सकते थे।


 अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत रत्न को सुशोभित किया है। यदि वे प्रधानमंत्री नहीं बनते तो भी उन्हें भारत-रत्न मिलना ही चाहिए था, लेकिन वे ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने भारतीय संप्रभुता का सारे विश्व में शंखनाद किया। भारत को परमाणु-शक्ति बनाया। भारत के इतिहास में उनका नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।