नेताओं की डकैती पर रोक

  • 2015-03-27 04:11:12.0
  • डॉ0 वेद प्रताप वैदिक
नेताओं की डकैती पर रोक

सर्वोच्च न्यायालय ने सूचना तकनीक अधिनियम की धारा 66 ए को रद्द कर दिया। इस धारा को रद्द करवाने का श्रेय किसे है? श्रेया सिंघल को। श्रेया वकालत पढ़ रही है लेकिन इस युवती ने दो अन्य युवतियों को गिरफ्तार किए जाने का विरोध किया। उन दोनों युवतियों का अपराध क्या था? सिर्फ यही कि उन्होंने इंटरनेट पर तीन साल पहले यह लिख दिया था कि बाल ठाकरे के निधन पर मुंबई बंद करने का औचित्य क्या है? दोनों को धारा 66 ए के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया। श्रेया ने इस मामले के खिलाफ याचिका दायर की।

इस धारा के अन्तर्गत दर्जनों नौजवानों को गिरफ्तार होना पड़ा है। ऐसे नौजवानों को भी गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने दूसरों की कही किसी बात को इंटरनेट पर चला दिया है। उ.प्र. में तो सैकड़ों लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। यह कानून इतना अंधा है कि इसके तहत किसी को भी आप अपने जाल में फंसा सकते हैं। यदि आपको किसी की कोई बात ‘आक्रामक’ या ‘परेशान’ करने वाली लगे तो आप उस आदमी को तुरंत गिरफ्तार करवा सकते हैं। इस काले कानून का सबसे ज्यादा दुरुपयोग नेता लोग करते हैं। ठाकरे—संतति, ममता बनर्जी, आजम खान, चिदंबरम—पुत्र आदि!

सबसे मोटी खाल हमारे नेताओं की ही होती है। तलुए चाटना, खुशामद करना, गालियां खाना और फिर बेशर्मी से अपना मतलब गांठने की कला में जुट जाना,  ये हमारे करामाती नेताओं की लाजवाब अदाएं होती हैं लेकिन कोई सभ्य नागरिक की क्या मजाल कि वह हमारे इन नकली शंहशाहों की शान में कोई गुस्ताखी कर दे? वे उसे तुरंत गिरफ्तार करवा देते हैं। इसीलिए जब 2013 में यह कानून पास हो रहा था तो लगभग सभी पार्टियों ने इसका डटकर समर्थन किया था। कांग्रेस सरकार को ऐसे किसी कानून की बहुत जरुरत थी लेकिन भाजपा ने भी उसका साथ दिया था। यह नागरिक स्वतंत्रता पर नेताओं की डाकेजनी थी। बधाई, सर्वोच्च न्यायालय को, कि उसने इस राजनीतिक डकैती को रोक दिया। मौसेरे भाइयों की साजिश पकड़ी गई।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इंटरनेट के नेटिज़न को लाइसेंस मिल गया है। यदि किसी के खिलाफ कोई भी अनर्गल या आपत्तिजनक या आक्रामक या पीड़ादायक या अश्लील बात लिखेगा तो उस पर भारतीय दंड संहिता के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। याने अदालत ने लोगों को बेलगाम छूट नहीं दी है लेकिन उन पर बेलगाम रस्सा भी नहीं कसने दिया है। अब अदालत के फैसले के आगे सारे नेता बेबस हैं। मौसरे भाइयों के पास इस फैसले का स्वागत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।