... तो कैसे बनेंगी बेटियाँ स्त्रीशक्ति?

  • 2015-03-25 01:23:46.0
  • उगता भारत ब्यूरो
... तो कैसे बनेंगी बेटियाँ स्त्रीशक्ति?


-रीता विश्वकर्मा


यहाँ पूर्व प्राप्त तीन संवादों पर अपनी टिप्पणी दे ही रहे थे कि इसी बीच उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में तीन लड़कियों की निर्मम हत्या काण्ड का समाचार मिलते ही मनःस्थिति असामान्य हो गई। यहाँ बता दें कि देवरिया जिले के बरहज थाना क्षेत्र में बीते शनिवार को एक साथ तीन लड़कियों के शव बरामद हुए थे। मृत लड़कियों की उम्र 18, 14 व 9 वर्ष थी। हालांकि इस तीहरे हत्याकाण्ड में संलिप्त दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, शेष दो की तलाश की जा रही है।

इस प्रकरण में बताया गया है कि उक्त तिहरे हत्याकाण्ड की मूल वजह मुख्य हत्यारोपी का एकतरफा प्यार बताई गई है। तीनों मृतक किशोरियाँ एक ही गाँव की रहने वाली सहेलियाँ थीं। बरहज क्षेत्र के ग्राम पैना के रहने वाले धीरज गौड़ नामक एक युवक के बुलाने पर गाँव के बाहर स्थित खोह नाले के पास गई थी, जहाँ चार दरिन्दों ने बेरहमी से उनकी गला रेतकर हत्या कर दिया। इस घटना का मुख्य हत्यारोपी सोनू हरिजन नामक एक युवक बताया गया है, जिसने होली के दिन 18 वर्षीया युवती को रंग लगाने की कोशिश किया था, जिसका उक्त किशोरी ने विरोध किया था। इसे लेकर सोनू के साथ उसकी काफी नोकझोंक भी हो गई थी। यह प्रकरण पूरे गाँव में चर्चा का विषय बन गया था, तभी से सोनू हरिजन बदले की आग में जल रहा था।

उक्त युवती की हत्या कर अपने साथियों की मदद से लाश ठिकाने लगाने की उसने ही योजना बनाई। 18 वर्षीया लड़की की हत्या के बाद घटना का राजफाश न हो इस लिए वहशी दरिन्दों द्वारा मृतका की दोनों सहेलियों की भी निर्मम हत्या कर दी गई। अवसाद की गहरी खाईं में गिरे दिलजले सोनू हरिजन नामक युवक ने जिस तरह से तिहरे हत्याकाण्ड की साजिश रची, पुलिस द्वारा उसका खुलासा होने का समाचार सुन/पढ़कर मन कसैला हो गया और मन में तरह-तरह के विचार उठने लगे।
क्या ऐसे पुरूष प्रधान समाज में जहाँ छल, कपट, आज्ञानता और अवसाद के चलते लोग लड़कियों के साथ कुछ ऐसा ही बर्ताव करेंगे जो सदियों से चला आ रहा है, तब हम कैसे मान लें कि नारी का सशक्तिीकरण हो गया है। लोग बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं जैसे नारे पर अमल करने लगे हैं। महिलाएँ जागरूक बन गई है, और निर्भया बनकर नारी शक्ती की मिशाल पेश करते हुए वीरांगना बनकर स्वयं की रक्षा कर सकती है?



मथुरा में बेटी पढ़ाओ के नाम पर पिता ने हाथ-पैर बांधकर पुत्री को पहुँचाया स्कूल


बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, महिला सशक्तीकरण और  फिर स्त्री शक्ति, तेजस्विनी, निर्भया, वीरांगना आदि बनाने के लिए प्रयासरत सरकार और सरकारी नारा, साथ ही स्वयं सेवी संस्थाएँ। मीडिया की सभी विधाओं में हो रहा इसका तेजी से प्रचार-प्रसार। बावजूद इन सबके न तो समाज चेत रहा है, और न ही हम जागरूक हो रहें हैं। यह तो आम बात हो गई है कि बेटियों के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले माता-पिता और अभिभावक अब भी पुरानी सदी की तरह ही रूढ़िवादी संस्कार युक्त माहौल में जी रहे हैं।
अधिकांश माँ-बाप ऐसे हैं, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ स्लोगन को अंगीकार करते हुए अपनी बेटियों को स्कूल भेजने के लिए तत्पर देखे जाते हैं। कुछ मामले ऐसे भी प्रकाश में आए हैं जिनमें माँ- बाप द्वारा स्कूल जाने से कतराने वाली अपनी बच्चियों को जबरिया स्कूल भेजने का अजीबो-गरीब तरीके अपनाए जा रहे हैं। इसी तरह का एक मामला मथुरा में चर्चा का विषय बन गया है। इस चर्चित मामले का विवरण कुछ इस तरह हैं। गत 14 मार्च को थाना हाईवे क्षेत्र के सौंख रोड स्थित नगलामाना निवासी भगवत नामक एक पिता अपनी सात वर्षीया पुत्री पूनम को मोटर साइकिल पर रस्सी से बांधकर स्कूल ले गया था। पूनम पढ़ने से कतराती थी, और स्कूल जाने में आना-कानी करती थी। उसके पिता भगवत ने तब उसे उक्त तरीके से स्कूल भेजा था।
हालाँकि यह मामला महिला आयोग में गया था, जिसे बाद में पुलिस ने बाल संरक्षण अधिनियम की धाराओं में बदल दिया। मीडिया द्वारा हाथ-पैर बांधकर बेटी को मोटर साइकिल पर लादकर ले जाते हुए पिता भगवत की फोटो प्रकाशित की थी, जिससे थाना हाईवे पुलिस सक्रिय होकर एन.सी.आर. दर्ज कर भगवत को गिरफ्तार कर शान्तिभंग में चालान कर दिया था। थाने में आरोपी भगवत ने पुलिस को बताया था कि उसका मकसद सही था, लेकिन तरीका गलत था। वह अपनी बेटियों को अच्छी तालीम दिलाने के लिए फिक्रमन्द है।


प्रतापगढ़ में प्रेमिका ने सरेबाजार प्रेमी को पीटा


महिलाएँ कितना जागरूक हैं, हो रही हैं इनके अनेकानेक उदाहरण देखने और सुनने को मिलने लगे हैं। स्त्री शक्ती के आगे पुरूष प्रधान समाज में पुरूष वर्ग घुटने टेकने लगा है। रेनबोन्यूज को उसके सूत्रों ने कई ऐसे संवाद प्रेषित किए हैं जिन्हें पढ़कर ऐसा महसूस होने लगा है कि नारी अबला नहीं है। और वह दिन दूर नहीं जब पुरूष अपनी मनमानी करके स्त्रियों को प्रताड़ित करना भूल जाएँगे। प्रतापगढ़ से हमें प्राप्त एक समाचार के अनुसार एक युवती ने अपने प्रेमी को बीते दिवस सरेबाजार दौड़ा-दौड़ाकर इसलिए पीटा क्योंकि प्रेमी की लापरवाही के चलते वह स्नातक परीक्षा का एक प्रश्न-पत्र नहीं दे सकी। मामला जिले के थाना आसपुर देवसरा का है। उक्त थाना क्षेत्र के गाँव सराय भिखरी निवासी युवक का प्रेम-प्रसंग पड़ोसी गाँव सराय मधई निवासी किशोरी के साथ चल रहा था। किशोरी के पिता की मौत हो चुकी है और वह अपने एक रिश्तेदार के घर रह रही थी। प्रेमी ने अपनी प्रेमिका का स्नातक में दाखिला एक महाविद्यालय में करा दिया। इस बीच प्रेमिका मुम्बई चली गई। जब परीक्षा का समय आया तो प्रेमिका मुम्बई से वापस आई। गत शनिवार को जब वह परीक्षा देने कॉलेज पहुँची तो पता चला कि उसका एक प्रश्न-पत्र छूट गया है। इससे वह काफी नाराज हो गई और शनिवार को परीक्षा देकर बाहर निकली तो उसका प्रेमी के साथ विवाद हो गया। तकरार बढ़ी तो प्रेमिका ने प्रेमी पर हमला बोल दिया, और सरेबाजार उसकी जमकर पिटाई कर दी। प्रेमी अपनी इज्जत बचाने के लिए गली में भागा तो क्रोधित प्रेमिका ने वहाँ भी उसका पीछा नहीं छोड़ा। सरेबाजार प्रेमी को पिटता देख लोग तमाशबीन बने रहे, और प्रेमिका ने उसके सर से प्यार का सारा भूत उतार कर ही सांस लिया।


मुम्बई में युवती ने मनचले को घसीटकर पहुँचाया थाने


इसी तरह की एक घटना के बारे में हमारे मुम्बई स्थित आरएनएन संवाददाता ने हमें समाचार भेजकर बताया। मुम्बई की एक स्टूडेन्ट प्रदन्या मंधारे ने छेड़खानी कर रहे एक बदमाश को न केवल पीटा, बल्कि घसीटते हुए हवालात तक भी पहुँचाया। हालांकि प्रदन्या को मलाल है कि उसकी मदद को कोई आगे नहीं आया और आस-पास जुटे लोग महज तमाशबीन बने रहे। बीते दिवस कॉलेज से घर लौटते समय दोहपर लगभग ढाई बजे प्रदन्या लोकल ट्रेन से कांदीवली स्टेशन पहुँची और दूसरी लोकल ट्रेन पकड़ने के लिए दूसरे प्लेटफॉर्म की तरफ बढ़ ही रही थी कि नशे में धुत एक व्यक्ति ने अभद्र तरीके से उसे छुआ। इसके बाद उसने मनचले को दबोच लिया। पहले तो वह सन्न रह गईं लेकिन हिम्मत जुटाकर अपने बैग से ही आरोपी को पीटना शुरू कर दिया। मंधारे ने बताया कि जब उसकी मदद को कोई नहीं आया तो वह खुद ही उसके बाल पकड़कर घसीटते हुए जीआरपी चौकी तक ले गई।