डाकिया झुका अपनी गलती मानी

  • 2015-03-20 10:42:07.0
  • उगता भारत ब्यूरो
डाकिया झुका अपनी गलती मानी

उसने भविष्य में ऐसी गलती न दुहराने का वायदा किया


    दिल्ली में लोगों के राशन कार्ड क्यों नही मिल रहे हैं। आप इस कहानी को पढ़ेंगे तो आप जान जायेंगे कि आपका राशन कार्ड क्यों नही मिल रहा है।  शिल्पी जायसवाल संजय इंक्लेव उत्तम नगर, नई दिल्ली-110069 ने 1/10/2013 को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा उपभोक्ता कार्ड हेतु आवेदन प्रपत्र जमा किया था। 11/09/2014 को शिल्पी जायसवाल के मोबाइल पर एक संदेश भी आया कि आपका राशन कार्ड स्पीड पोस्ट से भेज दिया गया है अगर न मिला हो तो हमारे राशन दफ्तर में संपर्क करिये। खाद्य आपूर्ति कार्यालय से शिल्पी जायसवाल के संपर्क करने के बाद ठीक से वहां के अधिकारियों ने बात भी नही किया और कहा कि आपका राशनकार्ड डाक द्वारा भेज दिया गया है वापस मिलने पर हम आपको बुलाकर दे देंगे।


    ज्ञात रहे कि 11/09/2014 को शिल्पी जायसवाल के मोबाइल पर एक संदेश आया कि आपका राशन कार्ड भेज दिया गया है मगर उनका राशन कार्ड फरवरी, 2015  तक नही आया था। तत्पश्चात शिल्पी जायसवाल ने अपने राशन कार्ड को पाने के लिये 8/2/2015 को कई जगह शिकायत भिजवाई। शिल्पी जायसवाल का राशनकार्ड मार्च 2015 के प्रथम सप्ताह में मिला साथ में शिल्पी के उपर के तृतीय तल में रहने वाली महिला का भी राशन कार्ड उपरोक्त व्यक्ति से मिला।


    बाद में पता चला कि शिल्पी जायसवाल के राशन कार्ड उनके इलाके के प्रधान के यहां पड़ा हुआ था और उसे प्रधान जी या उनके किसी व्यक्ति द्वारा उनके राशन कार्ड को उनके निवास पर भिजवाया गया साथ में उसी पते के तृतीय तल पर रहने वाली महिला का भी राशनकार्ड उपरोक्त व्यक्ति से मिला। यदि किसी का राशन कार्ड पांच-छह  महीने तक न मिलने पर  क्या कोई अपना राशन कार्ड पाने  के लिये प्रयास नही करेगा।


    अब आप इससे समझ सकते हैं कि आम नागरिक भी जब ये बातें जानेगा तो यही समझेगा कि उसके राशन कार्ड की कहानी इसी तरह से होगी।


     डाक विभाग की यह जिम्मेदारी है कि वह राशन कार्ड को जिसके नाम से है उसे दे न कि किसी इलाके के प्रधान या नेता को। यदि किसी निवासी के घर पर ताला लगा है तो डाकिया पुनः उसके घर का चक्कर लगाये। इसके बावजूद यदि व्यक्ति नही मिलता है तो उस राशन कार्ड को डाकिया राशन कार्यालय में जमा कर दें जिससे नागरिकों को उसका राशनकार्ड उसके राशन कार्यालय से मिल जाये।


     राशन कार्ड थोक के थोक  किसी इलाके के प्रधान या नेता को देना उचित नही यदि प्रधान या नेता से राशनकार्ड गायब हो जाये तो इसके लिये स्वयं डाक विभाग जिम्मेदार होगा व डाक विभाग के  उच्च अधिकारी ही उस डाकिये के विरूद्ध कार्यवाही करने के लिये बाध्य होंगे।


    उत्तम नगर का एक डाकिया जिसका बीट नंबर 18 है,  ने अपनी गलती  स्वीकारते हुये कहा कि हम भविष्य में कभी भी किसी के  राशन कार्ड को प्रधान या नेता  के यहां नही देंगे और काम अधिक रहने पर ज्यादा मेहनत कर लोगों को राशन कार्ड उनके हाथ में पहुंचाने का प्रयास करेंगे।


    ज्ञात रहे कि 11 मार्च, 2015 को श्रीराम आधार फाऊण्डेशन एनजीओ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र द्विवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उत्तम नगर के डाकिये के विरूद्ध कार्यवाही करने के लिये पत्र दिया था लेकिन डाकिये द्वारा अपनी गलती स्वीकारने व भविष्य में ऐसी गलती न करने का वायदा करने पर द्विवेदी ने डाक विभाग के उच्च अधिकारी को उस डाकिये के प्रति कोई कार्यवाही न करने का 19 मार्च, 2015 को पत्र लिखा।


     रविन्द्र द्विवेदी ने अपने पत्र में लिखा कि कोई मनुष्य इस संसार में पूर्ण नही होता उसमें एकाक परिस्थितियों वश छोटी सी छोटी भूल हो जाती हैं। डाककर्मी  बीट नं0 18 के डाकिये  पर कोई ऐसी कार्यवाही न किया जाये कि उनके परिवार के सामने जीविका की समस्या उत्पन्न हो, उस डाकिये ने  वायदा किया है कि उनके अधीन जितने लोगों के राशन कार्ड है दे दिया है व भविष्य में जिनते लोगों के राशन कार्ड आये ही नही हैं आने पर उन्हें तुरंत दे देगा।


    अपने पत्र में रविन्द्र द्विवेदी ने लिखा कि डाक विभाग डाक बाटने वाले कर्मचारियों पर यह दबाव अवश्य बनाये कि वे राशन कार्ड जनता को देने में शीघ्रता करें व किसी प्रधान  या नेता के यहां बोरी के बोरी राशन कार्ड मत दें। वर्ना उसे भविष्य में तमाम तरह के संकट का सामना करना पड़ सकता है।


    बातों-बातों में रविन्‍द्र द्विवेदी ने यह भी  बताया कि भविष्य में इस तरह की उपरोक्त गलतियों की पुनरावृत्ति होती है तो उनके पुनः शिकायत करने व विभागीय कार्यवाही करवाने का विकल्प खुला रहेगा।