संसद में राजस्‍थान

  • 2015-03-20 04:14:37.0
  • उगता भारत ब्यूरो
संसद में राजस्‍थान

वन अभयारण्य क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के नागरिकों को भी मिले पानी, बिजली, सडक आदि मूलभूत सुविधाएं

नई दिल्ली, 19 मार्च, 2015। कोटा-बूंदी सांसद श्री ओम बिरला ने आज संसद में शून्यकाल के दौरान वन अभयारण्य क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के नागरिकों को अतिआवश्‍यक मूलभूत सुविधाएं यथा पानी, बिजली, सडक, कृशि अधिकार आदि देने का आग्रह किया।श्री बिरला कहा कि मानसून  को संसद सत्र के दौरान नियम 377 के अन्तर्गत भी इस समस्या को संज्ञान में लाया गया था।


श्री ओम बिरला ने बताया कि राजस्थान व कोटा संभाग के अभयारण्य और वन क्षेत्रों मे आजादी से पहले व बाद में 50 सालों से लोग रह रहे है। लेकिन 50 सालों के बाद भी अभी तक ग्रामीण आवष्यक मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। वहां ना सडकें हैं, ना अस्पताल है। ना बिजली-पानी है और ना ही विद्यालय। बच्चे षिक्षा तक प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। यहां तक कि किसानों की भूमि के पट्टे तक उनके पास नहीं है। अभयारण्य में रहने वाली ग्रामीण जनता को मुष्किल की जिंदगी गुजारनी पड रही है।


श्री ओम बिरला ने कहा कि आज राज्यों व देश का विकास हो रहा है लेकिन फिर भी ये क्षेत्र उपेक्षित हैं। कई क्षेत्र एक बडी ग्रामीण आबादी के बाद भी वन अभयारण्य क्षेत्र घोषित किए गए हैं। मेरे लोकसभा के कई ऐसे गांव हैं जहां पर ग्रामीणों का पुनर्वास किया तथा पुनः उनकी भूमि को वन-अभयारण्य क्षेत्र में ले लिया गया और एक बार फिर उनके पुनर्वास करने की कार्यवाई की जा रही है।


श्री ओम बिरला ने कहा कि राजस्थान के बूंदी क्षेत्र में वन विभाग द्वारा राज्य सरकार की अधिसूचना क्रमांक 79, दिनांक 20 जून 1982 के आधार पर वन्य जीव अभयारण्य रामगढ की सीमा के अंतर्गत बंूदी षहर का लगभग तीन चौथाई हिस्सा मानते हुए समस्त निर्माण कार्य, रजिस्ट्री, बैंक ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड आदि सभी सुविधाआंे पर रोक लगा दी गई तथा वर्श 2011 में उक्त अधिसूचना के आधार पर सारे प्रतिबंध लागू कर दिये गए है।


श्री ओम बिरला ने कहा कि बंूदी षहर का अधिकांष क्षेत्र उक्त अधिसूचना से पूर्व तथा सदियों से आबाद है। अभयारण्य क्षेत्र घोशित होने के कारण वहां ना तो अस्पताल खुल पा रहे हैं ना ही स्कूल और ना ही पीने के पानी की व्यवस्था ही हो पा रही है। किसी भी प्रकार का विकास कार्य जैसे सडक-निर्माण, बिजली आपूर्ति के नए कनेक्षन, कृशि भूमि का नामान्तरण, कृशि खातों पर केसीसी, पेयजल उपलब्धता के लिए पाईपलाईन व ट्यूबवेल खोदने जैसे समस्त कार्य ढप्प है।


श्री ओम बिरला ने निवेदन करते हुए कहा कि कि केन्द्र सरकार शीघ्र राज्य सरकारों से बात करके ऐसे अभयारण्य क्षेत्रों को चिन्हित करे जहां पर लोग अभी तक भी नारकीय जिंदगी जी रहे है और मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। श्री बिरला ने कहा कि सरकार कानून बनाकर निष्चित समयावधि से ज्यादा समय से रह रहे ग्रामीणों को पट्टे देकर खेती के मूल अधिकार दे। ग्रामीणों को उनकी भूमि से वंचित न किया जाए।जब तक पुनर्वास संभव ना हो तब तक जीवन के लिए अतिआवष्यक मूलभूत सुविधाऐं यथा पानी, बिजली, सडक, कृशि अधिकार आदि से वंचित ना किया जाए। उन्हें सभी कानूनी अधिकार दिए जाए। अभयारण्य क्षेत्रों के गांवों में रहने वाले ग्रामीणों के कारण ही वहां जंगल बचे हुए हैं।


श्री ओम बिरला के साथ राजस्थान के श्री सीपी जोशी, श्री अर्जुन लाल मीणा, श्री मनोज राजौरिया, श्री मानषंकर निनामा, श्री गजेन्द्र सिंह षेखावत, श्री हरिओम सिंह राठौड, श्री हरीष चन्द्र मीणा, स्वामी श्री सुमेधानन्द सरस्वती, महंत श्री चांदनाथ सहित अन्य सांसदों ने भी मिलकर इस समस्या के षीघ्र समाधान की मांग की।



सहकारी समितियों में गोदाम निर्माण एवं मरम्मत के लिए शतप्रतिशत सब्सिडी बहाल की जावें


नई दिल्ली, 19 मार्च, 2015। अलवर के सांसद महंत चांदनाथ योगी ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान सहकारी समितियों के हितों का मुद्दा उठाते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्राी से आग्रह किया कि सहकारी समितियों की कमजोर वित्तीय स्थिति को देखते हुए गोदामों का निर्माण मरम्मत एवं पुनः निर्माण के लिए पूर्व की तरह शतप्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जावें।

श्री योगी ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आर.के.वी.वाई) के अन्तर्गत सहकारी समितियों में गोदामों का निर्माण, पुनः निर्माण एवं उनकी मरम्मत के लिए प्रोजेक्ट लागत का शतप्रतिशत यानि की पूरा खर्चा सब्सिडी के तौर पर मिलता था लेकिन वर्तमान में आर.के.वी.वाई के 2014 में जारी किए गए निर्देशो अनुसार प्रोजेक्ट लागत का सिर्फ 25 प्रतिशत ही दिया जाने का प्रावधान है। इसमें जल्द ही बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए श्री योगी ने कहा कि इससे गोदामों के कार्य को गति मिलेगी।