21 मार्च 2015 के दिन से नव सम्वत्सर प्रारम्भ होगा.

  • 2015-03-18 05:33:24.0
  • उगता भारत ब्यूरो
21 मार्च 2015 के दिन से नव सम्वत्सर प्रारम्भ होगा.

पं0 राजेश शर्मा


शुभ मुहूर्त में घट स्थापना समय


21 मार्च 2015 के दिन से नव सम्वत्सर प्रारम्भ होगा. साथ ही इस दिन से चैत्र शुक्ल पक्ष का पहला नवरात्रा होने के कारण इस दिन कलश स्थापना भी की जायेगी. नवरात्रे के नौ दिनों में माता के नौ रुपों की पूजा करने का विशेष विधि विधान है. साथ ही इन दिनों में जप-पाठ, व्रत- अनुष्ठान, यज्ञ-दानादि शुभ कार्य करने से व्यक्ति को पुन्य फलों की प्राप्ति होती है. इस वर्ष में ये नवरात्रे 28 मार्च 2015 तक रहेगें.

सर्वप्रथम श्री गणेश का पूजन

प्रतिपदा तिथि के दिन नवरात्रे पूजा शुरु करने से पहले कलश स्थापना जिसे घट स्थापना के नाम से भी जाना जाता है. हिन्दू धर्म में देवी पूजन का विशेष महात्मय है. इसमें नौ दिनों तक व्रत-उपवास कर, नवें दिन दस वर्ष की कन्याओं का पूजन और उन्हें भोजन कराया जाता है.

शुभ मुहूर्त में घट स्थापना

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शनिवार दिनांक  21 मार्च 2015 ई.को बसंत नवरात्रा प्रारम्भ हो रहा है। घट स्थापना देवी का आह्वान के लिए देवी पुराण व तिथि तत्व में प्रातः काल का समय ही श्रेष्ठ माना गया है। अतः इस प्रातः काल में दिवस्वभाव लग्न में घट स्थापना करनी चाहिए। इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शनिवार को सूर्य उदय 06 -34 बजे होगा और दिवस्वभाव मीन लग्न 07-44 बजे तक रहेगा। अतः प्रातः 06-34 बजे से 07-44 बजे तक घट स्थापना करके नवरात्रा प्रारम्भ करने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 -10 से 12 -58 तक भी घट स्थापना की जा सकती है। चौघडिये के हिसाब से घट स्थापना करने वाले दिन के 08 -04 से 09 -00 बजे तक शुभ के चौघडिये में तथा दोपहर 12 -34 से सांय 05-04 बजे तक चर लाभ अमृत के चौघडिये में भी घट स्थापना कर सकते है। इस दिन मिट्टी के बर्तन में रेत-मिट्टी डालकर जौ-गेहूं आदि बीज डालकर बोने के लिये रखे जाते है.

भक्त जन इस दिन व्रत-उपवास तथा यज्ञ आदि का संकल्प लेकर माता की पूजा प्रारम्भ करते है. नवरात्रे के पहले दिन माता के शैलपुत्री रुप की पूजा की जाती है. जैसा की सर्वविदित है, माता शैलपुत्री, हिमालय राज जी पुत्री है, जिन्हें देवी पार्वती के नाम से भी जाना जाता है. नवरात्रों में माता को प्रसन्न करने के लिये उपवास रखे जाते है. तथा रात्रि में माता दुर्गा के नाम का पाठ किया जाता है. इन नौ दिनों में रात्रि में जागरण करने से भी विशेष शुभ फल प्राप्त होते है.