संसद में राजस्थान

  • 2015-03-14 07:47:21.0
  • उगता भारत ब्यूरो
संसद में राजस्थान

सांसद श्री रामचरण बोहरा ने जयपुर रेलवे स्टेशन को

‘ए’ श्रेणी में क्रमोन्नत करने का सुझाव दिया


नई दिल्ली, 13 मार्च, 2015।

जयपुर के सांसद श्री रामचरण बोहरा ने गुलाबी नगर जयपुर के रेलवे स्टेशन को ‘ए’ श्रेणी में क्रमोन्नत कर पूर्व में की गई घोषणा के अनुसार विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन बनाने का आग्रह किया है।

लोकसभा में रेल बजट पर चर्चा मंे भाग लेते हुए श्री बोहरा ने कहा कि राजस्थान की राजधानी जयपुर गुलाबी नगरी के नाम से प्रसिद्ध है। भारत में आने वाला प्रत्येक विदेशी पर्यटक जयपुर अवश्य आता है। विदेशी सैलानी जयपुर के बिना अपनी यात्रा को अधूरा मानते हैं। इसलिए पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जयपुर रेलवे स्टेशन का नवीनीकरण कर विश्वस्तरीय, यानि ‘ए’ ग्रेड रेल्वे स्टेशन बनाया जाए।

उन्होंने रेल मंत्राी की इस योजना का कि रेल मुख्य स्टेशनों पर दबाव कम करने के लिए उपनगरीय रेलवे स्टेशन बनाने का स्वागत किया और कहा कि जयपुर से दिल्ली आने-जाने के लिए गांधी नगर पहला रेलवे स्टेशन है। जयपुर से मुंबई जाने के लिए दुर्गापुरा पहला रेलवे स्टेशन है।


 

चित्तौड़गढ़ सांसद ने रोजड़े को नील गाय परिभाषित करने के

कानून में संशोधन करने का सुझाव दिया

नई दिल्ली, 13 मार्च, 2015।

चित्तौड़गढ़ के सांसद श्री सी.पी.जोशी ने शुन्य काल के दौरान किसानो से जुड़े हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर बोलते हुए कहा कि देश के काश्तकार रोजड़ों की समस्या से त्रास्त है एवं यह पशु खड़ी फसलों को चौपट कर देता है। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में संशोधन कर ‘रोजड़े’ की ‘नील गाय’  परिभाषा को बदलने की मांग रखी। उन्होंने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 म¬ रोजड़ों को नील गाय के नाम से परिभाषित किया है, यह कानून बनाने वालों की गम्भीर भूल है जिसका सुधार शीघ्रताशीघ्र अपेक्षित है। वस्तुतः यह ‘‘गाय’’ नह° है यह गाय की तरह गोबर नह° देती है बल्कि म°गणी करती है। गाय फुदक नह° सकती है, रोजड़े पांच-छः फीट तक की चौड़ी खाई को फलांग जाते ह®। गाय की व रोजड़े की कद-काठी खुर सभी म¬ अंतर है। गाय की अपेक्षा इसकी प्रजनन क्षमता अधिक है, गाय जहां दो वर्ष म¬ एक बछड़ा देती है उसके ठीक विपरित रोजड़ा वर्ष म¬ दो बार बच्चे देता है। वास्तव म¬ देखा जाये तो यह हिरण, चीतल, सांभर की तरह छलांग लगाता है व उनसे इसके खुर मिलते है। ये पशु झूण्ड म¬ रहती है और खड़ी फसलों पर हमला करते ह® जितना खाते नह° उसका दुगूना फसलों को नष्ट कर देते ह® और यदि कृषक फसलों को बचाने का प्रयास कर¬ तो ये हिंसक बन मनुष्यों पर हमला कर देते ह®।जंगल कम होते जा रहे ह®। घने जंगल तो अब नाम लेने को भी नह° बचे है। शेर, सिंह, चीता, बाघ जो इनका भक्षण कर प्रकृति म¬ संतुलन बनाये हुए थे वे अब लुप्त हो गये ह® इस कारण रोजड़ों ने अब अपना मुख गावों की ओर कर लिया है एवं इस जमाने म¬ जब खाद, बीज, बिजली, डीजल, मजदूरी सभी महंगे ह®, ऐसे म¬ अब इन रोजड़ों का उत्पात बूते के बाहर हो गया है।

सांसद जोशी ने किसानो कि इस समस्या के निराकरण हेतू र्वतमान कानून म¬ आवश्यक संशोधन करने कि आवश्यकता पर बल देते हुए मांग कि कि र्सवप्रथम इस पशु को चौथी सूची से निकाल कर सूची पांच म¬ कर दी जाव¬ जिनम¬ फसलों को नष्ट व हानि पहुंचाने वाले अन्य पशुओं का उल्लेख है, सांसद जोशी ने केन्द्रीय कृषि मंत्राी एवं केन्द्रीय कानून मंत्राी इस संबंध म¬ यथाशीघ्र कानून म¬ संसोधन करने कि मांग करते हुए कहा कि इस समस्या से किसानो को तत्काल राहत मिले इस दृष्टि काश्तकारों के खेतों के ब्लॉक बनाकर उनकी बाउण्ड्रीवाल सरकार द्वारा बनाई जावे तथा जंगलात की जो बाउण्ड्रीवाल बनाई जा रही है उसकी ऊंचाई सात से आठ फीट रखी जाव¬। साथ ही साथ सांसद जोशी ने यह भी कहा कि जब तक सरकार इस हिंसक पशु को नियंत्राण में नह° रखा जाएगा तब तक कृषकों को फसल के नष्ट होने से नही बचाया जा सकेगा। उन्होंने रोजडो से फसलों को होने वाले नुकसान का मुआवजा दिलवाने की मांग भी रखी और कहा कि जिस प्रकार खाद ,डीजल पर सब्सिडी सरकार देती है उसी प्रकार खेतों में बाउण्ड्रीवाल बनाने के कार्य को मनरेगा के साथ जोड़कर छूट प्रदान की जावे।

सांसद श्री जोशी ने बताया कि रोजड़ा विशेषकर अफीम की खेती पर आक्रमण करते ह®। एक बार किसी रोजड़े ने अफीम का एक डोडा भी खा लिया तो वह इसके नशे का आदी हो जाता है और उसके बाद अफीम के  उस पूरे खेत को ही नष्ट करने पर उतारु हो जाता है। चार काश्तकार मिलकर भी एक रोजड़े को नियंत्राण नह° कर सकते है। उसे हटाने की कोशिश कर¬ तो रोजड़ा हिंसक बन जाता है। बिचारा काश्तकार न तो अपनी व्यथा को प्रकट कर पाता है न वह अफीम विभाग को इस नुकसान का स्पष्टीकरण ही देने म¬ सक्षम होता है।

सांसद जोशी ने इस समस्या को प्राकृतिक आपदा मानकर कृषकों को मुआवजा दिलवाए जाने की मांग की और कहा कि कृषक द्वारा शिकायत होने पर तहसीलदार पटवारी व सरपंच के शामलात से मौका पर्चा बनाय¬ एवं अंतिम मुआवजा तय होने के पहले अंतरिम यानि फौरी मुआवजा तत्काल दिया जावे।

सांसद जोशी ने बताया कि आजकल यह सामान्य सी घटना हो गई है कि रोजड़े नेशनल हाइवे पर भी आ जाते ह® जिसके कारण आये दिन दुर्घटना होती ह® जिसके कारण कारों व मोटर साइकिल वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते ह®। इस कारण वाहन मालिकों को भी उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

सांसद जोशी ने सुझाव देते हुए कहा कि रोजड़ो की समस्या का हल इनका बंध्याकरण करना है, ताकि इनकी संख्या को सीमित किया जा सकें।

सांसद जोशी ने कहा जहां तक कानून का संबंध है, वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 2(36) म¬ वन्यजीव की व्याख्या म¬ उन जीवों की गणना की जा सकती है जिनका उल्लेख शिड्यूल एक, दो, तीन क्रमांक(14) म¬ है जिससे नील गाय यानि रोजड़ा वन्य जीव की परिभाषा म¬ आ जाता है।

इस शिड्यूल म¬ उल्लेखित जीवों पर अधिनियम की धारा 2,8,9,11 और 61 लागू होती है। धारा 8 म¬ वन्य जीव परार्मश मण्डल के र्कतव्यों को परिभाषित किया जाता है। धारा 8 (सी) जो अनुसार परार्मश मण्डल को किसी भी वन्य जीव को एक शिड्यूल से अन्य शिड्यूल म¬ स्थानान्तरण करने का परार्मश दिया जा सकता है। यह निखववाद है जो कि रोजड़े यानि नील गाय मनुष्य पर हिंसक आक्रमण भी करने लगी है तथा सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने लगी है तथा खड़ी फसलों को नष्ट भ्रष्ट करने लगे ह® जिससे इन्ह¬ शिड्यूल चार से विलग कर शिड्यूल पांच जिनम¬ पीड़क जन्तुओं का (वखमन) उल्लेख है ट्रान्सफर किया जाना न्यायोचित होगा। धारा 11 (बी) के प्रावधान भी इस पर लागू कर दिये जाने चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि केन्द्र सरकार दोनों मिलकर धारा 61 से प्रदत्त अधिकारों का उपयोग कर नोटिफिकेशन निकाले, ताकि इस समस्या का भलीभांति समाधान हो सकें। उसी प्रकार राज्य सरकार और केंद्र सरकार को चाहिए कि जिस प्रकार हिमाचल प्रदेश की विधान सभा ने र्माच 2010 म¬ नील गाय को हिंसक पशु घोषित करने व उसे शिड्यूल पांच म¬ स्थानान्तरित करने का प्रस्ताव लिया गया, उसी प्रकार केंद्र सरकार  सदन म¬ प्रस्ताव पारित कराय¬ ताकि शिकायत होने पर वह विभाग के कर्मचारी इनको गोली मार सके तथा व्यक्तियों को भी इनकों मारने की इजाजत दे सके।


अलवर सांसद महंत श्री चांदनाथ द्वारा 

नई विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर 

गौवध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का दिया सुझाव


नई दिल्ली, 13 मार्च, 2015।

अलवर के सांसद महंत चांदनाथ योगी ने लोकसभा में सुझाव दिया कि नई विदेश व्यापार नीति में संशोधन करवा गाय एवं भैंस के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए एवं इस जघंय हिंसा व्यापार को बंद किया जाना चाहिए तथा उनके स्थान पर पशुओं की नस्ल वृद्धि व दुग्ध उत्पादन वृद्धि हेतु बड़े पशुपालन फार्म बनाए जाने चाहिए। साथ ही उनकी नस्ल सुधार के लिए योजनाबद्ध कार्य किये जाने चाहिए।

उन्होंने विदेश व्यापार नीति में मांस निर्यात व उस पर दी जाने वाली सब्सिडी को रोकने का अनुरोघ भी किया। उन्होेंने बताया कि हमारे देश में चारा भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। पंजाब, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान व उत्तर प्रदेश में किसानों के पास भंडारण क्षमता न होने के कारण चारे को खेतों में जला दिया जाता है या अन्य प्रकार से नष्ट कर दिया जाता है।

श्री योगी ने बताया कि देश की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए दुधारू पशुओं जैसे गाय, भैंस, भेड़-बकरी, उॅंट, आदि का मांस निर्यात पूर्णतः नकारा पशुओं की आड़ में दुधारू पशुओं का भी वध किया जाता है। जिसे रोका जाना चाहिए और कानून का भी सख्ती से पालन करवाया जाना चाहिए।