सांसद ओम बिरला ने की वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर जी से मुलाकात

  • 2015-03-05 04:16:09.0
  • उगता भारत ब्यूरो
सांसद ओम बिरला ने की वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर जी से मुलाकात

 राजस्थान के बूंदी जिले के रामगढ अभयारण्य क्षेत्र के ग्रामीणों को मिले जीवन के लिए अतिआवश्यक मूलभूत पानी, बिजली, सडक, कृषि केअधिकार।


4, मार्च,2015। सांसद ओम बिरला ने केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर जी से मिलकर राजस्थान के बूंदी क्षेत्र के रामगढ अभयारण्य क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के नागरिकों को अतिआवश्‍यक मूलभूत सुविधाऐं यथा पानी, बिजली, सडक, कृशि अधिकार आदि देने का आग्रह किया।


        श्री बिरला ने माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देते हुए कहा कि आप द्वारा निर्देषित करने के बाद केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एक टीम ने उक्त क्षेत्र का दौरा करके वास्तविक हालातों का जायजा लिया है। इस हेतु मैं आपका अत्यन्त आभारी हूँ।


        श्री बिरला कहा कि दिनांक 15.07.2015 को संसद सत्र के दौरान नियम 377 के अन्तर्गत आपके  संज्ञान में लाया गया था कि बंूदी षहर मंे वन विभाग द्वारा राज्य सरकार की अधिसूचना क्रमांक 79, दिनांक 20 जून 1982 के आधार पर वन्य जीव अभयारण्य रामगढ की सीमा के अंतर्गत बंूदी षहर का लगभग तीन चैथाई हिस्सा मानते हुए समस्त निर्माण कार्य, रजिस्ट्री, बैंक ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड आदि सभी सुविधाओं पर रोक लगा दी गई तथा वर्ष 2011 में उक्त अधिसूचना के आधार पर सारे प्रतिबंध लागू कर दिये गए है।


        श्री बिरला ने कहा कि बंूदी षहर का अधिकांश क्षेत्र उक्त अधिसूचना से पूर्व तथा सदियों से आबाद है, जिसको वन अभयारण्य से मुक्त करने हेतु तत्कालीन जिला कलेक्टर ने भी वन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त सर्वे रिपोर्ट सहित अनुषंसा की है।


        श्री बिरला ने उक्त विषय से संबंधित अब तक की प्रगति का तत्थ्यात्मक विवरण भी माननीय मंत्री जी के समक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि उल्लेखित समस्या के कारण बूंदी क्षेत्र का सामान्य जनजीवन सहित समस्त आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही है। अभयारण्य क्षेत्र घोष्‍िात  होने के कारण वहां किसी भी प्रकार का विकास कार्य जैसे सडक-निर्माण, बिजली आपूर्ति के नए कनेक्षन, कृशि भूमि का नामान्तरण, कृषि खातों पर केसीसी, पेयजल उपलब्धता के लिए पाईपलाईन व ट्यूबवेल खोदने जैसे समस्त कार्य ढप्प है। फलस्वरूप शहर में बसी 1 लाख 50 हजार की आबादी तथा शहर से बाहर अभयारण्य में शामिल 44 गांवों की 30 हजार आबादी सीधे-सीधे प्रभावित हो रही है। श्री बिरला ने कहा कि मंत्रालय की एम्पावर्ड कमेटी द्वारा प्रभावित क्षेत्र के दौरे की रिपोर्ट मंत्रालय में विचाराधीन है।


        श्री बिरला ने निवेदन किया कि रामगढ अभयारण्य क्षेत्र में सम्मिलित उक्त शहरी और ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के संबंध में यथाषीघ्र निर्णय लिया जाना आवश्‍क है। जो-जो ग्रामीण क्षेत्र उक्त अभयारण्य से मुक्त नहीं किए जा सकते उनका उचित स्थान पर पुनर्वास किया जाए तथा जब तक पुनर्वास संभव ना हो तब तक जीवन के लिए अतिआवष्यक मूलभूत सुविधाऐं यथा पानी, बिजली, सडक, कृशि अधिकार आदि से वंचित ना किया जाए, ऐसी व्यवस्था उपलब्ध कराना आवश्‍यक एवं न्यायोचित है।