संसद में राजस्थान

  • 2015-02-28 01:50:28.0
  • उगता भारत ब्यूरो
संसद में राजस्थान


सांसद डॉ. मनोज राजोरिया ने किया रेल बजट धौलपुर-सरमथुरा-करौली -गंगापुर रेल लाईन के 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने के लिए आभार 


नई दिल्ली, 27  फरवरी, 2015। धौलपुर के सांसद डॉ. मनोज राजोरिया ने केन्द्रीय रेल मंत्राी श्री सुरेश प्रभु का रेल बजट में राजस्थान करौली-धौलपुर को जोड़ने वाली प्रस्तावित रेल लाईन धौलपुर-सरमथुरा-करौली -गंगापुर (146 किमी.) रेल लाईन की कार्यगति को बढ़ाने हेतु पिछले बजट की तुलना में 10 करोड़ रुपये की अधिक राशि स्वीकृत करने के लिए आभार व्यक्त किया है।

सांसद डॉ. मनोज राजोरिया ने पिछले माह ही इस बारे में रेल बजट में अधिक से अधिक बजट आवंटन का अनुरोध किया था। रेल मंत्राी ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए पिछले बजट की तुलना में लगभग 3.5 गुना करके  (35 करोड़ रुपये) की राशि स्वीकृत की है ।

सांसद ने रेल बजट में रेल यात्रा में कोई किराया नही बढ़ाने,यात्राी सुविधायें बढ़ाने जैसे - स्वच्छ रेल, आधुनिक रेल शौचालय, ऑनलाईन बुकिंग, यात्रीयों की मदद के लिए  हेल्प लाईन नं. 138 एवं टोल फ्री नं. 182, महिलाओं की सुरक्षा के लिए  टोल फ्री नं. 182, अनारक्षित सीटों के टिकट  5 मिनट में प्राप्त करने के लिए की गई सुविधा, रेल्वे स्टेषनों का अपग्रेडिंग, रेल में मनचाहा भोजन प्राप्त करने के लिए ऑनलाईन ई-केटरिंग सुविधा, स्वच्छ जल की सुविधा, बुजुर्ग एवं बीमार व्यक्ति के लिए ऑनलाईन व्हीलचेयर आदि घोषणाओं का स्वागत किया है।


सांसद श्री पी.पी. चौधरी ने रेल बजट को बताया वास्तविकता का बजट

बिलाड़ा से बर के लिए नई रेल लाईन बिछाने की मांग की

नई दिल्ली, 27  फरवरी, 2015। पाली सांसद श्री पी.पी. चौधरी ने रेल मंत्राी सुरेश प्रभु द्वारा पेश किये गए बजट को वास्तविकता वाला बजट बताते हुए कहा कि इस रेल बजट में नई रेलवे लाईने बिछाने व नई रेलों को चलाये जाने आद कोई भी लोक लुभावनी घोषणाए नहीं की गई है।

श्री चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्राी श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृृष्टि के अनुसार रेल मंत्रालय के क्षेत्रा में आगामी 5 वर्षों में 8.5 लाख करोड़ का निवेश किया जाएगा।  जिसके फलस्वरूप यात्रियों की संख्या 30 मिलियन हो जाएगी जो वर्तमान में 21 मिलियन है, ट्रैक की लम्बाई 20 प्रतिशत 1,38,000 कि.मी तक बढ़ाई जा सकेगी जो वर्तमान में 1,14,000 कि.मी. है। इसके अतिरिक्त इस वर्ष के बजट में 970 ओवर/अण्डर ब्रिजों व 3438 रेलवे क्रोसिंगों के लिए 6581 करोड़ रू स्वीकृत किये गए है, जो कि पिछले वर्ष से 2600 प्रतिशत अधिक है।

सांसद श्री चौधरी ने वर्ष 1997 में तत्कालीन रेल मंत्राी श्री रामविलास पासवान द्वारा जोधपुर जिले की बिलाड़ा से बर नई रेल लाईन की घोषणा की ओर आकर्षित करते हुए बताया कि उक्त योजना का शिलान्यास किया जा चुका है, लेकिन कार्य अभी तक प्रारम्भ नहीं हो सका। बिलाड़ा से बर की दूरी केवल 40 कि.मी. मात्रा है, यदि इन दोनों को रेलवे लाईन से जोड़ दिया जाता है तो हजारों की संख्या में लोगों को रेल सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा व जोधपुर-जयपुर-दिल्ली की दूरी भी बहुत कम होगी तथा जोधपुर से अजमेर को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।


विकासोन्मुखी है रेल बजट- चित्तौड़गढ़ सांसद श्री जोशी


नई दिल्ली, 27  फरवरी, 2015। चित्तौड़गढ़ सांसद श्री सी पी जोशी ने केन्द्रीय रेल बजट को विकासोन्मुखी एवं  बिना किराया बढाये हुए रेल्वे सुविधाओं के विकास के लिए संकल्पित बजट बताया है। श्री जोशी ने कहा कि लोक लुभावन घोषणाएं ना करके ठोस बजट पेश करना सरकार की विकासोन्मुखी सोच को प्रदर्शित करता है। रेल बजट 2015 में चित्तौड़गढ़ लोकसभा क्षेत्र को कई सौगातें मिली है।

 सांसद श्री जोशी ने चित्तौड़गढ़ क्षेत्रा को मिली सौगातों के बारे में बताते हुए कहा कि चंदेरिया में ओवरब्रिज निर्माण हेतु 5 करोड प्रारम्भिक बजट स्वीकृत किए एवं  निम्बाहेड़ा में अंडर पास के लिए की 5 करोड स्वीकृति हुई है। इसी प्रकार मावली से बड़ीसादड़ी आमान परिवर्तन के सर्वे के लिए वित्तीय स्वीकृति करते हुए  प्रारम्भिक बजट 10 लाख स्वीकृत हुई है।

 प्रतापगढ़ को भी रेल सुविधाओं से जोड़ने के लिए प्रतापगढ़ से मंदसौर रेल लाईन के सर्वे के लिए वित्तीय स्वीकृति मिली है। नीमच से कोटा के बीच नई रेल लाईन के सर्वे के भी स्वीकृति हुई है। अजमेर (नसीराबाद)सवाई माधेपुर मार्ग कि स्वीकृृति हुई यह मार्ग दिल्ली -अहमदाबाद मार्ग पर  चित्तौड़गढ़ और सवाई माधोपुर के बीच एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी इस कार्य के लिए 10 लाख के परिव्यय के साथ 87,371.00 लाख की अनुमानित लागत पर प्रारंभ करने का प्रस्ताव किया है इस परियोजना कि स्वीकृत लागत 436 करोड 85 लाख  50 हजार है। अजमेर -चित्तौडगढ उदयपुर मार्ग के लिए स्वीकृत लागत 498 करोड 21 लाख  69 हजार के कार्य को स्वीकृत किया है एवं इस परियोजना पर 10 करोड की स्वीकृति हुई है। चित्तौड़गढ़ लोकसभा क्षेत्रा के सभी रेल स्टेशनों पर रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रावधान किया गया है।

सांसद श्री जोशी ने केन्द्रीय रेल बजट में यात्रियों की सुविधाअेां के लिए होने वाले सभी परिवर्तनों पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा के सरकार ने यात्रियों की सुविधाअेां के लिए ट्रेनों में गर्भवती एवं बुजुर्गो के लिए लोवर बर्थ का प्रावधान, आरक्षण दो की बजाय चार माह पूर्व संभव होना, सफाई व्यवस्था के लिए अलग विभाग की घोषणा, यात्रियों के लिए ट्रेन समय का एसएमएस अलर्ट, चार सौ स्टेशनों को वाई फाई से जोड़ना, शिकायतों एवं सुरक्षा के लिए हेल्प लाईन प्रारंभ करना, स्मार्ट फोन से अनारक्षित टिकट बुक करना, सत्रह हजार से अधिक बायो शौचायल बनाना, बिना गार्ड वाली फाटक पर अलार्म की सुविधा, लोकप्रिय ट्रेनों मे सामान्य व अन्य श्रेणी के कोचों को बढ़ाना, क्षेत्राीय भाषाओं में टिकट की सुविधा उपलब्ध कराना, मंडल स्तर पर संसद सदस्य की अध्यक्षता में समिति बनाने का प्रस्ताव, महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला कोच में सीसीटीवी केमरे लगाना, रेल्वे के आधारभूत ढाचे के लिए वित्त की व्यवस्था करना, सरकार ने रेल्वे से संबंधित अध्ययन के लिए चार स्थानो ंपर विश्वविद्यालय एवं बनारस हिन्दु विश्व विद्य़ालय में मदन मोहन मालवीय के नाम पर रिसर्च सेन्टर स्थापित करने की घोषणा प्रमुख है।

सांसद श्री जोशी ने रेल बजट में चित्तौड़गढ़ लोकसभा क्षेत्रा में की गई घोषणाओं पर प्रधानमंत्राी श्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्राी श्री सुरेश प्रभु, केन्द्रीय रेल राज्य मंत्राी श्री मनोज सिन्हा सहित का आभार प्रकट किया है।


बीकानेर सांसद ने लोकसभा में नियम 377 के तहत 

न्यायालयों में हिन्दी भाषा में बहस का उठाया मुद्दा

प्रधानमंत्राी से श्री नरेन्द्र मोदी भी की भेंट

नई दिल्ली, 27  फरवरी, 2015। बीकानेर सांसद श्री अर्जुन मेघवाल ने लोकसभा में नियम 377 के तहत न्यायालयों में हिन्दी भाषा में बहस का मुद्दा उठाया है।

सांसद श्री मेघवाल ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 348 में यह प्रावधान किया गया है कि जब तक संसद द्वारा कानून बना कर अन्यथा यह प्रावधान न किया जावे तब तक उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में सभी कार्यवाहियांॅ अंग्रेजी भाषा में होगी।

श्री मेघवाल ने बताया कि देश में कई ऐसे विधि महाविद्यालय तथा विश्वविद्यायलय हैं जहॉं हिन्दी मंे विधि के छात्रों को अध्ययन कराया जाता है। उत्तरी, पश्चिमी तथा मध्य भारत के अधिकांश  विधि छात्रों की भाषा का माध्यम हिन्दी ही होता है। ऐसी परिस्थिति में जब विधि के छात्रा वकील का व्यवसाय अपनाते हैं और उच्च न्यायालयों एवं उच्चतम न्यायालय में जब अपना वकील के रूप में पंजीकरण कराते हैं तो प्रैक्टिस में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है तथा प्रतिभाशाली वकील होने के बावजूद भी हीनभावना आ जाने के कारण मजबूरन निचली अदालतों में वकील का व्यवसाय करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

सांसद श्री मेघवाल ने इस सम्बन्ध में भारत के कानून मंत्राी से यह मांग की तथा कहा कि उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालयों में हिन्दी भाषा के माध्यम से विधि स्नातक वकीलों को हिन्दी में बहस करने की अनुमति मिलनी चाहिए। इससे बहुत बड़े वर्ग को लाभ प्राप्त हो सकता है। माननीय न्यायाधीश द्वारा फैसला अंग्रेजी में दिया जा सकता है और सुनाया जा सकता है, लेकिन अंग्रेजी में उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में बहस की बाध्यता को खत्म करना भारत के हिन्दी भाषी क्षेत्रों के लिए एक बहुत बड़ा लाभकारी कदम सिद्ध होगा।

  सांसद श्री मेघवाल ने इसके लिए  प्रधानमंत्राी श्री नरेन्द्र मोदी को भी पत्रा लिखा है तथा उनसे मिलकर इस विषय पर चर्चा की और बताया है कि यदि अनुच्छेद 348 में इस विषय के तहत संशोधन किया जाता है तो यह बहुत ही बड़ी उपलब्धि होगी।


सांसद श्री ओम बिरला ने संसद में देश में जल की कमी का मुद्दा उठाया 


नई दिल्ली, 27  फरवरी, 2015। कोटा-बूंदी सांसद श्री ओम बिरला ने देश  में सूखे और जल की कमी का सामना कर रहे राज्यों और इन राज्यों में सतही और भूजल उपलब्धता का मामला संसद में उठाया।

श्री ओम बिरला ने बताया कि कुछ राज्यों को पड़ोसी राज्यों से जल का अपना हिस्सा नहीं मिल पा रहा है। श्री बिरला ने पेयजल और सिंचाई प्रयोजनों के लिए अपनी जल सम्बंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा राजस्थान को अतिरिक्त सहायता प्रदान करने मांग की ।

श्री बिरला ने बताया कि जल संसाधन,नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्राी प्रो. सांवर लाल जाट ने प्रश्न के उत्तर में उल्लेख किया है कि भारत में लगभग 38.7 मिलियन हेक्टेयर (एमएचए) क्षेत्रा शुष्क भूमि है जिसमें गर्म एवं ठंडे शुष्क क्षेत्रा हैं। इसमें से सात एमएचए ठंडे  शुष्क जोन में हैं और 31.7 एमएचए गर्म शुष्क जोन में है। राजस्थान और गुजरात राज्यों में देश के कुल गर्म  शुष्क क्षेत्रा का क्रमशः 62 प्रतिशत और 19.6 प्रतिशत हिस्सा है जो कि जल की समस्या से ग्रस्त है। राजस्थान में शुष्क क्षेत्रा 19.6 एमएचए है और यह क्षेत्रा सिंधु बेसिन का भाग है इसलिए इसमें अनुमानित औसत वार्षिक सतही जल संसाधन 73.3 बिलियन घन मीटर (बीसीएम) है तथा निवल औसत भूजल उपलब्धता 10.83 बीसीएम है।

श्री बिरला ने बताया कि अन्तरराज्यीय नदियों और उनकी नदी घाटियों के जल सम्बंधित विवादों के न्याय निर्णयन के लिए संसद ने अन्तरराज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 अधिनियमित किया है। राज्य सरकारों द्वारा अन्तरराज्यीय नदी के जल के उपयोग, हिस्सेदारी तथा वितरण के सम्बंध में की गई शिकायतों के आधार पर सरकार ने इस अधिनियम के अंतर्गत राज्यों के बीच जल विवाद के निपटान के लिए अब तक आठ अधिकरण गठित किए गए हैं जिनमें से राजस्थान से सम्बंधित दो अधिकरण हैं- पहला नर्मदा जल विवाद अधिकरण और दूसरा रावी एवं व्यास जल विवाद अधिकरण। नर्मदा जल विवाद अधिकरण में राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल है तथा इस अधिकरण का गठन अक्टूबर 1969 में किया गया था। रावी एवं व्यास जल विवाद अधिकरण में पंजाब और हरियाणा शामिल हैं तथा इसका गठन अप्रैल 1986 में किया गया था।

श्री बिरला ने बताया कि नदी जल संरक्षण के लिए जल संसाधन परियोजनाओं और स्कीमों के लिए केन्द्र सरकार, राज्य सरकार के अनुरोध पर चालू बृहत्, मध्यम, लघु सिंचाई तथा कमान क्षेत्रा विकास परियोजनाओं को पूरा करने के लिए त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) के दिशा-निर्देशों के अनुसार एआईबीपी के अंतर्गत केन्द्रीय सहायता उपलब्ध कराती है। एआईबीपी के अंतर्गत अब तक राजस्थान को लगभग 2133 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता जारी की जा चुकी है।

श्री बिरला ने बताया कि जल निकायों की मरम्मत, नवीकरण एवं पुनरुद्धार सम्बंधी स्कीम के अंतर्गत राजस्थान को वर्ष 2011-12 के दौरान 16 जल निकायों को पूरा करने के लिए 7.07 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता जारी की गई थी और इनमें से 15 जल निकायों के कार्य पूरे कर लिए गए हैं तथा 1469.50 हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता पुनः प्राप्त की गई है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2014-15 के दौरान इस स्कीम के अंतर्गत राज्य के 32 जल निकायों को शामिल किया गया है। इन जल निकायों के लिए निधि जारी किया जाना राज्य सरकार से प्रस्ताव पर निर्भर करेगा। पेयजल स्कीमों के लिए राष्ट्रीय पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) के अंतर्गत राज्य की आवश्यकता, जारी की जा चुकी निधि के व्यय की स्थिति तथा राष्ट्रीय स्तर पर बचत की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए वित्तीय वर्ष के अंत में निधि जारी की जाती है।