मैत्रीपाल भारत से मैत्री बढ़ाएं

  • 2015-02-20 02:41:39.0
  • डॉ0 वेद प्रताप वैदिक
मैत्रीपाल भारत से मैत्री बढ़ाएं

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल श्रीसेन का भारत आना अपने आप में एक संदेश है। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली विदेश-यात्रा है। इस यात्रा के लिए उन्होंने भारत को चुनकर यह बता दिया है कि उनकी विदेश नीति की प्राथमिकताएं क्या हैं। उनके पूर्व राष्ट्रपति महिंद राजपक्ष ने भी पिछले 10 वर्षों में भारत को यथोचित महत्व देने की कोशिश की लेकिन हमें हमेशा यह लगता रहा कि वे चीन को जरुरत से ज्यादा महत्व दे रहे थे और चीन का डर दिखाकर भारत से फायदे दुहने की कोशिश कर रहे थे।


इसमें शक नहीं कि चीन ने अपनी शतरंज के पासे बहुत चतुराई से चले थे। उसने श्रीलंका में अपनी पूंजी जमकर लगानी शुरु कर दी थी, पूर्व राष्ट्रपति के निर्वाचन-क्षेत्र को मानो उसने गोद ही ले लिया था और सामुद्रिक रेशम पथ का नया शोशा छोड़कर वह श्रीलंका को अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और रणनीति का सक्रिय भागीदार बनाने के चक्कर में था। राष्ट्रपति राजपक्ष इसीलिए भारत के प्रति थोड़े उदासीन दिखाई पड़ रहे थे।


इस उदासीनता में भारत की तमिल-समस्या ने नए आयाम जोड़ दिए थे। तमिल उग्रवादियों को सफाया करने के बाद महिंद राजपक्ष अपने आपको विश्व-विजेताओं की श्रेणी में रखने लगे थे। श्रीलंका के पौराणिक सिंहली सम्राट दत्तगामिनी के साथ उनकी तुलना होने लगी थी। उन्होंने तमिलों पर हुए अत्याचार की जांच कराने में भी आनाकानी की। संयुक्तराष्ट्र को भी उन्होंने अंगूठा दिखा दिया। वे भारत की क्या सुनते? भारत की गठबंधन दब्बू सरकार को हमारे तमिलों ने भी जमकर दबा रखा था। राजपक्ष ने न तो श्रीलंकाई तमिलों को न्याय दिलवाया न ही सत्ता का विकेंद्रीकरण किया। संविधान का 13 वां संशोधन कागजों में ही लिखा रह गया।


अब जबकि मैत्रीपाल श्रीसेन, जो कि उनके ही एक मंत्री थे, राष्ट्रपति बन गए हैं, उनसे आशा की जाती है कि वे श्रीलंकाई तमिलों को न्याय दिलाएंगे। उनके चुनाव में तमिलों और मुस्लिम अल्पसंख्यकों ने विशेष भूमिका निभाई है। वे भारत के साथ भी व्यापार, विनियोग, रक्षा आदि क्षेत्रों में घनिष्टता बढ़ाएंगे। शांतिपूर्ण परमाणु सौदा तो उन्होंने कर ही लिया है। वे निष्ठावान बौद्ध हैं। वे इस बुद्ध के देश की जनता और श्रीलंकाई जनता के आपसी संबंधों को गहराइयां प्रदान करेंगे। चीन के साथ वे संबंध जरुर बढ़ाएं लेकिन भारत के साथ श्रीलंका का जो विशिष्ट संबंध है, उसे विरल न होने दें। मैत्रीपालजी भारत से मैत्री को बराबर पालते रहें।