अध्यादेश राज बनाम मां-बेटा राज?

  • 2015-01-21 04:14:34.0
  • डॉ0 वेद प्रताप वैदिक
अध्यादेश राज बनाम मां-बेटा राज?

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में से क्या निकला? सिर्फ एक ही संदेश निकला। वह यह कि नरेंद्र मोदी की सरकार की तानाशाही प्रवृत्ति, अध्यादेश राज और भाजपाइयों के उटपटांग बयानों की निंदा! सत्तारुढ़ दल की निंदा! इसके अलावा कांग्रेस का अपना कोई कार्यक्रम निकला क्या? बस यही कि सरकार के जमीन अधिग्रहण अध्यादेश का विरोध!


हम पहले लेते हैं, अध्यादेश राज को। सोनियाजी ने पूछा है, यह कैसी सरकार है? सात महिने में इसने दस अध्यादेश जारी कर दिए हैं? उन्होंने यह नहीं बताया कि सरकार ने ऐसा क्यों किया है? क्या विपक्षी दलों को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए? क्या विपक्षी दलों ने संसद को ठीक से काम करने दिया है? कभी उन्होंने संसद को हाफिज सईद के नाम पर बंद कर दिया, कभी घर-वापसी और कभी किसी साधु के बयान पर! क्या इसे ही जिम्मेदाराना राजनीति कहा जाता है? जिन कानूनों को विपक्ष ने अधर में लटकाया था, उनका भारत की अर्थ-व्यवस्था पर गहरा असर पड़ना था। अब अध्यादेशों के माध्यम से उन पर तुरंत अमल होगा। यह ठीक है कि कुछ अध्यादेशों में ऐसे प्रावधान भी हैं, जिन पर गंभीर और उचित आपत्तियां भी हो सकती हैं लेकिन उनका विवेचन तो तब होता जबकि उन पर संसद में बहस होती। जिसने बहस को टलवाया, वही अब आपत्तियों का रोना रोए तो उसकी कौन सुनेगा?


जहां तक तानाशाही प्रवृत्ति का प्रश्न है, भाजपा में उसका चलना असंभव-सा ही है लेकिन कांग्रेस का क्या हाल है? आप यह बताइए कि अध्यादेश राज बेहतर है या मां-बेटा राज? कांग्रेस में किसी की हिम्मत है कि इस मां-बेटा राज के खिलाफ मुंह भी खोले? कांग्रेस के प्रवक्ता कहते हैं कि पार्टी में ढांचागत परिवर्तन होंगे। कांग्रेस का सबसे बड़ा ढांचा तो मां-बेटा ही है। मां-बेटा ढांचा, जिसके नीचे कांग्रेस जैसी महान पार्टी दब गई है, क्या किसी ने इस खटारा ढांचे को तोड़ फेंकने का इशारा भी किया है? पदाधिकारियों की अवधि तीन साल करने वाले यह क्यों नहीं पूछते कि क्या मां-बेटा इस पार्टी पर 30 साल तक लदे रहेंगे? इन्हें इतनी भी लज्जा नहीं है कि वे इस्तीफे की इच्छा ही जाहिर कर देते। कार्यसमिति ने संगठन को सुधारने के लिए जो संकल्प किए हैं, वे ऐसे ही हैं, जैसे कि फिल्मी मेकअप होता है। क्या मेकअप के दम पर किसी बगुले को आप हंस बना सकते हैं? वर्तमान भारत को आज प्रबल प्रतिपक्ष की जरुरत है लेकिन कांग्रेस अब तक जहां पहुंच गई है, वहां से भी नीचे गुड़कने की मुद्रा में है।