पाक को अमेरिका की हरी झंडी

  • 2015-01-07 02:36:22.0
  • डॉ0 वेद प्रताप वैदिक
पाक को अमेरिका की हरी झंडी

अमेरिका की स्थिति बहुत हास्यास्पद बन गई है। एक ओर वह दुनिया में फैले आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की घोषणा करता है और दूसरी तरफ वह पाकिस्तान की आर्थिक मदद किए बिना नहीं रह सकता। पाकिस्तान की बढ़ती हुई आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए 2009 में अमेरिका ने कानून पास किया था। इस कानून को केरी-लुगार बिल कहते हैं। ये केरी कौन हैं? ये अमेरिका के विदेश मंत्री हैं। इन्होंने ही यह कानून बनाया था। इस कानून के तीन प्रमुख मुद्दे थे। यदि इन तीनों मुद्दों पर पाकिस्तान खरा न उतरे तो उसको हर साल मिलने वाली अमेरिका की 10 हजार करोड़ रु. की मदद रोक दी जानी चाहिए।


ये मुद्दे क्या हैं? एक तो आतंकी गिरोह को पाकिस्तान सरकार किसी भी प्रकार की सहायता न दे। दूसरा, अल-कायदा और उसके सहयोगी संगठन जैसे लश्करे-तय्यबा और जैशे-मोहम्मद को पाकिस्तान से खत्म करे और उन्हें पड़ौसी देशों में आतंक न फैलाने दें। तीसरा, आतंकवाद-विरोधी अभियान और मनी लाडिंªग की रोकथाम में सक्रिय सहयोग करे।


अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने इन तीनों मुद्दों पर पाकिस्तान को हरी झंडी दे दी है। वे शीघ्र ही पाकिस्तान जाने वाले हैं। इसके पहले कि भारत ओबामा पर दबाव डाले, अमेरिका ने उक्त घोषणा कर दी है। जाहिर है कि भारत सरकार इस घोषणा से नाराज़ होगी। उसका तर्क यह होगा कि अमेरिका कहता है एक बात और करता है, दूसरी बात। वह घुमा-फिराकर आतंकवाद को बढ़ावा ही देता है। उसकी दक्षिण एशिया नीति में धारावाहिकता है। पहले उसने काबुल की कम्युनिस्ट सरकारों के खिलाफ मुजाहिदीन खड़े किए। उन्हें हथियार और डालर दिए। उन्हीं में से तालिबान निकले। तालिबान को पाकिस्तानी फौज और आईएसआई ने आगे बढ़ाया और पाकिस्तान की सरकार और फौज की पीठ अमेरिका ठोकता है। अमेरिका और पाकिस्तानी फौज की सांठ-गांठ नहीं होती तो उसामा बिन लादेन कैसे मारा जाता? क्या उसका पुरस्कार पाकिस्तान को अमेरिका नहीं देगा? अमेरिका को इससे क्या मतलब है कि पाकिस्तानी तालिबान अफगानिस्तान और भारत को तंग करते हैं या नहीं?


इसके अलावा अमेरिका भारत सरकार को यह भी समझा सकता है कि पेशावर हत्याकांड के बाद पाकिस्तान सचमुच आतंकवाद को जड़-मूल से उखाड़ रहा है। इसलिए उसे प्रोत्साहित करना जरुरी है। यदि अमेरिका उसकी मदद इस समय बंद कर देगा तो उसका उत्साह ठंडा पड़ जाएगा। अमेरिका के इस तर्क में दम है लेकिन उसमें खुद इतना दम है या नहीं कि यदि इस साल सारे आतंकवादी संगठन खत्म न कर दिए जाएं तो अब अमेरिकी मदद की हरी झंडी की जगह वह लाल झंडी दिखा दे?