चीन ने चलाया अब बौद्ध हथियार

  • 2014-12-30 04:31:15.0
  • डॉ0 वेद प्रताप वैदिक
चीन ने चलाया अब बौद्ध हथियार

भारत का पश्चिमी सीमांत तो आतंकवाद से ग्रस्त है और पूर्वी सीमांत जासूसी से। पश्चिमी सीमांत पर जो लोग भारत को खोखला करने पर उतारु हैं, वे इस्लाम के नाम पर अपनी कारस्तानियां कर रहे हैं और अब पूर्वी क्षेत्रों में बौद्ध धर्म की आड़ में जबर्दस्त जासूसी का खेल चल रहा है। धर्म जैसी पवित्र समझी जाने वाली चीज़ का कैसा बेज़ा इस्तेमाल हो रहा है।


भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमांत पर पिछले चार-पांच साल में अचानक 22 बौद्ध मठ स्थापित हो गए हैं। इन बौद्ध मठों में अनेक राष्ट्रीयताओं के लोग आकर रहने लगे हैं। उनमें नेपाली हैं, भूटानी हैं, तिब्बती हैं, भारतीय हैं, चीनी हैं। ये लोग अपने आपकों बौद्ध कहते हैं लेकिन इनके बारे में हमारे गुप्तचर विभाग को शक है कि इनमें से कई चीन के एजेंट हैं। चीन उन्हें भिक्षु का वेश धारण करवा कर इन मठों में भेज देता है और वे वहां बैठकर चीन के लिए जासूसी करते हैं। वे सीमांत इलाकों से निकलकर भिक्षु के वेश में सारे भारत में भी घूमते हैं। इतना ही नहीं, ये बौद्ध मठ भारत में बसने  वाले हिंदुओं को बौद्ध बनाने के नाम पर चीनी हितों को पनपाने का काम करते हैं। उन्हें हिंदू परंपरा से काटकर बौद्ध परंपरा से जोड़ने का मतलब है, उन लोगों पर चीन का प्रभाव बढ़ाना। चीनी सरकार ने नेपाल की सीमा में अनेक चीनी अध्ययन केंद्र खोल दिए हैं। इन केंद्रों का लक्ष्य सीमा के इस और उस पार बसने वाले नेपालियों में एकता बढ़ाना और उनको भारत के खिलाफ उकसाना है। नाम तो बौद्ध धर्म फैलाने का लिया जाता है लेकिन उसके जरिए चीन का प्रभाव फैलाया जाता है।


यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बहुत नाजुक है। यहां बांग्लादेश और बर्मा की सीमाएं भी मिलती हैं। इन इलाकों में बांग्लादेश और बर्मा से आए शरणार्थी भी बस गए हैं। अनेक बांग्लादेशी संगठन मांग कर रहे हैं कि प. बंगाल और असम के कुछ जिलों को मिलाकर कमलापुरी नामक नए राज्य की स्थापना की जाए। इन अलगाववादी गतिविधियों को जमातुल मुजाहिदीन, हरकतुल अंसार और नेपाली इस्लामी संघ जैसी संस्थाएं हवा देती रहती हैं। कहीं-कहीं नेपाली माओवादी भी इनसे हाथ मिलाए हुए दिखाई पड़ते हैं।


यह स्थिति भारत के लिए ही खतरनाक नहीं है। यह बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और बर्मा को भी नाकों चने चबाने के लिए मजबूर कर देगी। आतंकवादी किसी के सगे नहीं होते। वे जिन राष्ट्रों की मदद लेते हैं, उनकी ही जड़ों में मट्ठा डालने से नहीं चूकते। आज चीन खुश हो सकता है कि वह भारत को तंग कर पा रहा है लेकिन उसको पता होना चाहिए कि ये ही बौद्ध लामा तिब्बत में और मुस्लिम मौलाना सिंच्यांग में उसके होश फाख्ता कर देंगे।