टोंक-सवाई माधोपुर जिलों में लघु उद्योग लगाने की पहल करें केन्द्र सरकार

  • 2014-12-18 07:11:59.0
  • उगता भारत ब्यूरो
टोंक-सवाई माधोपुर जिलों में लघु उद्योग लगाने की पहल करें केन्द्र सरकार

     नई दिल्ली, 17 दिसम्बर, 2014। टोंक-सवाई माधोपुर के सांसद श्री सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने लोकसभा में शुन्यकाल में केन्द्रीय लघु उद्योग एवं कार्मिक मन्त्री से प्रदेश के टोंक-सवाई माधोपुर जिलों में लघु एवं बडे़ कारखाने स्थापित करने का आग्रह किया ताकि इस संसदीय क्षेत्र  में रोजगार के अवसर मिल सके।


     उन्होंने कहा कि टोंक-सवाई माधोपुर संसदीय क्षेत्र में फ्लोराइड युक्त पानी होने की वजह से ज्यादातर किसान वर्ष में केवल एक ही फसल पैदा कर पाते है और बाकी समय उनके पास आजीविका के साधन नहीं होते, इसलिए संसदीय क्षेत्रों के लोगों की यह महत्वपूर्ण मांग है कि केन्द्र सरकार कोई योजना बनाकर यहां पर लघु उद्योगों को स्थापित करें, ताकि रोजगार के लिए यहां के युवाओं को किसी अन्य राज्य में जाकर रोजगार तलाशना न पड़े तथा यहां पर लघु उद्योग स्थापित करने से आस-पास के कई जिलों के युवाओें को भी इसका फायदा मिले। उन्होंने कहा कि टोंक जिले में पहले एक लैदर फैक्ट्री व एक सीमेन्ट फैक्ट्री थी वो अब बन्द हो गई है। उन्होंने केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि टोंक व सवाई माधोपुर जिलों में लघु उद्योग स्थापित कर अधिकाधिक लोगों को रोजगार मुहैया करवाया जाए।


 भारतीय खाद्य निगम की सभी डिपो में बायोमीट्रिक मशीने लगाई जायेगी


      अलवर के सांसद महंत चांदनाथ ने भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई.) की लचीली कार्यप्रणाली का मुद्दा संसद में उठाया।


     श्री चांदनाथ द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री श्री राव साहेब पाटिल दानवे ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम मुख्यालय द्वारा निगम की डिपोज में आ रही समस्याओं के समाधान के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए है। निगम ने श्रमिकों को फर्जी  तरीके से दर्शाए जाने पर रोक लगाने के लिए सभी डिपो में बायोमीट्रिक मशीनें लगाए जाना प्रस्तावित है। साथ ही इन डिपोज की गतिविधियों की बेहतर निगरानी के लिए तौल सैतुओं में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे है।


     श्री पाटिल  ने बताया कि  एफ.सी.आई. के क्षेत्रीय महाप्रबंधकों से कहा गया है कि वे ऎसे सभी मामलों की विशेष ऑडिट की व्यवस्था सुनिश्चित करें, जहां मजदूरों की मासिक आय एक लाख रूपये से अधिक है।