राजस्थान में सोलर विद्युत के ट्रांसमिशन के लिए ‘ग्रीन एनर्जी कॉरीडोर’ बनाया जाए-वसुंधरा

  • 2014-12-08 03:56:36.0
  • उगता भारत ब्यूरो
राजस्थान में सोलर विद्युत के ट्रांसमिशन के लिए ‘ग्रीन एनर्जी कॉरीडोर’ बनाया जाए-वसुंधरा

राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुधरा राजे ने की नई दिल्ली में


केंद्रीय विद्युत, कोयला एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्रा प्रभार) श्री पीयूष गोयल से भेंट


                नई दिल्ली, 07 दिसम्बर, 2014। राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया है कि राजस्थान में सोलर उर्जा से पैदा होने वाली करीब 25 हजार मेगावाट बिजली के ट्रांसमिशन के लिए भारत सरकार के खर्चे पर पॉवर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के माध्यम से एक ‘ग्रीन एनर्जी कॉरीडोर’ बनाया जाए।


                श्रीमती राजे ने नई दिल्ली के श्रम शक्ति भवन में केंद्रीय विद्युत, कोयला एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्रा प्रभार) श्री पीयूष गोयल से भेंट की और उनके साथ राजस्थान में विद्युत से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श किया। इस अवसर पर राज्य के प्रमुख उर्जा सचिव श्री संजय मल्होत्रा भी उपस्थित थे।


                श्रीमती राजे ने कहा कि राजस्थान में एक सौ से कम आबादी वाले गांवों और ढ़ाणियों के विद्युतीकरण के लिए वर्तमान नियमों में छूट प्रदान करने का आग्रह करते हुए प्रदेश की ऐसी 30 हजार 183 ढ़ाणियों में ग्रामीण विद्युतीकरण की योजना को लागू करने की मांग रखी है। साथ ही ’’पॉवर सिस्टम डवलपमेंट फंड‘‘ के तहत राजस्थान के हिस्से की 969 करोड़ रू. की अनुदान राशि भी शीघ्र ही की जारी करवाने का आग्रह किया है।


एक सौ से कम आबादी वाले गांवों एवं ढाणियों के विद्युतीकरण के लिए वर्तमान नियमों में छूट दी जावें


                श्रीमती राजे ने केन्द्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री को बताया कि राजस्थान में ग्रामीण विद्युतीकरण नीति-2004 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ग्रामीण विद्युतीकरण की योजना के नियमों में छूट आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यह योजना पूर्णतः भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित है तथा इसके लिए केन्द्र सरकार 90 प्रतिशत राशि अनुदान तथा 10 प्रतिशत राशि ऋण के रूप में प्रदान करती है।


                उन्होने केन्द्रीय उर्जा राज्य मंत्री से आग्रह किया है कि इन बिजली कंपनियों की माली हालत को सुधारने और उनका पुर्ननिर्माण करने के लिए केन्द्र सरकार मदद करें। साथ ही बैंको से वांछित ऋण उपलब्ध करवाने के साथ बैंको से लिए ऋण के पुनर्भरण की अवधि को भी बढ़ाया जाए।


                श्रीमती राजे ने बताया कि राज्य की बिजली कंपनियों पर कर्जे पिछले पांच वर्षो में 15 हजार करोड़ रूपये से बढ़कर 77 हजार करोड़ रूपये तक पहुॅच गए हैं, इस घाटे से उबरने के लिए उन्होंने केन्द्रीय मंत्राी से सहयोग का आग्रह भी किया। श्रीमती राजे ने कहा कि केन्द्रीय मंत्राी ने हमारे द्वारा की गई प्रमुख मांगों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकृति प्रदान की है।