रोजे़दार अर्शद के मुंह में रोटी

  • 2014-07-29 06:40:03.0
  • उगता भारत ब्यूरो

shiv sena mp bread

डॉ0 वेद प्रताप वैदिक

दिल्ली के महाराष्ट्र सदन में काम कर रहे एक कर्मचारी के साथ शिव सेना के सांसदों ने जिस तरह का बर्ताव किया है, वह निंदनीय है। उस कर्मचारी का नाम अर्शद जुबैर है। अर्शद जुबैर के मुंह में जबर्दस्ती रोटी ठूंसकर वह सांसद क्या बताना चाहता था? सांसद राजन विचरे को यह अधिकार किसने दिया कि केंटीन की रोटी खराब है तो उसकी बाकयदा शिकायत करने की बजाय वह रोटी सुपरवाइजर के मुंह में ठूंस दें? यह मानव अधिकार का तो उल्लंघन है ही, उसके अलावा अपने सांसद होने की गरिमा के भी खिलाफ है। जब विचरे ने अर्शद के मुंह में रोटी ठूंसी, तब यदि विचरे को जुबैर दो-चार झापड़ मार देता या ठूंसा मारकर गिरा देता तो उस सांसद की इज्जत क्या रह जाती? कम से कम उस सांसद को अपनी इज्जत का तो ख्याल करना चाहिए था।

 

लेकिन वह क्यों करता? शिव सेना की राजनीति में गरिमा और मर्यादा का कोई स्थान नहीं है। उसके नेता बेहद डरपोक और कायर हैं। ठाकरे परिवार के लोग घर में बैठकर जुबान चलाने में उस्ताद है। गरीब मराठी लोगों को भड़काने में उन्हें कोई शर्म नहीं आती। वे खुद कभी मैदान में जाकर अपना सीना तानकर खड़े नहीं होते। जैसे उनके नेता हैं, वैसे ही उनके सांसद हैं। अर्शद जुबैर के साथ बदतमीजी करने के पहले उन सांसदों ने, जो महाराष्ट्र सदन में ही ठहरे हुए हैं, भोजन की खराबी को लेकर काफी तोड़-फोड़ की थी। उसी हंगामे के दौरान अर्शद जुबैर पर भी उन्होंने अपना गुस्सा उतारा।

सबसे दुख की बात है कि अर्शद जुबैर का रोज़ा था और विचरे ने एक रोज़ेदार के मुंह में रोटी ठूंसने की कोशिश की। क्या यही शिव सेना का हिंदुत्व है? ऐसा शर्मनाक हिंदुत्व शिव-सेना का ही हो सकता है, किसी सच्चे हिंदू का नहीं। एक सिरफिरे हिंदू और एक सच्चे हिंदू के हिंदुत्व में यही फर्क है। इसीलिए लालकृष्ण आडवाणी ने भी उसे गलत बताया है। जुबैर का कहना है कि मैंने सांसद महोदय को बार-बार कहा कि मैं रोजेदार हूं। जब टीवी पर सारा दृश्य दिखाया गया तो विचरे ने कहा कि रोटी ठूंसते समय उसे पता नहीं था कि वह कर्मचारी मुसलमान था। उसे खेद है। विचरे को चाहिए कि वह प्रायश्चित करे। जुबैर से माफी मांगे और खुद तीन दिन तक व्रत उपवास करे। अनजाने में या गुस्से में हुए इस दुष्कर्म को सांप्रदायिक रंग में रंगना उचित नहीं है। हमारे देश के औसत हिंदू और औसत मुसलमान एक-दूसरे के धार्मिक कर्मकांड का हमेशा उचित सम्मान करते हैं।