दूध न देती गाय भी है कमाई का साधन : स्वामी विश्वासानंद

  • 2014-06-28 02:15:43.0
  • अजय आर्य

3अजय कुमार आर्य
नोएडा। सुप्रसिद्घ गौ-भक्त और सन्यासी स्वामी विश्वासानंद का कहना है कि दूध न देती गाय भी हमारे लिए कमाई का अच्छा साधन बन सकती है। यहां सुदर्शन न्यूज चैनल के सुदर्शन गो संसद की बैठक में ‘उगता भारत’ के मुख्य संपादक राकेश कुमार आर्य के साथ उन्होंने विशेष बातचीत में बताया कि हम गौमय-दंत मंजन बनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। स्वामीजी ने यूं तो कई चीजें बताईं लेकिन हम यहां आज अपने पाठकों के लिए गौ-दंत मंजन के विषय में ही बताते हैं।
स्वामीजी ने कहा कि गोबर के कंडों को पहले साफ सुथरी जगह या कढ़ाई में रखकर जला दें, आधे जलने पर एक साफ तगारी से ढककर उसकी आसपास की हवा बंद करने के लिए टाट का कपड़ा किनारों से दाब दें, लगभग आधे घंटे के बाद खोलकर काला, मजबूत पका कोयला निकाल लें।
इस तरह बने कोयले को खरल में बारीक करके सूती बारीक कपड़े में रगडक़र छानकर बारीक पाउडर बना लें। अब सादा कपूर पपड़ी वाला बीस ग्राम, अजवायन सत बीस ग्राम लें। पहले कपूर और अजवायन के सत को एक शीशी में मिलाकर एक घंटा रखें जब यह अपने आप घुलकर चालीस मिलीलीटर तेल बन जाएगा। कुछ कमी रहे तो खूब हिलाकर पूरा घुल जाने पर तेल बनने के बाद बने कपूर के तेल को एक किलो कंडे के बारीक चूर्ण में डाल दें, फिर सादा नमक 160 ग्राम के बारीक किये हुए पाउडर को 160 ग्राम पानी में मिलाकर गर्म करके पूरा नमक घोल लें। इस घुले हुए पानी का वजन 320 ग्राम होगा। अब तीनों चीजें गोबर के कंडे का कोयला का पाउडर एक किलो, कपूर तेल 40 मिली. तथा नमक के घोल वाला पानी 320 मिली. सबका वजन एक किलो 360 ग्राम हुआ। सबको एक अच्छी साफ लोहे की कढ़ाई या बर्तन में मिलाकर अपने हाथों से खूब मिलाकर आधा घंटे खरल में रगड़ें। फिर शीशियों में भर लें, सूखने न दें, नमी में रखें।
स्वामी जी ने बताया कि इस दंत मंजन से दांतों में कीड़ा लगना, दांतों में पानी लगना, या गर्म वस्तु लगना, मसूड़े फूलना, दर्द मुंह व जीभ के छाले, गले में खरास, तथा मुंह में स्वाद के बिगडऩे, पायरिया, मसूड़ों से पीब आने जैसी बीमारी में यह मंजन पूरी तरह लाभकारी है। इस मंजन को सुबह व सोते समय करना आवश्यक है। दंत रक्षा और मुंह के रोगों से सुरक्षा होगी। इस प्रकार गाय दूध न देते हुए भी हमारे लिए 24 घंटे कुछ न कुछ देने का कार्य करती रहती है। उसकी उपयोगिता को समझने की आवश्यकता है।