आतंक के विरुद्ध नवाज का युद्ध

  • 2014-06-18 08:21:50.0
  • उगता भारत ब्यूरो

डॉ0 वेद प्रताप वैदिक


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पाकिस्तान की फौज ने अब इस देश के आतंकवादियों पर खुलकर हमला बोल दिया है। इस हमले को पाकिस्तान के अखबार और टीवी चैनल ‘युद्ध’ की संज्ञा दे रहे हैं। सरकार ने इसे ‘जर्बे-अज़्ब’ का नाम दिया है। ‘अज्ब’ उस तलवार का नाम है, जो पैगंबर मुहम्मद के पास रहती थी। मज़हब के नाम पर लड़ने वाले तालिबान पर मुहम्मद की तलवार से वार करने का अर्थ यह है कि पाकिस्तान की सरकार ने ‘करो या मरो’ की घोषणा कर दी है। वजीरिस्तान के इलाके में पहले से 40 हजार जवान डटे हुए थे। सरकार ने कल 40 हजार जवानों की नई खेप वहां और डटा दी है।


फौज को आदेश है कि वह आतंकवादियों का समूल नाश कर दे। सारे शहरों में रात 9 बजे के बाद नागरिकों को घरों में रहने के लिए कहा गया है। सरकारी भवनों, सड़कों और मोहल्लों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। जहाजों और हेलिकॉप्टरों से उत्तरी वजीरिस्तान में हमले किए जा रहे हैं। सैकड़ों आतंकवादियों को मार गिराया गया है। उज़बेक आतंकवादियों के नेता अबू रहमान को मार दिया गया है।


नवाज़ शरीफ सरकार बड़ी हिम्मत से काम कर रही है। उसे लगभग सभी बड़े राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है। सिर्फ इमरान खान की तहरीके-इंसाफ पार्टी का कहना है कि पख्तूनख्वाह प्रांत में हमारा राज है और हमसे पूछा भी नहीं गया कि वहां हम ऐसी फौजी कार्रवाई करें या न करें।


इसी तरह कट्टरपंथी जमीयते इस्लामी पार्टी ने भी आपत्ति की है लेकिन इनके अलावा पूरा पाकिस्तान मियां नवाज़ का समर्थन कर रहा है। यदि वे इस मिशन में सफल हो गए तो वे राष्ट्रीय महानायक बन जाएंगे।


इस अभियान के कारण उनके और फौज के बीच जो फासला बढ़ रहा था, वह भी घट जाएगा। यदि वे जनरल परवेज मुशर्रफ के प्रति थोड़ा नरम रवैया बरत लें तो फौज और सारी राष्ट्रवादी ताकतें उनके साथ एकजुट हो जाएंगी। मियां नवाज़ ने साल भर से तालिबान के साथ बात करने की कोशिश की लेकिन तालिबान ने बात को सिरे चढ़ाने की बजाय जगह-जगह रक्तपात किया। कराची हवाई अड्डे पर किए गए हमले ने नवाज़-सरकार को यह सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया। आश्चर्य है कि इतना बड़ा फौजी-अभियान शुरु करके मियां नवाज़ दो-तीन दिन के लिए विदेश जा रहे हैं। शायद उन्हें विश्वास है कि तालिबान के मुकाबले फौज का पाया काफी बुलंद है। यदि मियां नवाज़ इस अभियान को इसकी तार्किक परिणिति तक पहुंचा सके तो अगले साल अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी के बाद भारत-पाक सहयेाग का नया अध्याय शुरु हो सकता है। यह मियां नवाज का नया अवतार सिद्ध होगा।