दीपावली : दीप जला कर संकल्प लेने का दिवस

  • 2013-11-02 03:09:24.0
  • उगता भारत ब्यूरो

diwali-crackershgfd- विनोद बंसल

दीपावली का नाम स्मरण करने मात्र से अनेक प्रकार के विचार मन में दौड लगाने लगते हैं। बच्चों को जहां नए-नए कपडे, मिठाई, खिलोने व पटाखे याद आते हैं तो बडों को समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की आराधना कर कुछ पाने की आकांक्षा रहती है। महिलाएं इसकी तैयारियों के विषय में चिंतन में लीन हो पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरोकर घर-बाहर की सफ़ाई व खुशहाली में व्यस्त हो जाती हैं। यह त्योहार किसी एक दिन का न हो कर त्योहारों की एक श्रंखला के रूप में मनाया जाता है। यूं तो दीपावली कार्तिक कृष्ण अमावस्या की काली रात्रि को जगमग करने का त्योहार है किन्तु इसका प्रारम्भ धन-त्रयोदशी के दिन से ही प्रारम्भ हो जाता है। उसके बाद यम-चतुर्दशी और दीपावली की अमावस्या के बाद भी दो प्रमुख त्योहार और रह जाते हैं। वे हैं गोवर्धन पूजा और भैया दूज। इन सभी मान्यताओं के बडे सटीक वैज्ञानिक आधार हैं। इस  त्योहार को भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के हर कोने में हर वर्ग के लोग बडी धूम धाम से मनाते हैं। इसी दिन से व्यापारी वर्ग अपने बही खाते प्रारम्भ करते हैं। दीपावली के शुभ मुहूर्त में व्यापारिक गतिविधियों या सौदों का विशेष महत्व है। दीपावली के दिन ही प्रसिद्ध समाज सुधारक व आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती का निर्वाण दिवस भी मनाया जाता है। इसके अंतर्गत प्रात: काल से सायं तक यज्ञ-भजन प्रवचन तथा मेलों का आयोजन भी पूरे विश्व भर में किया जाता है।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का इस त्योहार से सीधा सम्बन्ध जुडा है। राम चरित मानस के अनुसार लंका विजय के पश्चात भगवान राम इसी दिन अयोध्या लौटे थे और उसी की खुशी में पूरी अयोध्या नगरी में घर-घर दीप जला कर उनका भव्य स्वागत किया गया था। दीपावली एक ऐसा त्योहार है जिसके आगमन से पूर्व घर-आंगन, कौने-कुचारे और गंदे से गंदे स्थान को भी पूरी तरह से साफ़ सुथरा कर चमकाया जाता है। इतना ही नहीं, शौचालय व नालियों तक को भी दीपक जला कर रोशन किया जाता है। इस त्योहार की एक बात और खास होती है कि जब दीप जलाए जाते हैं तो सबसे पहले मन्दिरों, अपने पडोसियों, घर और गली के कोनों के साथ उन सभी स्थानों पर लगाए जाते हैं जो सदा अंधेरे में रहते हों। जिस प्रकार भगवान श्री राम ने अपने वनवास के दौरान समाज के निर्बल और असहाय लोगों को गले लगा कर उनके पौरुष को जागृत कर एक सूत्र में पिरोया उसी आधार पर इस त्योहार में ऊंच-नीच, भेद भाव या छुआ छूत को दूर भगा कर समाज के प्रत्येक वर्ग को गले लगाने की परिपाटी है।

उपरोक्त बातों के अलावा यह त्योहार हमें अपनी जिम्मेदारियों के साथ कुछ संकल्पों की याद भी दिलाता है। भगवान श्री राम ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 14 वर्ष समाज संगठन कर सामाजिक बुराईयों और रावण जैसे आतंकियों से संघर्ष में बिता दिये। उनके ज़ीवन का एक-एक कार्य और आदर्श संपूर्ण विश्व के लिए जीवनदायिनी औषधि के समान है। पूरी दुनिया जानती है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। सरयू नदी के तट पर बसी अयोध्या नगरी चिर काल से ही हिंदू समाज के लिए एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के रूप में विख्यात है। वैदिक काल के मान-चित्रों, श्री राम चरित मानस सहित अनेक पुरातन धर्म ग्रंथों, सरकारी अभिलेखों, ढांचे की दीवारों से प्राप्त शिला-लेखों, अनेक हिन्दू, मुस्लिम व ईसाई विद्वानों के लेखों, डायरियों तथा भिन्न-भिन्न समयों पर जारी सरकारी गज़टों ने भी वैज्ञानिक आधार पर यह सिद्ध कर दिया है कि हां यह वही अयोध्या है जहां श्री राम ने अठ्खेलियां खेली थीं और अपने मोहक रूप से सभी को मोह लिया था। सन् 1950 से उत्तर प्रदेश की विभिन्न न्यायालयों में ठोकर खाते हुए शान्ति प्रिय हिन्दू समाज को साठ वर्षों के बाद 30 सितम्बर 2010 को माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय से निर्णय मिला कि यही भगवान श्री राम की जन्म स्थली है।

सन् 1994 में भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से शपथ पूर्वक कहा था कि यदि यह सिद्ध हो जाता है कि विवादित स्थल पर 1528 से पूर्व कोई हिन्दू स्थल था तो सरकार हिन्दू भावनाओं के अनुरूप काम करेगी। तत्कालीन मुस्लिम नेतृत्व ने भी सरकार को वचन दिया था कि हिन्दू भवन सिद्ध होने पर मुस्लिम समाज स्वेच्छा से यह स्थान हिन्दुओं को सौंप देगा।

आओ, इस दीपावली के शुभ अवसर पर हम सभी प्रभु से प्रार्थना करते हुए संकल्प लें कि भगवान श्री राम की जन्म स्थली के चारों ओर की संपूर्ण भूमि को, संसदीय कानून के माध्यम से प्राप्त कर, एक भव्य मंदिर निर्माण करेंगे और समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर भारतीय संस्कृति व राष्ट्रीय स्वाभिमान को पुन:जागृत करेंगे।

दीपावली मनाते हुए इसके सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक व वैज्ञानिक महत्व को चहुं ओर, खास कर बच्चों व युवा पीडी तक ले जाएंगे। एक संकल्प हमें और लेना होगा कि आगामी चुनावों में बढ-चढ हिस्सा लेकर स्वविवेक से निर्णय लेते हुए देश को गरीवी, भुखमरी, भ्रष्टाचार, अशिक्षा व सामाजिक विषमता जैसे अंधकार से दूर करेंगे।