मन के हारे हार है मन के जीते जीत

  • 2013-01-03 09:03:59.0
  • उगता भारत ब्यूरो
मन के हारे हार है मन के जीते जीत

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
मानव शरीर को ईश्वर की सर्वोत्तम कृति माना गया है। पौराणिक कथाओं और हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार चौरासी लाख योनियों से गुजऱने के बाद मनुष्य योनि प्राप्त होती है जो क्रमश:ईश प्राप्ति की ओर बढ़ते कदमों की अंतिम परणिति मानी गई है। मानव शरीर के द्वारा साधना, उपासना आराधना संकल्प और त्याग इत्यादि के द्वारा मोक्ष की प्राप्ति होती है ऐसा पुराणों में वर्णित है।अन्य धर्मों में भी कमोवेश इसी तरह की जानकारियां मिलती हैं।सवाल ये उठते हैं कि यदि ईश्वर प्रदत्त यह श्रेष्ठतम कृति शारीरिक रूप से सक्ष्म न हो ,अंग भंग हो अथवा पैदाईशी रूप में शरीर के कोई अंग ही न हों या किसी दुर्घटना में किन्ही हिस्स को अलग करना पड़ा हो तो क्या मनुष्य अपने वही स्वाभाविक कार्य कर सकता है जो एक स्वस्थ मनुष्य से अपेक्षित होता है।इअका सीधा सीधा उत्तर हां हो सकता है ।दुनियाँ ऐसे उदाहरणों से भरी पड़ी है।यदि मनुष्य में दृढ़ इच्छा शक्ति हो,आत्म विश्वास हो और कार्य के प्रति सच्ची लगन हो तो विकल्लंगता के चरम पर होने के बावज़ूद महान महान कार्यों का निष्पादन किया जा सकता है।
स्टीफन? हाकिंग इसका सटीक उदाहरण है।विवेकानंद भी कहते हैं कि इंसान चाहे तो क्या नहीं कर सकता।हिम्मत लगन और आत्म विश्वास हो तो असंभव को भी संभव करके दिखाया जा सकता है। उठो और चल पड़ो और जब तक चलते रहो जब तक कि मंजिल न मिल जाये।हाथ पैरों से, शरीर से ,इंद्रियों के शिथिल होने के बाद भी आदमी अंतर्मन से अनंत यात्रा कर सकता है और अपनी मंजिल पा सकता है।तीव्र इच्छा, जिजीविषा और जी तोड़ परिश्रम आपको मंजिल तक पहुँचाकर ही दम लेगा।आयु,शारीरिक अक्षमता और विकलांगता इसमें कहीं बंधनकारी नहीं होगा।वर्षों से अपंग लोगों ने ,जन्म से अंधे लोगों ने न सिर्फ पढ़ाई में सफलता प्राप्त की बल्कि एम. ए. एम .फिल करने के बाद शोध के महान कार्य करके डाक्ट्रेट की उपाधियां भी प्राप्त कीं।
बाइस साल की उम्र में एमियो ट्रोफिक लेटरल स्केलरोसिस नामक बीमारी से ग्रस्त होने के बावज़ूद स्टीफन हाकिंग ने जो उपलब्धि हासिल की वह दुनियाँ के इतिहास में अज़ूबा है। इस बीमारी में सारा जिस्म अपंग हो जाता है।केवल दिमाग काम करता रहता है।स्टीफन ने स्वयं कहा है कि मैं भाग्यशाली हूं कि मेरा शरीर बीमार हुआ है मन और दिमाग तक रोग नहीं पहुंचा है। वे एक महान वैग्यानिक हैं और इस क्षेत्र में न्यूटन और आस्टीन के समकक्ष खड़े दिखते हैं। कास्मोलाजिस्ट, मेथामेटिशियन, केम्ब्रिज मेंल्यूकेशियन के प्रोफेसर, अंतरिक्ष और ब्लेक होल से परदा हटाने वाले एक अदभुत और महान वैग्यानिक हैं।वह एकमात्र एक ऐसे वैग्यानिक हैं जिन्होंने अंतरिक्ष में काले गढ्ढों की खोज की है। उन्होंने अंतरिक्ष के अस्तित्व पर भी सवालिया निशान खड़े किये हैं। उनके द्वारा रचित पुस्तक ए ब्रीफ हिस्टरी आफ टाइम ने तो बिक्री के नये नये रिकार्ड बना डाले। हालाकि उनकी उनकी व्यक्तिगत जिंदगी उतार चढ़ावों से भरी रही फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।उन्होंने कास्मोलोजी विद्या पर स?घन खोज की। ब्रहमांड की खोज उनका प्रमुख विषय रहा है।उन्होंने अपने साथी कीप औ पर्सिकल के साथ ब्लेक होल पर काम किया। ब्लेक होल ऐसा स्थान है जहां से दूसरे ब्रहमांड में पहुँचा जा सकता है। इतिहास गवाह कि ब्लेक होल में कई बड़े जहाज और हवाई जहाज गायब हुये हैं उनका आज तक पता नहीं लगा है।और तो र्औ तो उर उनका मल्वा भी ढूंढे से भी नहीं मिला है। सोचने की बात यह है कि जिस व्यक्ति का मस्तिष्क को छोड़कर सारा शरीर अपंग हो वह इतने जटिल काम कैसे कर सकता है किन्तु स्टीफ्फन ने किये हैं। भारतवर्ष के महाराजकृष्ण जैन भी इसी तरह का उदाहरण है वर्षों तक व्हील चेयर पर रहने के बाद भी उन्होंने विपुल साहित्य लिखा और डाक्ट्रेट की उपाधि हासिल की । उनकी पत्नि अंबाला में कहानी लेखन महाविद्यालय की संचालिका हैं। अष्टावक्र आठ जगह से टेढ़े मढ़े थे परंतु उनकी विद्वता दूर दूर तक जानी जाती थी तेमूर लंग इतिहास में में खूनी योद्धा के रूप में मशहूर हुये।14वीं शताब्दी में उन्होंने युद्ध के मैदान में कई द?शों को जीता। कहते हैं उसे अपने दुश्मनों के सिर काटकर जमा करने का शौक था। उस जमाने जबकि युद्ध बहुबल से लड़ा जाता था, बम और बंदूकों के सहारे नहीं ,ऐसे लंगडे तैमूर लंग की उपल्ब्धि किसी करिश्मेंसे कम नहीं आंकी जा सकती। तेमूर का दायां हिस्सा पूर्णत: खराब था। एबिल बोडीड का मतलब सबल आदमी माना जाता है किं यदि बीस तीस मीटर ही दौडऩा पड़ जाये तो हालत खराब हो जाती है।