उगता भारत ट्रस्ट द्वारा राजस्थान के बारां जिले में आयोजित गौ-कथा संपन्न

  • 2016-02-21 06:30:28.0
  • अजय आर्य

बारां। उगता भारत ट्रस्ट की ओर से यहां भव्य गौकथा का आयोजन किया गया। विगत 7, 8 व 9 फरवरी को चले इस कार्यक्रम में गौकथा को प्रसिद्घ क्रांतिकारी तपस्वी और गौभक्त पंडित श्री सांईदास जी महाराज द्वारा अपने मुखारविन्दु से सुनाया गया। उन्होंने कहा कि गौ की सेवा से ही देश का विकास हो पाना संभव है।




[caption id="attachment_25732" align="aligncenter" width="527"]उगता भारत ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारत के 1235 वर्षीय स्वाधीनता संग्राम का इतिहास, भाग-1’ को उनसे प्राप्त करते युवा सुनील कुमार। साथ में हैं साईंदास जी महाराज, अश्विनी शर्मा, राकेश आर्य (बागपत) श्रीनिवास आर्य, एवं सुभाष चंद्र। ‘उगता भारत’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारत के 1235 वर्षीय स्वाधीनता संग्राम का इतिहास, भाग-1’ को उनसे प्राप्त करते युवा सुनील कुमार। साथ में हैं साईंदास जी महाराज, अश्विनी शर्मा, राकेश आर्य (बागपत) श्रीनिवास आर्य, एवं सुभाष चंद्र।[/caption]

श्री सांईदास ने गौभक्तों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि इस देश के ऋषियों ने इस देश की महान संस्कृति का निर्माण किया है, जिसे गौ संस्कृति कहा जाए तो कोई अत्युक्ति नही होगी। उन्होंने कहा कि गाय के दूध, घी, लस्सी  और गोमूत्र आदि के सेवन से लोगों में सात्विकता का भाव जन्म लेता है। इन सब गौउत्पादों के सेवन से उनके चेहरे पर ओज व तेज को स्पष्टत: पढ़ा जा सकता है। हमारे ऋषि मुनियों ने गाय के इस गुण को समझा और इससे अपने उत्कृष्ट वैज्ञानिक जीवन का निर्माण किया। जिससे सात्विक संसार का निर्माण हुआ। इसलिए गाय को माता कहा जाता है। ऐसी गाय माता को किसी साम्प्रदायिक दृष्टिकोण से देखना नितांत मूर्खता है।

[caption id="attachment_25733" align="aligncenter" width="531"]गौकथा जब अपने चरम पर पहुंची तो भक्त आनंदविभोर झूम उठे। उनके साथ हमारे मंच संचालक परमानंद ने भी अपने मन के नाचते मोर को अभिव्यक्ति दे दी। गौकथा जब अपने चरम पर पहुंची तो भक्त आनंदविभोर झूम उठे। उनके साथ हमारे मंच संचालक परमानंद ने भी अपने मन के नाचते मोर को अभिव्यक्ति दे दी।[/caption]

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे ‘उगता भारत ट्रस्ट’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार आर्य ने कहा कि जब यह संपूर्ण देश गाय की महिमा को समझकर उसके आर्थिक महत्व को समझ लेगा तो एक समय आएगा कि जब हर देशवासी गाय की आरती में लग जाएगा और यह देश गौ की आरती से झूम उठेगा। श्री आर्य ने कहा कि 25 करोड़ गायें इस देश की अर्थव्यवस्था को सात्विक बना सकती हंै, उन्होंने कहा कि वर्तमान अर्थव्यवस्था पूर्णत: राजसिक है, जिसमें एक दूसरे के हित टकरा रहे हैं, जिससे विश्व में और देश में कलह बढ़ रहा है। श्री आर्य ने कहा कि गाय आधारित कृषि और अर्थव्यवस्था हमें वास्तविक समाजवाद सिखाती है, जिसे आज सीखने-समझने की आवश्यकता है।

ट्रस्ट के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीनिवास आर्य ने कहा कि देश ने गौ-संस्कृति की रक्षार्थ अनेकों बलिदान किये गये हैं। श्री आर्य ने इतिहास के मर्मों को छूते हुए स्पष्ट किया कि हमारे लोगों ने जो भी बलिदान दिये हैं सभी गौमय वैदिक संस्कृति की रक्षार्थ दिये हैं, जिन्हें आज के परिवेश में याद करना आवश्यक है। जबकि ट्रस्ट के द्वितीय राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राकेश आर्य (बागपत) ने कहा कि ‘उगता भारत ट्रस्ट’ लोगों के बीच जाकर गौरक्षा की महिमा और आवश्यकता को बताएगा। उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में गाय का आर्थिक उपयोग बताना आवश्यक है जिससे आवारा घूमती गायों को लोग पकडक़र उनकी सेवा करना आरंभ करें और उनसे अपनी आजीविका चलायें। श्री आर्य ने कहा कि ट्रस्ट शीघ्र ही इस दिशा में अपनी एक विशेष योजना लागू करेगा। ट्रस्ट के कार्यालय प्रबंधक अजय आर्य ने इस अवसर पर युवाओं को और प्रांतीय पदाधिकारियों के समक्ष ट्रस्ट की गौ संबंधी योजना को जनान्दोलन के रूप में स्थापित करने के विषय पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर ट्रस्ट की महिला विभाग की प्रभारी श्रीमती कमलेश पथिक और प्रांतीय अध्यक्ष चंद्रसिंह किराड़ ने भी अपने विचार व्यक्त किये। यह कार्यक्रम श्री किराड़ और उनके सहयोगी रहे समाजसेवी परमानंद आदि के द्वारा ही आयोजित कराया गया था।

कार्यक्रम का सफल संचालन श्री परमानंद द्वारा ही किया गया। कार्यक्रम में भजनोपदेशन का कार्य गौसेवी और राष्ट्र के लिए समर्पित श्री अश्विनी शर्मा (जम्मू-कश्मीर) ने किया, जबकि उनका साथ सुभाष चंद्र एवं सुनील कुमार ने दिया। श्री अश्विनी शर्मा ने जीवन भर राष्ट्र जागरण का संकल्प लिया है।

सभा में ‘उगता भारत ट्रस्ट’ के उगता भारत फार्मेसी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय उपाध्याय ने लोगों को फार्मेसी की जानकारी दी और अपने विचार व्यक्त किये।

[caption id="attachment_25734" align="aligncenter" width="604"] गौकथा का आनंद उठाने के लिए उमड़ पड़े हजारों लोग। कथा के अंतिम दिन लोगों ने पंद्रह क्विंटल अनाज का सहभोज भी किया।[/caption]

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