स्मार्ट सिटी देश की सुरक्षा के लिए खतरा !

  • 2016-01-16 05:30:00.0
  • उगता भारत ब्यूरो

निशीथ सकलानी

उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून स्थित चाय बागान भूमि की खरीद-फरोख्त को लेकर सरकारी धन को ठिकाने लगाने की चर्चाओं से इन दिनों पूरे प्रदेश में हडक़म्प मचा हुआ है। स्मार्ट सिटी के नाम पर एक ओर जहां सैंकड़ों एकड़ चाय बागान की भूमि को खुर्द-बुर्द करने का सरकारी प्रयास चल रहा है। वहीं दूसरी ओर इस भूमि की खरीद को लेकर भी अब राज्य सरकार पर अंगुलियां उठने लगी हैं। एक तरफ राज्य सरकार केंद्र सरकार से ग्रीन बोनस की मांग कर रही है और दूसरी तरफ हजारों पेड़ों को काट कर हरियाली को तहस-नहस करने पर आमादा है। हैरानी तो इस बात की है जब कोई जमीन मात्र 220 करोड़ में आम बाज़ार में बिकने को थी तो सरकार उसमें से मात्र 1200 एकड़ के 1750 करोड़ क्यों दे रही है। देहरादून की शान समझे जाने वाले चाय बगान की इस भूमि को लेकर पूर्व में भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा है। सबसे पहले यह जमीन  पंडित नारायण दत्त तिवारी के शासन काल में सुखिऱ्यों में आई थी लेकिन तब से लेकर आज तक इसका सौदा नहीं हो पाया, इस जमीन को लेकर कभी सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा का नाम चर्चाओं में रहा तो कभी किसी और औद्योगिक घराने को इससे जोड़ कर यह जमीन सुखिऱ्यों में रही।
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चर्चा है कि कुछ दिनों पहले तक चाय बगान की समूची जमीन देहरादून सहित दिल्ली व कोलकाता तक के दलालों के पास एक सौदे के रूप में थी जिसकी कीमत तब मात्र 220 करोड़ आंकी गयी थी लेकिन इतनी कीमत में भी ग्राहक नहीं मिल रहा था, क्योंकि इतनी बड़ी रकम लगाने वाले इस बात से संतुष्ट नहीं थे कि कैसे यहाँ खड़े हजारों पेड़ों को काटा जायेगा और कैसे इस जमीन पर खड़े चाय के पेड़ों को रौंदा जायेगा, इस भूमि के भू-उपयोग को बदले जाने को लेकर भी वह संशय की स्थिति में थे। इन तमाम कारणों को देखते हुए तब यह जमीन बिक नहीं पा रही थी, लेकिन केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना के आते ही मसूरी देहरादून प्राधिकरण सहित जमीनों पर नजऱ रखने वाले सफेदपोशों की गिद्ध नजऱ से यह बच नहीं पायी और उन्होंने इस जमीन को खरीदने की राह में आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए एमडीडीए के एक चर्चित अधिकारी को उन सारी प्रशासनिक व न्यायिक शक्तियों से लैस कर दिया ताकी इस जमीन के रास्ते में आ रही क़ानूनी अडचनों को दूर कर उनकी कमाई का मार्ग प्रशस्त हो सके, इसके बाद जमीन की बोली का खेल शुरू हुआ।

चर्चाओं के अनुसार पहले इस जमीन का सौदा 220 करोड़ में तय हुआ लेकिन राज्य सरकार ने भुगतान की राशि को 1720 करोड़ तक पहुंचा दिया। यह भी चर्चा है कि सरकार ने कुल 1200 एकड जमीन लेने का मन बनाया है। जबकि स्मार्ट सिटी के लिए मात्र 250 एकड़ भूमि की ही आवश्यकता बताई गयी है। एमडीडीए यह नहीं बता पा रहा है की वह शेष जमीन किसके किये और क्यों खरीद रहा है।