शारीरिक शिक्षा को बंद करने का अजीब सुझाव

  • 2015-12-21 06:30:03.0
  • उगता भारत ब्यूरो

भूपिंदर सिंह
जीवन में मनोरंजन व प्रेरणा का क्या महत्त्व है, यह प्रयोगात्मक रूप में भी लिखित पढ़ाई के साथ-साथ समझाया जाता है। पिछले दिनों स्कूली शिक्षा उत्थान मंच ने सरकार को सुझाव दे डाला है कि शारीरिक शिक्षा विषय को बंद करके जमा एक व दो स्तर तक किसी वोकेशनल टे्रड वाले विषय को जोड़ देना चाहिएज्शिक्षा का सही मतलब मानव का संपूर्ण शारीरिक व मानसिक विकास करना होता है, जिससे मानव अपने जीवन में आने वाले संघर्षों व कठिनाइयों को सफलतापूर्वक पार करता हुआ अपना तथा समाज का उत्थान करे। पूरे विश्व में शारीरिक शिक्षा व स्वास्थ्य विज्ञान शिक्षा संस्थान की फैकल्टी का एक चौथाई हिस्सा होता है। स्कूली जीवन में ही विद्यार्थी को जहां शिक्षा के आधारभूत सिद्धांतों को प्रारंभिक स्तर से सीखना होता है, वहीं उसे इतनी शारीरिक योग्यता भी बनानी होती है कि वह अपने जीवन में लगभग साठ वर्षों तक जहां देश की सेवा कर सके और अपना शेष जीवन भी स्वस्थ रूप से ऊर्जा के साथ बसर कर सके। इसीलिए देश में इस सदी के शुरू होते-होते देश के स्कूलों में जमा एक तथा जमा दो स्तर पर पांचवें विषय के रूप में शारीरिक शिक्षा को विषय बनाया गया। इसके शुरू होने से राज्य के हजारों विद्यार्थियों ने इसे विषय के रूप में पास किया। यह अलग बात है कि इसके लिए शिक्षा विभाग ने किसी भी प्रवक्ता की नियुक्ति नहीं की। जो डीपीई खेल प्रबंधन व सेवेरे की सभा में फिटनेस के लिए नियुक्त थे, उन्हीं शिक्षकों ने इसे स्कूली स्तर पर पढ़ाने का जिम्मा भी अपने ऊपर ले लिया। बाद में जो डीपीई स्नातकोत्तर तक शारीरिक शिक्षा में डिग्री धारक थे, उन्हें स्नातकोत्तर अध्यापक का दर्जा भी दे दिया है। शारीरिक शिक्षा विषय में स्वास्थ्य विज्ञान के साथ खेल व खेल विज्ञान के पाठ विद्यार्थियों को पढ़ाए जाते हैं। जीवन में मनोरंजन व प्रेरणा का क्या महत्त्व है, यह प्रयोगात्मक रूप में भी लिखित पढ़ाई के साथ-साथ समझाया जाता है। पिछले दिनों स्कूली शिक्षा उत्थान मंच ने सरकार को सुझाव दे डाला है कि शारीरिक शिक्षा विषय को बंद करके जमा एक व दो स्तर तक किसी वोकेशनल टे्रड वाले विषय को जोड़ देना चाहिए। विषयों को कभी बंद नहीं किया जाता है, हां नए विषय और अधिक जरूर जोड़ दिए जाते हैं।

[caption id="attachment_24615" align="alignright" width="364"]physical education शारीरिक शिक्षा[/caption]

जब शारीरिक शिक्षा संपूर्ण शिक्षा का आधा हिस्सा है तो फिर आप किस तरह इस विषय को बंद करने की बात कर सकते हैं। वर्षों पूर्व जब अपने मां-बाप के साथ बहुत अधिक कृषि कार्य में हाथ बंटाते थे, कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते थे, उस समय मास पीटी व शारीरिक शिक्षा जरूर बेमतलब लगती थी। आज जब घर पर स्कूली बच्चे कोई भी काम नहीं करते हैं। घर के आंगन से स्कूल परिसर तक गाड़ी में विद्यार्थी सफर करता है, स्कूल के बाद बचे समय में टीवी व इंटरनेट के साथ आज का विद्यार्थी अधिक चिपक रहा है।ऐसे में उसके पास फिटनेस के लिए कहां समय है। स्वास्थ्य शिक्षा जीवन के लिए बेहद जरूरी है। जब शारीरिक शिक्षा व स्वास्थ्य शिक्षा के बारे में कोई बताएगा ही नहीं, तो फिर फिट नागरिक बनने के लिए आज का विद्यार्थी यह सब कहां से और कैसे सीखेगा। पिछले तीन-चार दशकों में स्कूली शिक्षा कार्यक्रम में ऐसा बदलाव आया है कि जो प्रतिदिन एक ड्रिल का पीरियड होता था, वह भी पढ़ाई की भेंट चढ़ गया है। हिमाचल प्रदेश में जब प्रौद्योगिकी तथा चिकित्सा के लिए एक-एक संस्थान या और निजी क्षेत्र में हमें दूर दक्षिण के राज्यों में लाखों रुपए कैपिटेशन फीस देकर यह शिक्षा मिल पाती थी, तो राज्य में थोड़ी व बिना फीस की सीटों के लिए बहुत कड़ी स्पर्धा से गुजरना पड़ता था। इसलिए अभिभावकों व अध्यापकों दोनों ने मिलकर शारीरिक फिटनेस की कीमत पर पढ़ाई को जरूरत से अधिक अधिमान दिया। इसका पता आज चल रहा है, जब फिटनेस के अभाव में लोग सरकारी नौकरी की सीमा साठ वर्ष भी पूरी नहीं कर पा रहे।

चालीस वर्ष के व्यक्ति आज विभिन्न बुढ़ापे की बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं और अब वे फिटनेस के दीवाने हो रहे हैं। यदि स्कूल के समय में शारीरिक शिक्षा व स्वास्थ्य शिक्षा का सही ज्ञान का प्रयोग शुरू हो जाता है तो पूरा जीवन व्यक्ति निरोग काट लेता है। आज का विद्यार्थी और कल का फिट व जिम्मेदार नागरिक कैसे बने, इसके लिए जब शिक्षा पर बहस हो रही है तो एक बात सामने आ रही है कि हमारी शिक्षा में शारीरिक फिटनेस के लिए शारीरिक शिक्षा का होना बेहद अनिवार्य है। शिक्षा संस्थान के हर विद्यार्थी की फिटनेस बेहद जरूरी है। इसके लिए शारीरिक शिक्षा का लिखित व प्रयोगिक होना दोनों जरूरी है। हम अच्छे चिकित्सक, अभियंता, प्रबंधक, अधिकारी व कर्मचारी तो पढ़ाई से निकाल सकते हैं, मगर वे अपनी आयु के साठ वर्षों तक देश की फिट होकर सेवा करे, इसके लिए फिटनेस के गुर शारीरिक व स्वास्थ्य शिक्षा ही सिखा सकती है। इसलिए तो कह रहे हैं, प्रारंभिक स्तर से ही शारीरिक व स्वास्थ्य शिक्षा को पढ़ाई के साथ लिखित तथा प्रयोगिक रूप में जोड़ा जाए, ताकि आगे चलकर वह हर मानव की दिनचर्या का हिस्सा बन जाए। शिक्षा उत्थान मंच के लोगों को शिक्षा का सही अर्थ पता करते हुए शारीरिक शिक्षा को निचले स्तर पर लागू करने की सिफारिश सरकार से करनी चाहिए, न कि इस विषय को बंद करने की।