शैतान को कंकरी मारने से पहले वह खुद मुझसे बोला..

  • 2015-11-26 04:03:13.0
  • रज्जाक अहमद

हज के कुल आठ मुकाम (आठ चरण) हैं। इनमें से पांचवां व सातवां मकाम मिनाह शहर में तीन दिन ठहरने का है। इन्हीं तीन दिनों में दो जियारतों के लिए अराफात व मुज्दलफा भी जाना है। आज हम हज के छठे चरण में अराफात के मैदान में हैं। जो चारों तरफ से पहाडिय़ों से घिरा है। यहां पर हर हाजी को सिर्फ दो नमाज अदा करनी होती हैं। दोपहर के समय इसी खुले मैदान में आकर सभी को खुदा के सामने अपने पूर्व में किये गये गुनाहों व गलतियों की माफी मांगनी होती है, और खुदा को यह विश्वास दिलाना है, कि वह अपने गुनाहों से तौबा करता है, और अब के बाद भविष्य में वह कोई गुनाह नही करेगा।

यहां  इस वक्त दोपहर के दो बजे हैं। तापमान लगभग पचास डिग्री पर है। जिधर देखो उधर ही लाखों लाख हाथ ऊपर आसमान की तरफ उठे हैं। सभी की आंखों में पश्चाताप के आंसू हैं। कुछ जोर-जोर से रो रहे हैं। कुछ घुटनों के बल जमीन पर बैठकर रो रहे हैं। एक अपराधी जैसे समर्पण की तरह सब खुदा के सामने अपने-अपने गुनाहों की माफी मांग रहे हैं। बड़ा ही गमगीन व करूणामयी नजारा है। अगर सच्चाई से इन लोगों ने इस तौबा का पालन किया तो वाकई यह खुदा के नेक बंदे होंगे, और अगर यह माफी सिर्फ पाकिस्तान पर अमेरिकी कर्ज जैसी है तो इसका कोई फायदा नही यह खुदा को नही खुद को धोखा देना है।

शाम होने को है। आज के रात मुज्दलाफा में गुजारनी है। जहां सारी रात इबादत करनी है। इसके बाद अगली सुबह सूरज निकलने के बाद वापस मिनाह जाना है। मक्का से मिनाह शहर को जोडऩे वाले हाईवे पर एक खूबसूरत तीन मंजिला इमारत है। इसी इमारत में अलग-अलग फासले से तीन पिलर अर्थात खंभे बने हैं। इनके दोनों तरफ बड़े-बड़े रास्ते व वापसी के कट बने हैं। यही तीनों खंबे शैतान के प्रतीक हैं।

आज हज पूरा होने का आखिरी दिन है। तीनों शैतानों के प्रतीकों को कंकरी मारने के बाद कुर्बानी की रस्म होगी। इसी के साथ हज पूरा हुआ। मैं भी आज इसी भीड़ में शैतान को कंकरियों मारने के लिए आया हूं। मैंने पहले यह अध्ययन किया कि आखिर शैतान को कंकरी किसलिए मारते हैं? शैतान बहुत ही बुद्घिमान था। लेकिन बहुत ही अहंकारी व घमंडी था। उसने खुदा का हुक्म मानने से इंकार कर दिया था। नाफरमानी की यह सजा है, कि लोग कयामत तक शैतान को कंकरियां मारकर ऐसे ही जलील करते रहेंगे। यह एक संदेश है। जिससे आने वाली पीढिय़ां बुराई से बचें व खुदा के आदेश का पालन करें। मैं ग्राउंड फ्लोर पर बने प्रतीकों के पास पहुंचा। लाखों की भीड़ में हजारों हाथ एक साथ उठ रहे थे। शोर के साथ ही कंकरियों की खनखनाहट की आवाज इमारत में गूंज रही थी। करोड़ों कंकरियों की चोट लगने के बाद भी शैतान पर कोई असर नही था। अब मैं आपको एक ऐसी बात से सांझा करना चाहता हूं जिससे हो सकता है कि कुछ कट्टरपंथी नाराज हो जाएं, लेकिन यह मेरी आत्मा की आवाज है। इसे मैं आपसे जरूर सांझा करूंगा। मैंने भी अपने हाथ में कंकरिया निकाली और मारने के लिए आगे बढ़ा।

कंकरी मारने से पहले मैंने ध्यान से शैतान की तरफ देखा कुछ लोगों के कंकरी मारने पर वह हंस रहा था।  मैंने बिना शब्द बोले अपनी आंखों से शैतान से इस हंसने की वजह पूछी। मुझसे आगे कंकरी मारने वाले से शैतान कह रहा कि भाई तुम मुझे कंकरियां मारकर क्यों जलील कर रहे हो तुम तो मेरे बड़े भाई हो। तुम्हारा काम भी समाज में वैमनस्य पैदा करना अधर्म फैलाना, भाई को भाई से लड़ाना, समाज में झगड़े फ साद कराना है। वही मैं करता हूं फिर तुम्हें क्या अधिकार है मुझे जलील करने का। अपने गिरेबान में झांककर देखो क्या तुम खुद ठीक हो? मेरे हाथ रूके हुए थे, अब शैतान मेरी तरफ मुखातिब हुआ कहने लगा ये जो भाई आपके बराबर में खड़े होकर चिल्ला-चिल्लाकर कंकरी मार रहे हैं, इनके हज के कागजात व वीजा सब फर्जी हैं। ये हज भी दो नंबर से करने आये हैं और यह भाई साहब जो इनके पीछे पसीना-पसीना हो रहे हैं, इनसे पूछो-इनका कारोबार क्या है? चोरी व लूट के पैसे से हज करने आये हैं। शैतान एक के बाद एक बात लगातार कह रहा था। अभी भी मेरा हाथ कंकरी मारने को उठ नही रहा था। शैतान की बात जारी थी। उसने कहा-मैंने सिर्फ लोगों को धर्म से बरगलाया, उन्हें अधर्मी बनाया, आपस में लड़ाया, लेकिन मैंने बेकसूर बच्चों व महिलाओं की हत्या नही कराई। मैंने मस्जिदों व स्कूलों में बम विस्फोट नही करवाये। आज बोकोहरम के नाम से बेटियां की इज्जत लूटी जा रही है। जेहाद के नाम पर आईएसआईएस तालिबान, अलकायदा, जमात-उद-दावा, लश्करे तैयवा और जाने कौन-कौन बेगुनाहों का कत्ल कर रहे हैं? अल बगदादी, अलजवाहरी, लखवी, हाफिज सईद, मुल्ला उमर कौन हैं ये? तमाम मुस्लिम देश इनके इस जेहाद से लहूलुहान हैं। इनमें से भी कुछ हज करने आये हैं। मुझसे बड़े अधर्मी बच्चों महिलाओं के कातिल बलात्कारी शैतान दुनिया में मौजूद हैं। वह इस बीस लाख की भीड़ से सवाल कर रहा था कि इन्हें केाई पत्थरों से क्यों नही मारता? मुझसे बड़े इन शैतानों के लिए आप क्या कर रहे हैं? लेकिन कंकरी मारने वाले जरा भी शर्मिंदा नही थे।

मैं अभी शैतान के प्रतीक के पास ही खड़ा हूं। मुझे लगा कि शैतान कह रहा है, कि भाई तुम अपना टाइम खराब कर रहे हो। आप भी कंकरिया मारो और इस भीड़ से बाहर निकलो। मुझे लगा मानो मैं नींद से जागा हूं। मैंने कंकरिया मारीं और मैं धीरे-धीरे चलता हुआ भीड़ से बाहर आया। इस सोच के साथ कि क्या शैतान के सवाल सही हैं? या गलत। कुछ घंटे बाद मेरा हज का आठवा चरण भी पूरा हो जाएगा। वापस अपने वतन आने की तैयारी हो जाएगी। लेकिन शैतान के सवालों का जवाब बाकी रहेगा।