सबको साधकर चलने वाले मुख्यमंत्री हैं अखिलेश

  • 2016-03-13 05:30:47.0
  • प्रो. त्रिपुरारी कुमार

लखनऊ। भारतीय राजनीति के कुशल खिलाड़ी और अपनी राजनीति से समय के अनुसार सबको साधकर चलने में पारंगत सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायमसिंह यादव एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी प्रशंसा कर चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनावों के समय 2012 में जब उत्तर प्रदेश की जनता ने अपना स्पष्ट निर्णय सुनाते हुए प्रदेश की बागडोर सपा को सौंपी थी तो श्री यादव ने उत्तर प्रदेश अपने साहबजादे अखिलेश यादव को सौंप दिया था। तब कई लोगों ने अखिलेश यादव की क्षमताओं पर प्रश्नचिह्न लगाया था कि वह इतने बड़े प्रदेश को पांच वर्ष चला नही पाएंगे। परंतु समय ने साबित कर दिया है कि अखिलेश यादव में दम है और वह पार्टी और प्रदेश दोनों को चलाने की क्षमता रखते हैं। प्रदेश के किसी भी मुख्यमंत्री और अपनी उम्र के सभी राजनीतिज्ञों से कहीं अधिक परिपक्वता और राजनीतिक गंभीरता का पुट अखिलेश यादव ने अपने निर्णयों में दिखाने का प्रयास किया है, और कहा जा सकता है कि वह एक सफल मुख्यमंत्री के साथ-साथ सफल राजनीतिज्ञ के रूप में भी उभरे हैं। उन्होंने अपनी पार्टी के भीतर सभी धड़ों को एक साथ रखने और दूसरे राजनीतिक दलों सहित केन्द्र की मनमोहन सरकार और अब मोदी सरकार के साथ समन्वय स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है। यही कारण है कि केन्द्र की मोदी सरकार से वह प्रदेश के विकास के लिए सर्वाधिक धनराशि प्राप्त करने में सफल रहे हैं। उनके चेहरे की गंभीरता और शालीनता बताती है कि वह राजनीति की कुटिल चालों को समझकर भी सहज रहने में ही आनंद लेना अच्छा समझते हैं।

[caption id="attachment_4596" align="alignright" width="354"]मुख्यमंत्री अखिलेश मुख्यमंत्री अखिलेश[/caption]

अखिलेश यादव (जन्म 1 जुलाई 1973) वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री हैं। इससे पूर्व वे लगातार तीन बार सांसद भी रह चुके हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश ने 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अपनी पार्टी का नेतृत्व किया। उनकी पार्टी को राज्य में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद, 15 मार्च 2012 को उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्य मन्त्री पद की शपथ ग्रहण की।

संक्षिप्त जीवनी: अखिलेश यादव का जन्म 1 जुलाई 1973 को इटावा जिले के सैफई गाँव में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी मालती देवी के यहाँ हुआ। इनकी माँ का देहांत बचपन में ही हो गया था। अखिलेश विवाहित हैं और तीन बच्चों के पिता हैं। डिम्पल यादव उनकी पत्नी हैं जो कि कन्नौज से निर्विरोध सांसद चुनी गई हैं।

शिक्षा: अखिलेश ने राजस्थान मिलिट्री स्कूल धौलपुर से शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने अभियान्त्रिकी में स्नातक की उपाधि मैसूर के एस0जे0 कालेज ऑफ इंजीनियरिंग से ली, बाद में विदेश चले गये और सिडनी विश्वविद्यालय से पर्यावरण अभियान्त्रिकी में स्नातकोत्तर किया।

राजनीति में भागीदारी

अखिलेश ने मई 2009 के लोकसभा उप-चुनाव में फिरोजाबाद सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी एस0पी0एस0 बघेल को 67,301 मतों से हराकर सफलता प्राप्त की। इसके अतिरिक्त वे कन्नौज से भी जीते। बाद में उन्होंने फिरोजाबाद सीट से त्यागपत्र दे दिया और कन्नौज सीट अपने पास रखी।

मुख्यमन्त्री के रूप में

मार्च 2012 के विधान सभा चुनाव में 224 सीटें जीतकर मात्र 38 वर्ष की आयु में ही वे उत्तर प्रदेश के 33वें मुख्यमन्त्री बन गये। जुलाई 2012 में जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने उनके कार्य की आलोचना करते हुए व्यापक सुधार का सुझाव दिया तो जनता में यह सन्देश गया कि सरकार तो उनके पिता और दोनों चाचा चला रहे हैं, अखिलेश नहीं।

उनकी सरकार को दूसरा झटका तब लगा जब एक आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को निलम्बित करने पर चारों ओर से उनकी आलोचना हुई। जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें नागपाल को बहाल करना पड़ा। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में 43 व्यक्तियों के मारे जाने व 93 के घायल होने पर कफ्र्यू लगाना पड़ा तथा सेना ने आकर स्थिति पर काबू किया। मुस्लिम व हिन्दू जाटों के बीच हुए इस भयंकर दंगे से उनकी सरकार की बड़ी किरकिरी हुई।
-प्रो. त्रिपुरारी कुमार