‘सबका साथ सबका विकास’ ही है सामाजिक न्याय की गारंटी : सांपला

  • 2016-06-29 03:30:20.0
  • राकेश कुमार आर्य

पंजाब की धरती राष्ट्र, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीयता की पोषक रही है। यहां की गुरू परंपरा ने सदा ही इन तीनों बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया है। आज भी पंजाब की भूमि से आने वाले ऐसे कई राजनीतिज्ञ हैं जो राष्ट्र, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीयता के प्रति समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। हमारे देश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विजय सांपला ऐसे ही राष्ट्रवादी चिंतनशील राजनीतिज्ञ हैं। उनकी सादगी, ईमानदारी, कत्र्तव्य परायणता और राष्ट्रवादी सोच से प्रभावित होकर ही उन्हें प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में यह महत्वपूर्ण मंत्रालय प्रदान किया है। इतना ही नही उन्हें पंजाब भाजपा का प्रांतीय अध्यक्ष भी बनाया गया है। विधानसभा के चुनावी वर्ष में यह महत्वपूर्ण दायित्व मिलना सचमुच श्री सांपला की योग्यता को दिखाता है।

पिछले दिनों श्री सांपला से उनके निवास पर मेरी मुलाकात हुई। स्वभाव से सादगी पसंद श्री सांपला का जीवन संघर्षमय रहा है। वह एक साधारण परिवार से ऊपर उठे हैं और आज भी ईमानदारी एवं सादगी को ही अपने लिए अनिवार्य मानते हैं।

[caption id="attachment_29595" align="aligncenter" width="1300"]DSC_0064 श्री विजय सांपला जी से वार्तालाप करते पत्र के संपादक श्री राकेश कुमार आर्य।[/caption]

श्री सांपला बताते हैं कि पारिवारिक परिस्थितियां ऐसी थीं कि उन्हें केवल मैट्रिक तक ही शिक्षा प्राप्त हो सकी। उनका पैत्रक गांव सोफी पिण्ड है। जिसकी यादों में वह अब भी खो जाते हैं। वह बताते हैं कि 1979 में उन्हें अपना गांव छोडक़र सऊदी अरब जाना पड़ा था जहां उन्होंने अपने जीवन को आगे बढ़ाने के लिए कठोर परिश्रम किया, वहां से लौटकर पुन: अपने गांव से ही अपना निजी व्यवसाय स्थापित किया और कुछ सीमा तक परिवार को आर्थिक विषमताओं से छुटकारा दिलाया। हमारे एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्रीय मंत्री ने हमें बताया कि राजनीति में वह स्वयं अंत:प्रेरणा से आये। क्योंकि सामाजिक सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण उन्हें अपने परिवार से संस्कारों के रूप में मिला था। वह कहते हैं ‘‘मैं चाहता था कि परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाऊं और किसी राष्ट्रवादी विचार एवं सोच की पार्टी से अपना संबंध स्थापित करूं। मैंने देखा कि बसपा ‘रैली और थैली’ की पार्टी है उसके पास कोई उत्कृष्ट चिंतन नही है। जबकि अकाली दल और कांग्रेस भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूबे हुए दल हैं। जिनसे राष्ट्र का भला होने की अपेक्षा करना भी गलत है। ऐसी परिस्थितियों में मेरा ध्यान भाजपा की ओर गया और मैंने 27 जुलाई 1997 को भाजपा ज्वाइन की।’’

श्री सांपला का कहना है कि वह अपने राजनीतिक जीवन में बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर जी के विचारों से अधिक प्रभावित रहे हैं। जिन्होंने सामाजिक विषमताओं और छुआछूत की घातक बीमारी से जमकर संघर्ष किया और जीवन भर कई बार अपमान भी झेला। श्री सांपला कहते हैं कि मेरा परिवार बाबा साहेब के प्रति समर्पित रहा है, इतना ही नही मेरे बुजुर्गों ने बाबा साहेब के साथ रहकर कार्य भी किया है। जब बाबा साहेब ने समता सैनिक दल बनाया था तो मेरे सारे परिवार ने उसमें बढ़-चढक़र अपनी भूमिका का निर्वाह किया था। मैं चाहता हूं कि आज भी बाबा साहेब के सपनों को साकार करने के लिए कार्य करने की आवश्यकता है। क्योंकि सामाजिक विषमताएं आज भी विकराल रूप में हमारे सामने खड़ीं हैं, और समाज का एक वर्ग है जो आज भीअपने अधिकारों से वंचित है, जिन्हें न्याय दिलाने के लिए सामाजिक स्तर पर भी कार्य करने की आवश्यकता है।

श्री सांपला कहते हैं कि केन्द्र की मोदी सरकार हर वर्ग के सामाजिक उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है, और सामाजिक न्याय प्रदान कर हर व्यक्ति और वर्ग को विकास के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए कृतसंकल्प है, परंतु इसके उपरांत भी प्रधानमंत्री श्री मोदी जी की नीतियों को सामाजिक समर्थन मिलना भी आवश्यक है। जिसके लिए समाज के जागरूक लोगों को आगे आना चाहिए और सामाजिक न्याय और अधिकारों से वंचित लोगों को उनके अधिकार दिलाने के लिए अपनी खुली सोच का प्रदर्शन करना चाहिए। श्री विजय सांपला का मानना है कि बसपा सुप्रीमो कुमारी मायावती मायाजाल में फंसी हैं। उनका डा. भीमराव अंबेडकर की नीतियों से कोई दूर का भी वास्ता नही है। अकूत संपदा एकत्र कर उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह सामाजिक समता में विश्वास न करके पूंजीवादी व्यवस्था की पोषक हैं, जिसमें समाज के बड़े वर्ग की संपत्ति पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार हो जाता है। जबकि लोकतंत्र और सामाजिक न्याय का सिद्घांत है कि अपने हाथों को खोल दो उन लोगों के लिए जो सामाजिक न्याय से वंचित है आपकी ओर से उनके पास ऐसे साधन जाने दो जो उन्हें ऊपर उठने की प्रेरणा दे और वे आगे बढ़ें। केन्द्रीय मंत्री का मानना है कि किसी वर्ग के अधिकारों का शोषण तब भी होता है जब कोई राजनीतिक दल उस वर्ग को केवल वोट बैंक बनाकर रखे।  वह कहते हैं कि कांग्रेस ने समाज के दलित, शोषित वर्ग को केवल वोट बैंक बनाकर रखा और बाबा साहेब के सपनों के अनुसार इस वर्ग को आगे बढऩे से रोक दिया। इसी पैटर्न पर मायावती आयीं और उन्होंने भी समाज के गरीब, शोषित उपेक्षित वर्ग को अपना वोट बैंक बनाकर रखने की नीति अपनायी। कुमारी मायावती ने अपनी गरीबी दूर की और गरीब के लिए कुछ भी नही किया। श्री सांपला कहते हैं कि मायावती की सोच संकीर्ण है जबकि डा. अंबेडकर का चिंतन विशाल था। वह राष्ट्रवादी थे और राष्ट्रवादी होकर ही सामाजिक न्याय की बातें करते थे।

[caption id="attachment_29596" align="aligncenter" width="1280"]माननीय मंत्री श्री विजय सांपला जी को संपादक द्वारा लिखित पुस्तक “भारत का 1235 वर्षीय स्वतन्त्रता संग्राम” भेंट करते उगता भारत के प्रकाशनाध्यक्ष एन०के० मिश्रा। माननीय मंत्री श्री विजय सांपला जी को संपादक द्वारा लिखित पुस्तक “भारत का 1235 वर्षीय स्वतन्त्रता संग्राम” भेंट करते उगता भारत के प्रकाशनाध्यक्ष एन०के० मिश्रा।[/caption]

श्री सांपला के भीतर देश के गरीब, शोषित, उपेक्षित और दलित व्यक्ति के लिए दर्द है, वह उनके लिए कुछ करना चाहते हैं और ऐसा करना चाहते हैं कि जिससे इस वर्ग को या ऐसे व्यक्तियों को समाज में बराबरी का हक मिले। इसके लिए वह संघर्षशील हैं, कहते हैं कि राजनीतिक स्तर पर ही नही सामाजिक स्तर भी कार्य किया जा रहा है जिसका शोर कम किया जा रहा है पर यथार्थ के धरातल पर ठोस कार्य हो रहा है। श्री सांपला का कहना है कि ‘सबका साथ और सबका विकास’ श्री मोदी जी का अपनी सरकार का घोषित लक्ष्य है और सारी सरकार उसी पर कार्य कर रही है। ‘उगता भारत’ के पाठकों के लिए श्री सांपला का कहना है कि इस पत्र के माध्यम से ‘जाति तोड़ो समाज जोड़ो’ का अभियान चलाया जाना सामाजिक न्याय की दिशा में किया जा रहा ठोस कार्य है, जिसे समाज के लोगों की मान्यता मिलनी चाहिए।
- राकेश कुमार आर्य