राख होते आशियानों में सुलगते प्रश्न

  • 2015-11-18 05:30:26.0
  • उगता भारत ब्यूरो

नरेंद्र भारती

प्रदेश में भीषण अग्निकांडों में आज तक अरबों के हिसाब से संपत्ति राख के ढेर में बदल चुकी है। अग्निकांडों में हजारों लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं। इन हादसों में कई परिवार तबाह हो चुके हैं, लेकिन यह प्रश्न सुलगता रहता है कि आखिर इनके कारण क्या हैंज्हिमाचल में बढ़ते अग्निकांडों से लोगों के आशियाने राख हो रहे हैं और लोग बेघर होते जा रहे हैं। कई अग्निकांडों में बच्चों से लेकर बुजुर्ग भी जल रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में कुल्लू की सैंज घाटी के कोटला गांव में आग लगने से लगभग 100 मकान जलकर राख हो गए तथा चार मासूम बच्चे भी लापता हो गए हैं। इस भीषण अग्निकांड में पूरा गांव जलकर राख हो गया है।  इस भीषण अग्निकांड में चार मंदिर भी जलकर राख हो गए। दिवाली की रात को भी प्रदेश में 43 स्थानों पर आगजनी की वारदातें हुई थीं। दिवाली के चार दिन बाद ही यह भयंकर आगजनी की घटना बहुत ही दर्दनाक है। इसमें हजारों बेजुबान मवेशी जिंदा जलकर राख हो गए। गनीमत रही कि इसमें किसी जनमानस की जान नहीं गई।पिछले दिनों नालागढ़ के बद्दी में मकान में आगजनी के कारण एक बच्चा जलकर राख हो गया था। प्रदेश में भीषण अग्निकांडों में आज तक अरबों के हिसाब से संपत्ति राख के ढेर में बदल चुकी है। अग्निकांडों में हजारों लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं। अग्निकांडों से कई परिवार तबाह हो चुके हैं। इन अग्निकांडों से कई प्रश्न सुलगते जा रहे हैं कि इनके मुख्य कारण क्या हैं। अधिकांश कांडों में बिजली का शार्ट सर्किट ही सामने आता है, मगर कुछ मामलों में लोगों की लापरवाही के कारण भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं। गत वर्षों में भीषण से भीषणतम अग्निकांड हो चुके हैं।


छह जनवरी, 2008 को ऐतिहासिक मलाणा गांव में 150 घर राख हो गए थे। 24 दिसंबर, 2011 को रोहड़ू में भी एक गांव जला था, जिसमें 80 मकान राख हो गए तथा 200 मवेशी मारे गए थे। 27 जनवरी, 2014 को शिमला में 110 साल पुरानी ब्रिटिश हुकूमत की सबसे भव्य हेरिटेज बिल्डिंग गॉर्टन कैसल आग की भेंट चढ़ गई। अग्निकांडों में कई ऐतिहासिक धरोहरें राख हो चुकी हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2002 से लेकर 2011 तक 8000 अग्निकांड हो चुके हैं और इनमें करीब 40 अरब की संपत्ति राख हो चुकी है। इन घटनाओं में 89 लोग जलकर मारे गए, जबकि 3876 के लगभग जंगली जानवर व पशु भी मारे गए। 2012 से लेकर 2015 में भी इनमें कमी नहीं आई है, बल्कि इनमें बेतहाशा वृद्धि हो रही है।औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में एक दवा फैक्टरी में आग लगने से चार करोड़ का नुकसान हुआ था। फायर ब्रिगेड कर्मियों ने आठ घटों की मशक्कत के बाद आग की लपटों पर काबू पाया था। इस प्रकार हर साल अरबों की संपत्ति आगजनी की भेंट चढ़ रही है, मगर सरकार इसके बचाव में कारगर कदम नहीं उठा रही है।
केवल एक तिरपाल व थोड़ी सी राहत राशि देकर अपने कत्र्तव्य की इतिश्री कर अपना फर्ज निभा रही है, लेकिन जिसका आशियाना जलता है, उसके जख्म ताउम्र रिसते रहते हैं। प्रदेश में गोशालाओं में हुए अग्निकांडों में हजारों मवेशी जल कर मारे जा चुके हैं। हालांकि दमकल कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर कुछ संपत्ति को बचा लेते हैं, मगर कई दमकल कर्मी भी जान से हाथ धो चुके हैं। कुछ साल पहले गोहर उपमंडल में आग के कारण पूरा क्योली गांव जल गया था।16 नवंबर, 2013 को शिमला के जाखू के समीप रिच मांउट में एक स्टोर में आग लगने से एक व्यक्ति की जलकर मौत हो गई थी। 26 नवंबर, 2013 का किन्नौर को निचार में आग लगने से दस घर आग की चपेट में जलकर राख हो गए। प्रदेश के हर जिले में आगजनी की वारदातें हो रही हैं। ज्यादातर मामले गांवों में घटित हो रहे हैं। लोगों को भी चाहिए कि घरों में गल-सड़ चुकी बिजली की तारों को बदलवा लें, ताकि कोई अप्रिय हादसा न हो सके। पूरी तरह सतर्कता बरतनी चाहिए तथा विभाग को सूचित करना चाहिए। ज्वलनशील पदार्थों को घर से दूर रखना चाहिए और पशुओं का चारा व घास वगैरह भी गोशालाओं से काफी दूर रखना चाहिए, क्योंकि ऐसी सूखी चीजें जल्दी आग पकड़ती हैं। अकसर देखा गया है कि सरकारी व निजी भवनों में आग बुझाने के यंत्र ही नहीं होते हैं। स्कूलों व कालेजों में भी ऐसी व्यवस्था कम ही है, जबकि स्कूलों में भी कई भयानक अग्निकांड हो चुके हैं।प्रशासन को चाहिए कि प्रत्येक सरकारी व निजी दफ्तर में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध करवाए, ताकि इस तरह की घटनाओं में तबाही कम हो सके। बिजली बोर्ड को समय-समय पर बिजली के खंभों व तारों का निरीक्षण करते रहना चाहिए। सरकार ने जिला मुख्यालयों में तो अग्निशमन केंद्र स्थापित किए हैं, लेकिन जब तक ये गांव में पहुंचते हैं, तब तक मकान जलकर राख हो जाते हैं। सरकार को प्रत्येक बड़े शहर से लेकर गांव तक छोटे-छोटे अग्निशमन केंद्र खोलने चाहिए। साथ ही प्रत्येक गांव में आपदा कमेटियां गठित की जाएं तथा उन्हें अग्निशमन का प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि भविष्य में होने वाली ऐसी घटनाओं पर काबू पाया जा सके। प्रदेश के लोगों को भी सावधानी बरतनी होगी, तभी ऐसे अग्निकांड रुक सकते हैं, अन्यथा आशियाने यूं ही जलकर राख होते रहेंगे और लोग बेबस होकर उन्हें देखते रहेंगे।