पैसा और संस्कृति

  • 2015-08-20 10:53:31.0
  • विकास राणा
पैसा और संस्कृति

देखो भई ऐसा है, सबसे बड़ा पैसा है- यह पंक्तियां हमारी नहीं बल्कि एक विज्ञापन की है जिसे इस वक्त का सबसे बड़ा तथाकथित हंसोड़ बोलता है। इस बेचारे किराए के विदूषक की भी यही मजबूरी है क्योंकि यह एक छोटे से शहर के नितांत मध्यमवर्गीय परिवार का लडक़ा है जो अपने द्विअर्थी हाजिर जवाबी के बल पर करोड़पति हो गया है।

लेकिन उसका यह वाक्य आज के जीवन की सच्चाई को उजागर करने वाला है। हालांकि ?सा नहीं कि पुराने जमाने के लोग इस तरह के जुमले नहीं बोलते थे- पहले भी कहा जाता था- बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रूपैय्या। लेकिन तब इस वाक्य में एक व्यंग्य निहित होता था। तब पैसा आज की तरह बाप नहीं था। अर्थशास्त्री कहते ही हैं पैसा अच्छा गुलाम है, लेकिन जब पैसा मालिक बन जाता है तो बेहद बुरा साबित होता है।

पैसा साहूकार यानी कर्ज देने वाले और कर्जदार दोनों को मुसीबत में डाल सकता है, बशर्ते उसे सिर पर न चढ़ाया जाए। कहानी सुनें। एक रात एक कर्जदार बड़ा बेचैन था। कभी बिस्तर से उठ कर बरामदे में टहलता, कभी लेटता। कभी उठता। कर्जदार की बीवी ने झल्ला कर कहा- अरे सो क्यों नहीं जाते। मैं तो सारा दिन काम करके थक गई हूं। कम से कम मुझे सोने दो। उसका खाविन्द बोला- क्या बताऊं। मेरी तो नींद उड़ चुकी है।

छह महीने पहले मैंने पड़ोसी से पचास हजार रूपए लिये थे। आज तक का वादा किया था। कल उसे हर हालत में पचास हजार देने हैं लेकिन मेरे पास पचास हजार तो छोड़ो पचास धेले तक नहीं है। कल पड़ोसी सबके सामने मुझे जलील करेगा। मेरी इज्जत बरबाद कर देगा। बेचारी पत्नी क्या करती। वह सोना चाहती थी। लेकिन पति की उठक-बैठक के कारण उसे नींद नहीं आ रही थी।

गुस्से में उठ कर वह छत पर चली गई। उसने देखा कि पड़ोसी बड़े मजे से हंसता मुस्कराता अपनी छत पर घूम रहा है।  पत्नी ने गुस्से में चिल्ला कर कहा- अजी भाई साब, मेरे पति कल आपको पचास हजार रूपए लौटाने वाले नहीं हैं। इतने बेफिक्र मत टहलिए। पत्नी ने यह बात इतनी जोर से कही कि उसके पति के कानों में भी पड़ गई। पति ने सोचा अब जो होगा देखा जाएगा और थोड़ी देर में कर्जदार पति-पत्नी तो सो गए लेकिन कर्ज देने वाला पड़ोसी रात भर बेचैनी से छत पर टहलता रहा। उसकी नींद उड़ चुकी थी।

इसलिए पैसे को गुलाम बना कर ही रखो। इसे माथे पर मत चढ़ाओ और दुर्भाग्य से आज हमारी सरकार सहित सारा देश पैसे के पीछे भागता नजर आ रहा है। मजा तो तब है जब पैसा आदमी के पीछे दौड़े। जो कुत्ता अपने से चार कदम आगे चलता है वह लौट कर मालिक को काट भी सकता है लेकिन मालिक से दो कदम पीछे चलने वाला कुत्ता बड़ा स्वामी भक्त होता है। चाहे कुत्ता विशेषज्ञों से पूछ ले। पैसा विशेषज्ञ भी यही बात कहेंगे कि पैसे को गुलाम बना कर रखना चाहिए।