काला धन, कर कानून और तेज़ आर्थिक विकास

  • 2015-12-12 11:51:08.0
  • अनिल गुप्ता

इनफ़ोसिस के पूर्व निदेशक और प्रत्यक्ष कर सुधार पर बनी केलकर समिति के सदस्य रहे मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन सर्विसेज के चेयरमैन श्री मोहनदास पई ने काले धन का पता लगाने की रणनीति को मजाक बताया है! उनका कहना है की सरकार के पास अपराधियों कोतुरन्त पकड़ने, जेल भेजने की कोई नीति या ख़ुफ़िया तंत्र नहीं है!नरेंद्र मोदी सरकार की बड़ी असफलता बताते हुए श्री पई ने बेहतर जांच और अभियोजन तंत्र की आवश्यकता बताई है!उन्होंने कहा कि काले धन का पता लगाने की रणनीति गलत तरीके से तैयार हुई है कोई भी इस देश में रहने के लिए ६०% कर नहीं देगा!यह कार्य बेहतर नीति और बेहतर सूचना पर आधारित होगा! फ़ास्ट ट्रेक अदालतें भी जरूरी हैं!उन्होंने यह भी कहा कि काला धन आपके लिए किसी विदेशी बैंक में इंतज़ार नहीं कर रहा कि आप जब जाएँ, सूचना प्राप्त करलें! बस हो गया!
यही बात काफी समय से श्री सुब्रमण्यम स्वामी भी कह रहे हैं! उनका भी कहना है कि काले धन के सम्बन्ध में श्री अरुण जेटली द्वारा बनाये कानून में विशेषों में जमा काला धन वापिस लाने की कोई व्यवस्था ही नहीं है!
black money

वास्तव में तो अप्रेल २००९ के बाद से विदेशी बैंकों में जमा काला धन वहां से खिसकना शुरू हो गया था! अप्रेल २००९ में लन्दन में संपन्न हुई जी-२० देशों के शिखरबैठक में काले धन पर लम्बी चर्चा हुई थी और उसमे तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह को काले धन के विरुद्ध बनने वाली समिति की अध्यक्षता का प्रस्ताव किया गया था जिसे भारतीय प्र.म. ने ‘विनम्रता पूर्वक’ अस्वीकार कर दिया था! शायद ‘माताजी’ की अनुमति नहीं मिली थी!उस समय स्विस बैंकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री लिसेन के अनुसार स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में भारतीयों का कुल जमा धन १.८ ट्रिलियन डॉलर ( लगभग ९४ लाख करोड़ रुपये) था! तत्काल बाद वहां से भारतीयों का धन खिसकना शुरू हो गया! और २०१४ तक यह घटकर केवल लगभग ९-१० हज़ार करोड़ रुपये पर सिमट गया!अर्थात लगभग ९९.९% धन वहां से गायब हो गया!कैसे? भारत कि एजेंसियां क्या कर रही थीं? और केवल स्विस बैंक ही नहीं बल्कि ७७ ऐसे देश हैं जिन्हे टैक्स हैवन के रूप में जाना जाता है! बोफोर्स केस में यह अनुभव आया कि दुसरे देशों से सूचना प्राप्त करने में कितनी कठिनाईयां आती है! अब अगर ऐसे में यह धन दो तीन देशों की यात्रा कर लेता है तो उनकी जानकारी प्राप्त करने के चक्कर में वहां की अदालतों की कार्यवाही में ही कई दशक बीत जायेंगे!और कोई भी प्रभावी कार्यवाही होना लगभग नामुमकिन हो जायेगा!
ऐसे में काले धन का पता लगाने के लिए कहीं अधिक बेहतर और कारगर पद्धति और रणनीति बनाने की आवश्यकता थी! जिसमे वर्तमान कानून विफल ही हैं! श्री जेटली द्वारा बनाये कानून के तहत तीस सितम्बर २०१५ तक स्वैच्छिक घोषणा का समय दिया गया था लेकिन इसमें जितना कर और समाधान राशि देने की व्यवस्था थी उससे आकर्षित होकर केवल नगण्य घोषणा ही हो पायी!जितनी घोषणा हुई उससे कहीं अधिक धन बैंकिंग प्रणाली की खामियों का लाभ उठाते हुए बाहर चला गया!
जून २०११ में बाबा रामदेव के रामलीला मैदान में धरने के पश्चात श्रीमती सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी,दामाद रोबर्ट वाड्रा, सुमन दुबे, विन्सेंट जॉर्ज एवं बारह अन्य व्यक्ति जिन्होंने इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अपना व्यवसाय ‘वित्तीय सलाहकार’ घोषित किया था, एक निजी विमान से ८ जून २०११ को ज़्यूरिख़ (स्विट्ज़रलैंड) के लिए रवाना हुए थे!निम्न लिंक पर इसे देखा जा सकता है: