जनसेवा करने से मिलता है आनंद : कारूराम

  • 2016-01-17 13:30:33.0
  • श्रीनिवास आर्य

श्रीनिवास आर्य व एलएस तिवारी

श्री कारूराम एक ऐसा नाम है जो भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए भी और उसके पश्चात सेवानिवृत्ति के पश्चात आज भी गरीबों-दलितों एवं शोषितों के कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने जनसेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया और उसी पर आज भी कायम हैं।

विगत 9 जनवरी को श्री के.राम के निवास स्थान पर उनसे हमारी मुलाकात हुई। उनके सहज, सरल और सादगी भरी जीवन शैली ने हमें प्रभावित किया। जिस समय हम उनके पास पहुंचे उसी समय बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का फोन आ गया जो उनसे गृहमंत्री राजनाथसिंह से बातचीत कराने के लिए आग्रह कर रहे थे। श्रीराम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की बात कराने हेतु गृहमंत्रालय के एक अधिकारी के लिए फोन मिलाया और उन्हें आवश्यक दिशा निर्देश दिये। इस सब प्रक्रिया में कुछ समय लग गया, इसलिए हमारे परस्पर अभिवादन का आदान प्रदान भी कुछ विलंब से हुआ।
retired IAS officer karooram
श्री के.राम से बातों का सिलसिला आरंभ हुआ। उन्होंने हमें बताया कि उनका जन्म बिहार के जनपद जहानाबाद के ग्राम पथरा में दिनांक 6.8.1954 को हुआ था। उनके पिता का नाम श्री नाथुनराम और माता का नाम श्रीमती सुंदरी देवी था। श्री के.राम के तीन अन्य भाई बहन हैं। अपने पिता की कुल चार संतानों में से वह सबसे छोटे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्राम पथरा की न्याय पंचायत इक्किल से प्रारंभ हुई। जबकि उच्च शिक्षा उन्होंने एस.एस. कालिज जहानाबाद से प्राप्त की। 1974 में वह पीसीएस करके प्रशासनिक सेवाओं में आ गये। उन्होंने जहानाबाद के डिप्टी कलेक्टर के पद से अपने कैरियर का शुभारंभ किया। वह छपरा के जिलाधिकारी भी रहे हैं।

श्री कारूराम की व्यवहार कुशलता और लोगों के काम आने की प्रवृत्ति का ही परिणाम था कि उनके पास आने वाले लोगों का सिलसिला टूट नही रहा था। हमारी बातों का क्रम चल ही रहा था कि दो अधिकारी बीच में आ गये, इसी बातचीत के दौरान बिहार से एक पूर्व विधायक अपने कुछ लोगों की समस्या के समाधान हेतु पहुंच गये। पर श्री के.राम जी थे कि हमारी ओर निरंतर मुखातिब बने रहे और हमारे प्रश्नों का उत्तर निरंतर देते रहे।

हमने पूछा कि आपकी यह व्यवहार कुशलता और सादगी भरी जीवनशैली आपको किससे मिली? तब वह उसी सहजता से बोल उठे-‘‘मां से।’’ माता-पिता के प्रति सम्मान भाव उनके शब्दों से झलक रहा था और अपने जीवन की उपलब्धियों का श्रेय उन्हें देना वह भूले नही। वह कहते हैं कि बचपन से ही माता-पिता ने जनसेवा के ऐसे संस्कार उन्हें दिये कि आज जनसेवा मेरे जीवन का अभिन्न अंग बनकर रह गयी है। मुझे लोगों के काम आने में आनंद मिलता है। मैं चाहता हूं कि देश से भुखमरी समाप्त हो, गरीबी समाप्त हो और प्रत्येक प्रकार का अन्याय समाप्त हो। उसके लिए प्रत्येक अधिकारी को अपने स्तर पर रहते हुए सेवा भावी होना ही चाहिए। हर व्यक्ति मन लगाकर जनसेवा के क्षेत्र में कार्य करे तो देश की समस्याएं बड़ी शीघ्रता से समाप्त हो सकती हैं। पर समस्या यह है कि हम दूसरों की समस्याओं का निदान देने में उसके लिए सहायक बनना नही चाहते, हम चाहते हैं कि हमारी समस्याओं के निदान में दूसरे लोग हमारे सहायक बनें।

हमारा प्रश्न था कि जनसेवा का आपका कोई उदाहरण? हल्की सी मुस्कुराहट के साथ कहते हैं कि जब मेरा जीवन ही जनसेवा के लिए समर्पित रहा है तो कोई विशेष उदाहरण तो मेरे पास नही है। पर इतना अवश्य है कि अपने सेवाकाल में मैंने एक लाख से अधिक लोगों को सरकारी नौकरियां उपलब्ध करायीं। जबकि 33000 से अधिक रेलवे कर्मियों को बहाल कराने में सहायता देकर उनके चूल्हे में आग जलाने का प्रबंध किया। अन्य विभागों में भी मेरा यह सेवाभावी कार्य इसी प्रकार चलता रहा।

श्री के.राम को 1985 में प्रमोशन देकर आई.ए.एस. बनाया गया। वह बिहार के मुख्यमंत्री के ओ.एस.डी. भी रहे। उनकी हर राजनीतिज्ञ से अच्छी पटती है। पर फिर भी यह मानते हैं कि इस बार बिहार में मोदी को ‘चांस’ मिलना चाहिए था। बिहार के विकास के लिए यह अच्छा रहता। वह कहते हैं कि उनकी अपनी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नही है। वह चाहते हैं कि जिस प्रकार जनसेवा कर रहा हूं उसी प्रकार करता रहूं। श्री कारूराम का कहना है कि आज का युवा अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए अपने आपको और समर्पित करे। देश उनकी प्रतीक्षा कर रहा है। देश के सामने बड़ी भारी मात्रा में समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं, जिनके निराकरण के लिए युवाओं को अपनी प्रतिभा को देश सेवा के लिए लगाना चाहिए।

अंत में श्री के.राम ने ‘उगता भारत’ के पाठकों के लिए अपना संदेश देते हुए कहा कि यह पत्र जिस प्रकार का राष्टï्रवादी चिंतन प्रस्तुत कर रहा है, वह अपने आप में सराहनीय है। इसके चिंतन को समझा जाए और चिंतन को प्रस्तुत करने वाले लेखकों के राष्टï्रवादी कार्य को आगे बढ़ाया जाए। चिंतनशील और अध्ययनशील पाठकों में ही देश सेवा का एक व्यक्ति छिपा होता है जो देश की समस्याओं का समाधान करने में सहायता करता है।

श्री के.राम ने कहा कि मैं ‘उगता भारत’ के माध्यम से यही कहना चाहता हूं कि देश से गरीबी, भुखमरी, अन्याय, अशिक्षा, बेरोजगारी और उत्पीडऩ जैसी बीमारियों को भगाने में हर व्यक्ति अपने स्तर से बेहतर कार्य करने का प्रयास करे।