गद्दारी और बर्बरता में कम्युनिस्ट सबसे आगे

  • 2016-05-08 04:15:46.0
  • डा. संतोष राय

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देश के साथ गद्दारी में कम्युनिस्ट सबसे आगे रहते हैं । इन कम्युनिस्ट गद्दारों की सूची बहुत लंबी है फिर भी आज इनके काले, घिनौने और गंदें करतूतों से आपको अवश्य रूबरू करवाएंगे । गद्दार कम्युनिस्टों के हृदय में सुभाषचंद्र बोस के लिए बिलकुल सम्मान नहीं था वे इन्हें तोजो का कुत्ता कहते थे। आज इस्लामिक आतंकवाद पर यदि कोई बोलना चाहता है तो सबसे पहले ये कम्युनिस्ट ही आतंकी को बचाने में सहायता करने आते हैं। चूँकि हम गांधी को कोई महान व्यक्ति नही कहते हैं और न ही कहा है, अंग्रेजी राज्य में कम्युनिष्टों को गांधी की लंगोट में कम्युनिस्टवाद नही दिख रहा था तो उस गांधी को कम्युनिस्टों ने कहा था कि ये महात्मा गांधी अंग्रेजों का दलाल और एजेंट है, लंगोटी धारण करना सिर्फ नौटंकी है । गांधी की लंगोटी में कम्युनिस्टों ने समाजवाद के दर्शन नहीं देखे। कम्युनिस्टों को महात्मा गांधी की लंगोटी साम्राज्यवादी लगती थी और अब कम्युनिष्टों को गांधी कम्युनिष्ट दिखने लगे हैं! ज्ञात हो कि कम्युनिस्ट आज तक यह ठीक से उत्तर नहीं दे पाए कि 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध क्यों किया था? इस विरोध से आप कयास लगा सकते हैं कि कम्युनिस्टों ने देश की आजादी के आंदोलन के साथ गद्दारी की थी।

द्वितीय, कम्युनिस्टों की सबसे बड़ी गद्दारी तो 1962 में पूरे देश को देखने को मिला। आज तक उस गद्दारी पर कम्युनिस्ट बात करने पर मुंह छिपा लेते हैं, यदि इन्हें कोई गद्दार कहता है तब ये हिंसक कार्यवाही पर उतर जाते हैं । सनद रहे कि कम्युनिस्ट पार्टियों ने 1962 में चीन के तानाशाह माओत्से तुंग द्वारा भारत पर किए गए हमले का पुरजोर समर्थन किया था । चीन की विस्तारवादी, उपनिवेशवादी, साम्राज्यवादी सेना द्वारा हमारे करीब छह हजार सैनिकों की हत्या और हमारी 90 हजार वर्ग मील भूमि कब्जाने पर कम्युनिस्टों ने खूब खुशियां मनाईंऔर मिठाइयां बांटी थीं इतना ही नहीं असम सहित कई जगहों पर चीनी सेना के समर्थन में बैनर लगाए गए थे ।

चीन के तानाशाह आक्रमणकारी माओत्से तुंग को कम्युनिस्टों ने जवाहर लाल नेहरू की जगह भारत का प्रधानमंत्री कहा था । इससे आप समझ सकते हैं कि कम्युनिस्ट जब गद्दारी पर उतर आते हैं तो किस हद तक जा सकते हैं । कम्युनिस्टों की यही गंदी मानसिकता थी कि भारत पर कब्जा करने के बाद माओत्से तुंग भारत पर कम्युनिस्ट-तानाशाही राज कायम कर सत्ता की चाभी उन्हें सौंप देंगे। बात सिर्फ इतनी ही नहीं थी, कम्युनिस्टों ने सामरिक कारखाने में हड़ताल करा दी थी, इसलिए कि भारतीय सैनिकों को हथियार और बारूद की आपूर्ति बुरी तरह रूक जाए और भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों के हाथों मार डाले जाएं ।

अब आपको यह जानकारी हो गई होगी कि दुनिया के इतिहास में यह पहली घटना थी जब युद्ध के समय अपने ही सैनिकों को हथियार और बारूद की आपूर्ति हड़ताल करवाकर रोकी गई हो, और तो और सीपीएम आज तक यह नहीं कहती कि चीन आक्रमणकारी था और उसने 1962 में भारत पर आक्रमण किया था और माओत्से तुंग को तो ये 1962 से भगवान मानने लगे थे। कम्युनिस्टों के आराध्य माओत्से तुंग ने हमारे करीब छह हजार से अधिक सैनिकों की हत्या की थी उस माओत्से तुंग को कोई देशभक्त कैसे और क्यों अपना आराघ्य मानेगा।

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को कम्युनिस्टों ने जापान और हिटलर का दलाल, तोजो का कुत्ता कह कर आजाद हिंद फौज के विरूद्ध जबरदस्त आंदोलन चलाया था, वैसे तो नेहरु ने भी नेताजी सुभाष को तोजो का कुत्ता कहा था!

इन कम्युनिस्टों का आदर्श और प्रेरणास्रोत हिटलर रहा है । कम्युनिस्टों के पूजनीय महापुरूष रहे हैं तानाशाह स्तालिन । यह स्तालिन सोवियत संघ के तानाशाह थे और स्तालिन के प्रेरणास्रोत रहे हैं-हिटलर। हिटलर के साथ ही स्तालिन ने अनाक्रमणसंधि की थी। स्तालिन ने हिटलर के साथ अनाक्रमण संधि क्यों की थी?  इसका कोई कम्युनिस्ट कोई भी सकारात्मक उत्तर नहीं दे पाता है।

अनाक्रमण संधि का अर्थ था हिटलर की हिंसक विस्तार नीति को स्वीकार करना। हिटलर अगर अनाक्रमण संधि को तोड़ कर सोवियत संघ पर हमला नहीं करता तो कम्युनिस्ट कभी भी हिटलर के आलोचक नहीं होते। हिटलर की सेना सोवियत रूस की माइनस 150 डिग्री की ठंड में ठिठुर कर बुरी तरह मरी थी। फिर भी कम्युनिस्ट अपने आपको फासिस्ट विरोधी कहते हैं। मालूम हो कि इंदिरा गांधी के अधिनायकवाद का सीपीआई ने खुलकर पूरी तरह समर्थन किया था। कम्युनिस्टों ने इन्दिरा गांधी की मुखविर बनकर इमरजेंसी विरोधी लोगों को जेल भिजवाया था और उन पर हिंसा और जुल्म करवाए थे ।

इन कम्युनिस्टों को इस्लामिक आतंकवादी अफजल गुरू वर्तमान में प्रेरणास्रोत और गॉड फादर है। अफजल गुरू कौन था?  सुप्रीम कोर्ट तक ने उसे आतंकवादी माना और फांसी की सजा दी थी। अफजल गुरू ने अपने जीवंत साक्षात्कार में स्वयं को आतंकवादी कहा था, स्वयं को आतंकवाद की भयावह व आत्मा को कंपा देने वाली घटनाओं का मास्टर मांइड होने का दावा किया था, अफजल गुरू का यह टीवी लाइव साक्षात्कार नवीन कुमार नामक टीवी पत्रकार ने लिया था। यह टीवी लाइव साक्षात्कार आज भी देखा जा सकता है। देश में अब तक दर्जनों लोगों को फांसी पर चढ़ाया गया पर सिर्फ अफजल गुरू पर ही कम्युनिस्टों ने बरसी क्यों मनाई, इसलिए कि अफजल गुरू आतंकवादी था और उसने भारत विखंडन के लिए कार्य किया था साथ में वह भारत को पूरी तरब बर्बाद करने का स्वप्न देखता था। ज्ञात रहे कि जेएनयू के रजिस्ट्रार ने साफ कर दिया है कि अफजल गुरू की बरसी मनाने की स्वीकृति नहीं मिलने पर कन्हैया बहुत ही नाराज था। कम्युनिस्टों के इन गंदे कार्यों को आप देखेंगे तो इन्हें सत्ता देने लायक नहीं समझेंगे। आप समझ जाएंगे कि ऐसे गद्दार मानसिकता के लोग यदि सत्ता में आ गए तो देश को कहां ले जाएंगे ये किसी से अब छिपा नहीं है ।

इतना ही ही नहीं कम्युनिस्ट ज्योति बसु ने आडवाणी जी के लिए घोर आपत्तिजनक बात कही है।